संसदीय धक्काशाही से कानून नहीं!

  • 2015-05-15 03:28:08.0
  • डॉ0 वेद प्रताप वैदिक

parliament.सरकार को दो महत्वपूर्ण विधेयक संसद की प्रवर समितियों के पास भेजने पड़े। एक तो भूमि–अधिग्रहण विधेयक और दूसरा माल और सेवा कर विधेयक! इन विधेयकों को प्रधानमन्त्री और उनके संबंधित मंत्रियों ने युगांतकारी कहा था। इन दोनों विधेयकों को यह सरकार धड़ल्ले से पास करना चाहती थी। देश के त्वरित औद्योगिकीकरण और कर-प्रणाली में सुधार के लिए इन विधेयकों को सरकार वरदान मानती है लेकिन विरोधी दलों ने इनका कड़ा विरोध किया है।



उन्होंने ही नहीं,सरकार की पक्षधर पार्टियों ने भी अपना विरोध दर्ज करवाया । इसलिए सरकार ने इन्हें अब मजबूर होकर संसदीय समितियों के हवाले कर दिया है। संसद की इन विशेष समितियों में सतारूढ़ और विपक्षी दलों, दोनों के सदस्य होते हैं। ये समितियाँ इन विधेयकों के सभी पहलुओं पर खुलकर विचार करेंगीं। उसके बाद ही उन्हें मतदान के लिए संसद में पेश किया जाएगा ।



इस घटना को विपक्ष की जीत और सरकार की हार भी माना जा सकता है लेकिन मैं इसे सच्चे संसदीय लोकतंत्र का प्रमाण मानता हूँ। पहली बात तो यह है कि मोदी सरकार को अब समझ में आ गया है कि स्पष्ट बहुमत का मतलब सतत दादागीरी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं कि आप जो भी ठीक समझें, उसे बहुमत के बल पर पास करवा लें जाएँ। अल्पमत चाहे कितना भी छोटा हो, कभी-कभी वही सही निकलता है। दूसरी बात इस सरकार को यह समझ में आ गई कि विपक्ष एकदम दृष्टिहीन, निषेधात्मक और विध्वंसात्मक नहीं होता। वह भी विचारशील, देशभक्त और जिम्मेदार होता है। इसीलिए पिछले हफ्ते उसने भारत-बांग्ला थल–सीमा समझौता का समर्थन कर दिया।



इस घटना ने सरकार का उत्साह बढ़ाया है। अब यदि उसने इन विधेयकों को प्रवर समितियों के पास भेजा है तो वहाँ भी उसके सदस्यों को तर्क और विवेक को प्राथमिकता देनी चाहिए। अपनी बात पर अड़े रहने की बजाय जनहित और जन-भावना को अधिक महत्व देना चाहिए। भूमि-अधिग्रहण विधेयक पर कांग्रेस ने जो तीन प्रमुख आपातियाँ की हैं, उनका समाधान नहीं निकला तो इस सरकार को लेने के देने पड़ सकते हैं। प्रवर समितियों की ओट में वह अपनी नाक बचा सकती है। संसदीय लोकतंत्र को आप चीन और रूस की तरह नहीं चला सकते। संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक भी यदि किसी कानून को धक्काशाही में पास कर देगी तो राजनीति संसद से उतरकर सड़क पर आ जाएगी। यह सरकार यदि संसद में धक्काशाही चलाएगी तो भारत की सड़कों पर धक्काशाही का साम्राज्य फैलने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।