आज का चिंतन

  • 2014-07-30 08:33:56.0
  • उगता भारत ब्यूरो

aaj  ka chintan 2दर्शन दो, दर्शन पाओ

भगवान या तो निराकार माना जाता है या साकार । निराकार है तब वह अदृश्य है

और साकार है तो मूर्तिमान है। इसलिए भगवान को पाने वाले बरसों तपस्या

करते रहते हैं, गिरि-कंदराओं, मन्दिरों, नदियों और पावन जलाशयों के

किनारों से लेकर संसार से बेहद दूर एकान्त स्थलों में बरसों कठोर तप के

बाद भगवान प्रकट होते हैं अथवा उनकी विभूति। ,

लेकिन आजकल कैमरा भगवान का बोलबाला सभी स्थानों पर है। यह तत्काल फल देते

हैं। जिस अनुपात में प्रचार माध्यमों और अवसरों की व्यापकता बढ़ी है उस

अनुपात में कैमरा भगवान भी सर्वत्र छाये हुए हैं। आजकल इंसान जो जो कर्म

करता है उसका एकमात्र ध्येय यही होकर रह गया है कि कर्म का फल चाहे कैसा

भी हो, कर्म भी पूरा हो या न हो, भले ही औपचारिकता निर्वाह ही क्यों न

हो, मगर कैमरों का दर्शन जरूर हो जाना चाहिए ताकि तस्वीरों का सुकून

हमारे तन-मन को सुकून दे सके और हमारी सदा अतृप्त रहने वाली आत्मा कुछ

क्षण के लिए ही सही तृप्ति का अहसास जरूर कर सके।

और कुछ हो न हो, कैमरा भगवान का पावन सान्निध्य न हो तो सब कुछ बेकार ही

है। बड़े से बड़े लोग हों, मध्यम हों या फिर छोटे से छोटे, सभी प्रकार के

लोगों के लिए कैमरा दर्शन का पुण्य प्राप्त करना अनिवार्य है। पहले

प्रत्येक कार्य से पहले मंगलमूर्ति गणेशजी का स्मरण किया जाता था, अब

गणेशजी का स्थान कैमरों ने ले लिया है। कई कार्यक्रमों और समारोहों,

आयोजनों की तो शुरूआत ही तब हो पाती है जब कैमरा भगवान की उपस्थिति दिख

जाए। फिर आजकल ये भगवान कई-कई रूपों में हमारे सामने टपके हुए हैं।  फोटो

और वीडियो कैमरे भी हैं और मोबाइल कैमरे भी।

सभी प्रकार के कैमरों वालों की भीड़ इतनी अधिक होती जा रही है कि यह पता

करना मुश्किल है कि असली कौन है, और नकली कौन। कौन प्रोफेशनल है, और कौन

सा शौकिया। कौन अनुबंधित है और कौन छूट्टा। खैर, किसी भी प्रकार के

कैमरों का जमघट हो, इतना जरूर है कि इन कैमरों ने भगवान को भी पीछे छोड़

दिया है। सर्वव्यापी, सहज उपलब्ध और सर्वप्रिय कैमरों का प्रभाव ही इतना

है कि खूब सारे लोग तो सब कुछ छोड़कर कैमरों के ही दीवाने हैं। इन लोगों

को जितना आनंद अपने फोटो खिंचवाने और छपवाने में आता है उतना अपने

माँ-बाप और घर वालों के साथ, किसी यज्ञ-अनुष्ठान और भक्तिभाव के समय अथवा

किसी मांगलिक प्रसंगों में भी नहीं आता होगा।

एक अदद तस्वीर का शौक पालने वालों की तादाद इतनी बढ़ती जा रही है कि आने

वाली जनगणना के फॉर्म में अलग से एक कॉलम हो सकता है इस शौक को पालने

वालों के नाम पर। इन दिनों यह शौक परवान पर चढ़ा हुआ है। आजकल जो फोटो छप

रहे हैं, सोशल साईट्स पर आ रहे हैं अथवा जो वीडियो देखने में आ रहे हैं

उन सभी में घटना प्रधानता और वास्तविक क्रियाओं का कोई खास दृश्यांकन

नहीं होता बल्कि सभी फोटो ऎसे ही लगते हैं कि जैसे फोटो खिंचवाना ही

कार्यक्रम का मुख्य ध्येय हो और आयोजन तो इस मकसद को पाने की सीढ़ी भर है।

फोटो किसी मन्दिर का हो, तो भगवान को पीठ दिखा कर खड़े या हाथ जोड़े परम

भक्तों के फोटो दिखाई देने लगे हैं। पौधारोपण हो रहा हो तब पौधा भले दिखे

न दिखे, पौधारोपण करने वालों के चेहरे इस मुस्कान के साथ दिखाई देने लगते

हैं जैसे कि किसी राजकुमारी ने स्वयंवर के लिए पौधे लगाने की शर्त रख दी

हो और सारे के सारे लोग अलग-अलग मुद्राओं में तस्वीर लिवाने को व्याकुल

हों।

कोई सा आयोजन हो, सब जगह के फोटो देख लिए जाएं, सर्वत्र आयोजन, विषय

वस्तु और घटनाएं भले गौण हो जाएं, चेहरों का समंदर जरूर उमड़ता दिखाई देना

चाहिए। आजकल पौधे लगाने का मौसम है। ऎसे में शायद ही कोई फोटो ऎसा दिख

रहा हो जिसमें पौधे का ससम्मान रोपण दिखाई देता हो, अन्यथा पौधा और

क्रिया तो गौण हो जाते हैं और रोपणकत्र्ताओं के चेहरे पूरे दृश्य पर हावी

रहते हैंं। स्थितियां सभी जगह और सभी आयोजनों में एक सी हैं, सर्वत्र हौड़

मची है, कैमरा दर्शन की।

एक बार कैमरे की ओर तबीयत से झाँकने की जो आदत पाल लेता है वह जमाने का

वो अविस्मरणीय सुख प्राप्त कर लिया करता है जो सामान्यजनों के बस में कभी

नहीं रहा। हर क्षेत्र में कुछ नामी लोग ऎसे गिनाये जा सकते हैं जो कैमरा

दर्शन का पुण्य पाने कहीं भी किसी भी वक्त टपक सकते हैं। इन्हें बुलाने

की भी जरूरत नही पड़ती। कहीं से भनक मिल जाए तो वे सीधे कैमरे की सीध में

पहुँच जाते हैंं। ये कैमरादर्शी भक्त इतने सधे हुए माहिर होते हैं कि

कैमरा दर्शन का सुकून पाने के लिए मुख्य आयोजकों तक को धकिया कर भी सामने

आ जाते हैं।

फिर आजकल फेसबुकिया फोटोग्राफरों की नई धमाल शुरू हो गई है। हम जैसे

असंख्य दीवाने जो भी कुछ करते हैं उसके लिए फेसबुक को अपनी डेली डायरी या

डंपिंग यार्ड समझ कर उसमें डाल दिया करते है। ताकि जमाने भर को हमारा

अस्तित्व बरकरार होने और कुछ करते रहने का पता बना रह सके।

खूब सारे लोगों के लिए ये तस्वीरें ही हैं जो नींद लाने और सेहत ठीक रखने

का भी काम करती हैं और चैन के दिन उगाने का भी। कई तो ऎसे हैं जिन्हें

रोज अपनी तस्वीर चाहिए और ऎसे में किसी दिन न आ पाए तो दिन भर मूड़ ऑफ

रहने लगता है और खुद महा मूढ़ की तरह बैठे रहते हैं।

हर मामले में आजकल कैमरा भगवान की प्राथमिक और अनिवार्य मौजूदगी गणेशजी

की तरह प्रथम वंदनीय हो चुकी है। कैमरा भगवान के आगमन और दर्शन से ही

सारे काम शुरू होते हैं और आयोजन सफलता पाते हैं अन्यथा कुछ होना माना ही

नहीं जाता।

धन्य हैं वे लोग जो कैमरे के सामने आकर जाने कितनी ऊँचाइयां पा लिया करते

हैं। उन लोगों ने क्या देखा और क्या पाया जो कैमरों के दर्शन से वंचित

रहते आये हैं, इनके लिए तो जीवन कोरा ही माना जा सकता है। ये कैमरे न

हों, तो आयोजनों का आनंद कितना फीका पड़ जाए, रस और रंग गायब हो जाएं,

मस्ती और सुकून पलायन कर जाएं।

इसलिए जहाँ कहीं जाएं, वहाँ और कुछ करें न करें, कैमरे की हद में आकर

दर्शन जरूर कर लें। जो करे सो निहाल, यही है कैमरा भगवान का कमाल। फिर

कैमरा भगवान की पालकी ढोने वाले किसम-किसम के कहारों के प्रति भी

कृतज्ञता ज्ञापित करना और उन्हें धन्यवाद देना न भूलें ताकि आप पॉवर में

रहें, न रहें, आपकी यह यात्रा, शौक या सनक मरते दम तक जारी रहे।

उगता भारत ब्यूरो ( 2469 )

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