कड़वे प्रवचन

  • 2013-05-22 04:03:19.0
  • उगता भारत ब्यूरो

मुनिश्री तरूणसागर

तुम परिवार के किसी सदस्य को नही बदल सकते। तुम अपने को बदल सकते हो, यह तुम्हारा जन्म सिद्घ अधिकार है। पूरी दुनिया को चमड़े से ढकना तुम्हारे बस की बात नही है। अपने पैरों में जूते पहन लो और निकल पड़ो फिर पूरी दुनिया तुम्हारे लिए चमड़े से ढकी जैसी है। मंदिर और सत्संग से घर आओ तो तुम्हारी पत्नी को लगना चाहिए कि बदले बदले मेरे सरकार नजर आते हैं।
- कुछ लोगों के चेहरे से चिंता ऐसी टपकती है जैसे उमस भरे मौसम में पसीना और कुछ लोगों के चेहरे पर हंसी यों दिखती है जैसे हीरे की अंगूळी में जड़ा कोई नगीना। मनुष्य भविष्य के लिए रूपया पैसा, जमीन जायदाद, भोजन पानी की चिंता करता है
स्वामी रामसुख दास हुए। उन्होंने कहा अरे बाबा चिंता ही करनी है तो इस बात की चिंता कर कि मरने के बाद मेरा क्या होगा?
-कुछ बाप बेटे की लड़ाई में मां हमेशा बेटे का पक्ष लेती है। यद्यपि उसे पुत्र की बनिस्वत पति से ज्यादा लगाव होता है। ठीक इसी तरह बहू बेटी की लड़ाई में सासू को हमेशा बहू का पक्ष लेना चाहिए। जो सास बहू का पक्ष लेती है, फिर उसे कभी विपक्ष में नही बैठना पड़ता। मेरा मानना है कि जो सास बहू का पक्ष लेती है, उसे भगवान के समक्ष रक्ष-रक्ष जपने की जरूरत नही पड़ती और कक्ष में बैठकर अक्ष से आंसू बहाने नही पड़ते।
-एक आदमी ने ईश्वर से पूछा : आपके प्रेम और मानवीय प्रेम में क्या अंतर है? ईश्वर ने कहा : आसमान में उड़ता पंछी मेरा प्रेम है और पिंजरे में कैद पंछी मानवीय प्रेम है। प्रेम में अद्भुत शक्ति है। किसी को जीतना है तो आप उसे तलवार से नही, प्यार से ही जीत सकते हैं। तलवार से उसे आप हरा सकते हैं, जीत नही सकते हैं।
-गन्ना टेड़ा हो सकता है लेकिन गन्ने का रस टेड़ा नही हो सकता। नदी टेड़ी हो सकती है, लेकिन नदी का पानी टेड़ा नही हो सकता। दुनिया टेड़ी हो सकती है लेकिन दुनिया को बनाने वाला परमात्मा टेड़ा नही हो सकता। सांस टेड़ा हो सकता है लेकिन सांप का बिल टेड़ा नही हो सकता संत का दिल टेड़ा नही हो सकता। सरल बनो। सहज बनो।
-जब तक आप स्वस्थ हैं। तब तक हमारी दुनिया आपके साथ है, लेकिन जिस दिन आपका शरीर साथ नही देगा उस दिन आपका अपना ही सपना सपना हो जाएगा। तरूण सागर का कहा मानो तो धन कमाने में लापरवाही कर लेना। रिश्ता बनाने में लापरवाही कर लेना। खाने पीने में लापरवाही कर लेना। यहां तक कि गाड़ी चलाने में भी लापरवाही कर लेना, चल जाएगा। लेकिन अपनी सेहत के बारे में कभी लापरवाही मत करना। सेहत है तो कुछ भी न होकर भी सब कुछ है और सेहत नही तो सब कुछ होकर भी कुछ भी नही।
- तुम दुखी हो सिर्फ इसलिए कि तुम्हारे पास बड़िया जूते नही हैं, पर देखो तुम्हारी गली में एक ऐसा व्यक्ति भी है जिसके पास टांगे ही नही हैं। अपनी नजर हमेशा अपने से छोटों पर रखो। तुम पाओगे कि तुम्हारे जैसा सुखी इंसान दुनिया में दूसरा नही है।
जो तुम्हारे पास है उसका सुख भोगो। जो नही है, उसके पीछे पागल मत बनो। तुम्हारी जेब में 90 रूपये हैं। उसका लुत्फ उठाओ 100 में जो 10 कम हैं, उसके पीछे मत भागो।