ये मचान, ये शिकारी किसकी प्रतीक्षा में हैं ?

  • 2016-01-11 01:56:05.0
  • राकेश कुमार आर्य

प्रधानमंत्री मोदी पर देश की जनता को अभी भी गर्व है, सारा देश उनसे पाकिस्तान के प्रति गंभीर और ठोस कार्यवाही की अपेक्षा कर रहा है। देश यह भी जानता है कि इस समय दिल्ली की गद्दी पर मोदी का शासन है, इसलिए अब कायरता की बातें नही होंगी। प्रधानमंत्री पद की गंभीरता को मोदी अच्छी प्रकार जानते हैं। पर फिर भी किसी कवि की भेजी ये पंक्तियां मुझे अच्छी लग रही हैं-

कायरता का तेल चढ़ा है, लाचारी की बाती पर,

दुश्मन नंगा नाच करे है,
भारत माँ की छाती पर,

दिल्ली वाले इन हमलों पर दो आंसू रो देते हैं,

शत्रु पांच मारने में, हम सात शेर खो देते हैं,

हम अपेक्षा करेंगे कि कवि को अपनी पीड़ा अब इन शब्दों में अधिक देर तक बयान न करनी पड़े। हमने अटलजी के समय तीन आतंकवादियों को छोडऩे की गलती की सजा बहुत भुगत ली है, अब यह और नही देखी जा सकती।

कांग्रेस इस समय गैर जिम्मेदाराना भूमिका का निर्वाह कर रही है, जबकि उसे भी राष्ट्रहित में प्रधानमंत्री के साथ आकर खड़ा होना चाहिए। वह कुछ ऐसा प्रदर्शन कर रही है जैसे पठानकोट की घटना पहली बार घटी है और इससे पहले उसके शासन में ऐसा कभी कुछ नही हुआ। हम चाहेंगे कि उसे भी अपने गिरेबान में झांकना चाहिए और समझना चाहिए कि जब देश का बंटवारा हुआ था तो उस समय सरकार किसकी थी? उसे यह भी समझना चाहिए कि जब पाक अधिकृत कश्मीर बना, जब मुंबई पर हमला हुआ, जब चाइना ने जमींन हडपी, जब वीर सैनिकों के सर काट के पाकिस्तानी ले गए, देश में बोफोर्स का घोटाला हुआ, सैनिकों की वर्दी का पैसा खा गए, सरदारों का कत्ले आम किया, शिमला का समझौता कर देश की बहुमूल्य जमीन पाक को दे दी, आसाम में हिन्दुओं का खून बहाया गया, कश्मीर में वहां के हिंदू पंडितों को मारा गया, कामनवेल्थ का घोटाला हुआ,
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कोल घोटाला हुआ, 2जी का घोटाला हुआ, जब दूरदर्शन के मोनो से ‘सत्यम् शिवं सुन्दरम्  हटाया गया, जब भारतीय मुद्रा से ‘सत्यमेव जयते’ हटाया गया, जब ‘वन्दे मातरम्’ का अपमान किया गया, तब किसकी सरकार थी? निश्चित रूप से ये सारे कारनामे कांग्रेसी सरकारों के शासनकाल में ही हुए।

कांग्रेस की इन कमियों की ओर संकेत करने का हमारा आशय यह नही है कि जितने ‘चूहे’ कांग्रेस मारकर खा चुकी है, उतने चूहे खाने देने की अनुमति मोदी सरकार को दी जाए। ऐसी बहसों को सुनते-सुनते भी लोगों के कान पक चुके हैं कि कांग्रेस ने ये किया और भाजपा अब ऐसा कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी और उनके सभी मंत्रिमंडलीय साथियों को यह बात ध्यान में रखनी ही पड़ेगी कि वह सत्ता में केवल इसलिए आए हैं कि देश की जनता सरकारों द्वारा ‘चूहे मार’ कर पाप करने की नीतियों से दुखी हो चुकी थी, और अब वह ऐसी किसी भी ‘बिल्ली मौसी’ को अपनी मालकिन नही बनाना चाहती जो नौ सौ चूहे खाकर हज को चलने की तैयारी करेगी। अब जनता एक-एक चूहे खाने का हिसाब लेना चाहती है। मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में जनता को इस बात के लिए उत्तेजित भी किया था, कि वह प्रत्येक चूहे के खाने का हिसाब मांगने की क्षमता रखने वाली बनें। साथ ही मोदी ने अपनी ओर से यह विश्वास भी दिलाया था कि वह न तो ‘चूहा’ खाने देंगे और न ‘चूहा’ खाएंगे, यानी ना तो पाप करेंगे और न किसी को करने देंगे। पर पठानकोट में महापाप हो गया है। खबरें मिल रही हैं कि ‘जयचंद’ जिंदा है और जो कुछ हुआ है वह ‘जयचंद’ के कारण हो गया है। पापी ‘जयचंद’ के कारण हमारे सात सैनिकों का बलिदान हो गया है, सारा देश अपने सैनिकों के बलिदान को व्यर्थ नही जाने देना चाहता। प्रधानमंत्री मोदी पाक स्थित आतंकी शिविरों पर कार्यवाही करने से पहले  घर के ‘जयचंदों’ से निपटने की रणनीति बनायें। यह देश कभी बाहर से नही हारा, इसे जब भी हार का मुंह देखना पड़ा है, तभी पीठ में छुरा घोंपने वाला कोई अपना ही ‘जयचंद’  निकला है।

जो तीर खाकर देखा कमीनगाह की तरफ,

अपने ही दोस्तों से मुलाकात हो गयी।’

चमत्कार देखिये, चीन ने इस्लाम की कमर तोड़ रखी है, बेन पर बेन, दाढ़ी नहीं रख सकते, बुरखा नहीं पहन सकते , खुले में नमाज़ नहीं पढ़ सकते, जीना हराम कर रखा है, पर ये बड़े बड़े इस्लामिक संगठन चीन के खिलाफ चूं करने की भी औकात नहीं रखते !!

इस  देश में एक नही अनेक ऐसी घटनाएं होती हैं जिन पर आप आश्चर्य करते रह जाएंगे। अपने इन देशी वामपंथियों को ही लें जो सांस तक अपने पप्पा बोले तो चीन से पूछकर लेते हैं, पर भारत में जेहादियों, आतंकियों के पक्ष में ‘केंडल मार्च’ निकाल रहे हैं !!

इसी प्रकार पश्चिम में चर्च और इस्लाम का छत्तीस का आंकड़ा है, दोनों एक दूसरे को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं, पर भारत में उनका नेता जॉन दयाल याकूब से लेकर अफज़ल गुरु का पैरोकार बनकर उभरता है !!

.....और देखिये, वामपंथियों की अमेरिका से जनम-जनम की दुश्मनी है, पर 99 फीसदी अमेरिकन चंदे पर पलने वाले एनजीओ पर वामपंथियों का कब्ज़ा है और जिनका एकमात्र मकसद भारतीय समाज को छिन्न-भिन्न करना है !!

चमत्कार देखिये, लालू, मुलायम, नितीश, केजरीवाल और कांग्रेस सब एक दूसरे के धुर विरोधी थे पर आज सब एक साथ चुनाव लडऩे को तैयार बैठे हैं !!

कैसा खेल है कि आज भी सामान्य शांतिप्रिय हिन्दू को ये भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर ये मचान, ये बकरी, ये बन्दूक, ये शिकारी सब किसके इंतज़ार में हैं....!

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

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