विश्वास जगाती मोदी की नीतियां

  • 2016-05-31 05:30:53.0
  • राकेश कुमार आर्य

मोदी की नीतियां

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के पश्चात अपने दो वर्ष के कार्यकाल में ऐसा बहुत कुछ किया है जो आशाओं को विश्वास में परिवत्र्तित करता जान पड़ रहा है। ऐसा नही है कि श्री मोदी से पूर्व के अन्य प्रधानमंत्रियों के शासनकाल में जनोन्मुखी विकास योजनाएं लागू नही की गयीं। निश्चित रूप से की गयीं, परंतु उन जनोन्मुखी योजनाओं और श्री मोदी की सरकार की जनोन्मुखी योजनाओं में मौलिक अंतर है। जहां अन्य प्रधानमंत्रियों की अधिकांश योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढक़र काल कलवित हो गयीं या केवल सरकारी नारेबाजी और भाषणों में ही सुनाई पड़ीं, वहीं प्रधानमंत्री श्री मोदी की सरकार की सभी योजनाएं हमें वास्तविकता के धरातल पर कार्य करती दिखाई पड़ रही हैं। जिससे बदलते हुए भारत का अनुभव किया जा सकता है।

हम सर्वप्रथम ‘मेक इन इंडिया’ की बात करते हैं। इसे प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सितंबर 2014 में प्रारंभ किया। इस योजना से लाभ यह हुआ है कि देश में 2015-16 में 51 अरब डॉलर की एफ.डी.आई. की स्थिति बड़ी दयनीय थी। 2014-15 में 44.29 अरब डॉलर से बढक़र अगले ही वित्त वर्ष में एफ.डी.आई. का 15.1 प्रतिशत अधिक हो जाना निश्चय ही श्री मोदी की सरकार की एक सराहनीय उपलब्धि मानी जाएगी।

कांग्रेसी सरकारों के काल में गांधीजी को केवल वोट प्राप्ति के लिए प्रयोग किया जाता था। चुनावी प्रचार के समय साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल’ वाला गाना सुनने को मिलता था, परंतु उसके पश्चात गांधीजी फाइलों में बंद हो जाते थे। परंतु श्री मोदी ने गांधीजी की स्मृतियों को भी स्थायित्व देने का प्रयास किया। उन्होंने
स्वच्छ भारत अभियान’ की घोषणा गांधी जयंती के अवसर पर अक्टूबर 2014 में की। इस योजना के अंतर्गत 2019 तक देश में 11 करोड़ शौचालय बनाये जाने हैं। अभी तक यथार्थ के धरातल पर ठोस कार्य किया जाकर बड़ी उपलब्धि प्राप्त की गयी है। आंकड़े बताते हैं कि 7 करोड़ नये शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है।

मोदी सरकार ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना का शुभारंभ जनवरी 2015 में किया। बड़ी-बड़ी सेमिनारों पर या सरकारी नीतियों को लागू करने के नाम पर इससे पूर्व इस दिशा में जो कुछ भी किया जाता रहा था, उसके कोई ठोस परिणाम नही आये थे। अब लोगों की सोच में परिवर्तन आ रहा है। देश के दर्जनों जिलों में अप्रत्याशित रूप से लैगिक अनुपात बढऩे के संकेत मिलने लगे हैं। ‘गिव इट अप’ (मार्च 2015) की योजना को सिरे चढ़ाते हुए प्रधानमंत्री की सोच को लोगों ने मन से स्वीकार किया और लोगों ने बड़ी संख्या में (एक करोड़ से अधिक) एलपीजी सब्सिडी छोडक़र प्रधानमंत्री की योजनाओं के प्रति अपनी निष्ठा और प्रतिबद्घता का प्रदर्शन किया। जिससे 5178 करोड़ की बचत देश को हुई है।

अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मुद्रा योजना’ की घोषणा की थी, जिसके अंतर्गत 1.25 लाख करोड़ रूपया पिछले वर्ष में वितरित किया गया। इसके पश्चात आते हैं ‘गंगा स्वच्छता अभियान’ पर। इस अभियान को लेकर भी पिछली सरकारों के कार्यकाल में देश का बहुत बड़ा धन व्यय किया गया। पर परिणाम निराशाजनक ही रहे। नौकरशाही बड़ी धनराशि को गंगा स्वच्छता के लिए प्राप्त तो करती थी, पर वह उस धनराशि को बीच में ही चट कर जाती थी।
पापियों के पाप धोते-धोते’ तो गंगा मैली हो ही रही थी। अब भ्रष्टाचारियों के भ्रष्टाचार ने उसे और गंदा करना आरंभ कर दिया था। मई 2015 तक शोधन क्षमता बढ़ाने को 7350.38 करोड़ की 93 योजनाओं को हरी झण्डी दी गयी। जिसके सकारात्मक परिणाम आये और लोगों के लिए तथा हमारी खेती के लिए स्वच्छ जल मिलना आरंभ हो गया। यद्यपि देश की अन्य दम तोड़ती नदियों की स्थिति भी बड़ी दयनीय है और आशा की जानी चाहिए कि प्रधानमंत्री श्री मोदी उस ओर भी ध्यान देंगे।

जून 2015 में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ का शुभारंभ किया। जिसमें लगभग तीन करोड़ नामांकन अभी तक किये जा चुके हैं। 13 मई 2016 तक 26.567 क्लेम इस योजना के अंतर्गत किये गये हैं।
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा’ योजना के अंतर्गत लगभग साढ़े नौ करोड़ लोग नामांकित किये गये हैं। जिसमें पांच हजार से अधिक लोग क्लेम ले चुके हैं। मई 2015 में ही प्रधानमंत्री की ओर से ‘अटल पेंशन योजना’ की घोषणा की गयी थी। जिसका लाभ लेने वालों के पंजीकरण मई 2016 तक अर्थात एक वर्ष में ही लगभग 27 लाख हो चुके हैं।

जून 2015 में स्मार्ट सिटीज मिशन’ की घोषणा की गयी। 25 मई 2016 तक सौ स्मार्ट सिटीज में से 33 के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इसका एक महत्वपूर्ण लाभ यह होगा कि देश के विभिन्न प्रदेशों के विभिन्न शहरों में आधुनिकता का समावेशी परिवेश बनेगा। जिससे लोगों की किन्हीं विशेष शहरों की ओर भागने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

जुलाई 2015 में कौशल विकास और कौशल भारत’ पर कार्य किया जाना आरंभ हुआ। इसके अंतर्गत 2022 तक 40.2 करोड़ लोगों को अपनी आजीविका स्वयं कमाने के लिए कुशल बना देना है। सरकारी नीतियों से रोजगार हर व्यक्ति को (सरकारी नौकरी के रूप में) दिया जाना संभव नही है। जबकि अब तक की सरकारें लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर उन्हें नौकरियों का झांसा देती आ रही थीं। पर रोजगार अर्थात सरकारी नौकरी थी कि मिल ही नही रही थी। फलस्वरूप देश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही थी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अद्भुत क्षमताएं हैं, उनका दृष्टिकोण व्यापक है, वह जानते हैं कि हर व्यक्ति को सरकारी नौकरी नही दी जा सकती। इसलिए श्री मोदी ने लोगों को और विशेषत: युवाओं को घर बैठे कुशल बनाने का निर्णय लिया। चालीस करोड़ से अधिक लोगों को 2022 तक कुशल बना देने का लक्ष्य सचमुच श्री मोदी के प्रति लोगों को यह विश्वास दिलाता है कि प्रधानमंत्री देश की नब्ज पर हाथ रखकर बात कर रहे हैं। वैसे भारत की
वर्ण व्यवस्था’ प्राचीनकाल से ही लोगों का कौशल विकास परंपरागत रूप से किये जाते रहने की एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी। जिसे कांग्रेसी सरकारों के काल में समाप्त करने का कुचक्र चलाया गया। अन्यथा इस देश का जनसाधारण सरकारी नौकरियों के फेर में कभी नही पडऩे का आदी रहा है। उसे अपना रोजगार अपने घर में बड़ों के सान्निध्य में रहकर स्वयं ही मिल जाता था। यही कारण है कि इस देश का जनसाधारण संतुष्ट रहने वाला रहा है और उसने रोजगार प्राप्त करने के लिए कभी देश में बड़े आंदोलन नही किये। कौशल विकास योजना के अंतर्गत अक्टूबर 2015 तक ही 29 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया। यद्यपि इस की गति अभी धीमी है परंतु लोगों में उत्साह है और उत्साह ही किसी योजना की सफलता की गारंटी हुआ करता है। जैसे कि हमने
प्रधानमंत्री जनधन योजना’ (अगस्त 2014) के प्रति लोगों के उत्साह का आंकलन किया था, जिसके अंतर्गत मई 2016 तक लगभग 22 करोड़ खाते खुले और 37.616 करोड़ रूपया देश के बैंकों में जमा हो गया।

डिजिटल इंडिया’ और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ को मोदी सरकार ने जुलाई 2015 में आरंभ किया। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत 50,400 ग्राम पंचायतों को 14075 किमी. लंबी ऑप्टिकल फाइवर केबल से जोड़ा गया है। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना का शुभारंभ 76 हजार करोड़ से किया गया है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी की स्टार्ट अप इंडिया’ जनवरी 2016 योजना के अंतर्गत 30 कंपनियों के वित्तीय अनुरोध सरकार ने स्वीकार किये हैं। जिससे आशा की जाती है कि उक्त योजना के भी सकारात्मक परिणाम हमें मिलेंगे। अप्रैल 2016 में
स्टैंड अप इंडिया’ योजना का प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत देश में सवा लाख बैंक शाखाओं को निर्देशित किया गया है कि कम से कम एक अनुसूचित जाति उद्यमी या अनुसूचित जनजाति उद्यमी को और न्यूनतम एक महिला उद्यमी को दस लाख से एक करोड़ बैंक ऋण दिये जाएं। इस सरकारी सहायता से निश्चय ही लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा और सभी लोग एक विश्वासपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित होंगे।

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