आज का चिंतन-06/04/2014

  • 2014-04-06 03:28:10.0
  • डॉ. दीपक आचार्य

खुद को बनाएं आईना


लोगों का सच बोल उठेगा


- डॉ. दीपक आचार्य


9413306077


dr.deepakaacharya@gmail.com


मलीनता और शुद्धता ठीक वैसे ही हैं जैसे कि दिन और रात। इनमें से एक का ही वजूद रहता है। हो सकता है कुछ समय का संक्रमण काल ऎसा उपस्थित हो जाए कि दोनों का ही धुंधलका नज़र आए लेकिन आमतौर पर ऎसा नहीं होता।

बात अपने मन के भीतर झांकने की हो या दूसरों के मन की थाह पाने की।  जो व्यक्ति जितना पाक-साफ होता है वह दूसरों की खरी-खरी थाह पाने की सामथ्र्य रखता है। कोई आदमी कितना ही बड़ा और महान क्यों न हो जाए, उसकी भी थाह एक वह सामान्य आदमी अच्छी तरह पा सकता है जिसका चित्त शुद्ध हो।

योग विज्ञान से लेकर टेलीपैथी और सूक्ष्म तत्वों की थाह पाने का कोई सा उपक्रम या अनुष्ठान, इन सभी का मूलाधार चित्त की शुद्धता है। ऎसे में संसार में दो तरह के लोग होते हैं। एक वे लोग हैं जिनका चित्त एकदम साफसुथरा और स्वच्छ पवित्र है। लेकिन ऎसे लोगों की संख्या नगण्य ही होती है।
9a01faaeb2fcd3d3302354faf76313d2


दूसरी किस्म में वे लोग आते हैं जिनका चित्त किसी न किसी प्रकार प्रदूषित है। जो जितना अधिक अशुद्ध और मलीन विचारों का होता है वह अपने आप में कितना ही बड़ा पूज्य, अहंकारी और वैभवशाली क्यों न हो, उसकी आत्मा पर मलीनता का काला परदा इस कदर पड़ा होता है कि वे बाहरी तत्वों को किसी भी प्रकार स्कैन नहीं कर पाते।

ऎसे लोगों की आत्मा मलीनता भरी खाल ओढ़े होती है और चित्त सर्वथा अशुद्ध रहता है कि इनकी कोई सी खिड़की बाहर की ओर नहीं खुलती बल्कि भीतर की ओर ही हलचलें होती रहती हैं। जबकि जो व्यक्ति जितना अधिक शुद्ध होता है वह अपने आप में उन क्षमताओं को पा लेता है जिससे कि जो उनके सामने आता है उसकी भीतरी-बाहरी वृत्तियां अपने आप पता चल जाती हैं।

तंत्र और मंत्र शास्त्र से लेकर अघोर विद्या तक में इस रहस्य को अच्छी तरह प्रकटाया गया है। चित्त की शुद्धि जिन लोगों में होती है उनका मन और मस्तिष्क आईने की तरह हो जाता है। ऎसे में इन्हें अपने सामने आए व्यक्ति के चाल, चलन और चरित्र के बारे में ज्यादा कुछ बताने की जरूरत नहीं पड़ती। जो सामने आता है वह अपने आप स्कैन हो जाता है।

कुछ लोग ऎसे भी होते हैं जिनका चित्त सर्वोच्च स्तर का शुद्ध होता है, ऎसे लोग सामने वाले के भूत, भविष्य और वर्तमान तक की थाह पाने का सामथ्र्य रखते हैं। सबसे अव्वल बात यह है कि हम सिर्फ अपने और समाज के बारे में चिंतन करें, बुरे लोगों का चिंतन न करें।

अपने आपको शुद्धता की डगर पर बनाए रखें, इससे हमारे जीवन के लिए जो कुछ अभीप्सित है उसके दिव्य संकेत हमें अपने आप मिलने आरंभ हो जाते हैं और इसके अनुरूप हम अपने जीवन को बेहतर बनाने के अवसरों को पाते रहते हैं। ऎसा हो जाने पर हमें किसी के बारे में कुछ कहने-सुनने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि अपने आप सब कुछ पता चल जाता है और हम पग-पग पर ऎसे लोगों से बचकर या संभलकर चलने का हुनर पा जाते हैं।

काफी सारे लोगों को इस बात की तकलीफ हुआ करती है उनके बारे में सारा कुछ सही, स्पष्ट और सपाट कहा जा रहा है और ऎसा धाराप्रवाह कहा जा रहा है जैसे कि हमारे जीवन को करीब से देख कर व अनुभव करके ही व्यक्त किया गया हो।

इन लोगों को यह भ्रम निकाल देना चाहिए कि उनकी नापाक हरकतों और गोरखधंधों को छिपाया जाना आसान है।  दुनिया में आज भी काफी लोग ऎसे हैं जो आईने की तरह स्वच्छ हैं और जैसे ही किसी और के बारे में चिंतन होता है अथवा कोई और इनके सामने होता है, तब सारी कलई अपने आप खुल जाती है क्योंकि आईना कभी झूठ नहीं बोलता।

आईने के सामने आने पर हर कोई नंगा हो जाता है और वह भी ऎसा कि खुद अपने आप की असलियत अपनी आँखों से देखने लगता है। अपने आप को आईने की तरह स्वच्छ बनाएं, दुनिया और लोगों का सच अपने आप सामने आता चला जाएगा।

----000---

डॉ. दीपक आचार्य ( 386 )

उगता भारत Contributors help bring you the latest news around you.