आभार भी,धन्यवाद भी

  • 2015-06-18 02:55:10.0
  • देवेंद्र सिंह आर्य

logoअब से पांच वर्ष पूर्व ‘उगता भारत’ ने साप्ताहिक के रूप में अपना पर्दापण किया था। आज यह पत्र दैनिक के रूप में अपनी मंजिल की ओर पहला कदम रख रहा है। पांच वर्ष पाठकों का मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन जिस प्रकार मिला, उसी का प्रतिफल है कि आज हम इस पत्र को दैनिक कर रहे हैं। इस अवसर पर हम अपने सभी सुबुद्घ पाठकों, प्रियजनों, मित्रों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार और धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। ईश्वरीय प्रेरणा और पूज्य माता-पिता के प्रेरणामयी आशीर्वाद को ध्यान में रखते हुए यह हमारा दायित्व है कि हम इस पवित्र बेला में आप सबका हार्दिक अभिनंदन करें, क्योंकि आपके सहयोग और मार्गदर्शन से ही यह समाचार पत्र निरंतर सफलता की ओर आगे बढ़ रहा है।

यह एक सत्य है कि जब कोई व्यक्ति उत्थान की ओर बढ़ता है तो उससे  कोई एक व्यक्ति पहली बार आकर मिलता है, फिर एक से दो, दो से चार....होते चले जाते हैं, और हम देखते हैं कि मंजिल स्वयं आगे बढक़र  उन बढ़ते हुए कदमों का चुंबन करती है, जो निरंतर उसकी ओर बढ़ते रहने का हौसला रखते हैं। इसी प्रकार यह भी सत्य है कि जब कोई व्यक्ति पतन की ओर जाता है तो उसके साथियों में से सबसे पहले हटने वाला भी कोई एक ही होता है, उस एक के हटने से दो और दो से चार...हटते जाते हैं और हम देखते हैं कि उस व्यक्ति से मंजिल दूर हो जाती है, चारों ओर भीड़ होते हुए भी व्यक्ति अकेला होता है। भीड़ भरी दुनिया में उसे कोई अपना नही दीखता। इसलिए मित्र, शुभचिंतक, साथी और प्रियजन बड़े प्रेम से सहेजकर रखने की चीज होते हैं। उनके बिना हम दुनिया में अकेले होते हैं।

अत: आज की खुशी को अपने सभी मित्रों, शुभचिंतकों, साथियों और प्रियजनों के साथ शेयर करना आवश्यक समझता हूं। प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि आप सबका प्रेमपूर्ण सान्निध्य और मार्गदर्शन यथावत मिलता रहे और हम सब मिलकर आगे बढ़ते रहें। दैनिक ‘उगता भारत’ के प्रथम अंक के प्रकाशन पर मेरी यही शुभकामना हैं।