दूसरे वर्ष में ‘उगता भारत’

  • 2016-06-17 05:54:48.0
  • देवेंद्र सिंह आर्य


दैनिक उगता भारत पत्र के एक वर्ष पूर्ण होने पर विशेष

सुबुद्घ पाठकवृन्द!

आज से सही एक वर्ष पूर्व ‘उगता भारत’ दैनिक समाचार पत्र का प्रथम अंक आपके कर कमलों में हमारे द्वारा सौंपा गया था। एक वर्ष के इस यात्राकाल में इस नवजात समाचार पत्र को कितनी ही विषमताओं से जूझना पड़ा परंतु आपका प्रेमपूर्ण सान्निध्य और उत्साहवर्धन उन सभी विषमताओं से इस पत्र को पार पाने में सहायक हुआ। जिसके लिए हम आपके हृदय से आभारी हैं।

यह सही है कि जब किसी यात्रा का प्रारंभ किया जाता है तो उसके लिए पहले एक कदम ही आगे रखा जाता है। उसके पश्चात हम देखते हैं कि कदम दर कदम हम आगे बढ़ते जाते हैं और मंजिल हमारे निकट आती जाती है। मंजिलों को प्राप्त करने के लिए उत्साह और साहस की आवश्यकता होती है, जिसे प्रभु की कृपा से प्राप्त किया जा सकता है। प्रभु कृपा हम सभी के लिए वह अस्त्र है जो हमें जीवन जगत के इस घने जंगल में कभी अकेलेपन की अनुभूति नही होने देती, और जिसके बल पर हम सभी अपने-अपने क्षेत्रों में बड़े-बड़े कार्य करते चले जाते हैं। जो लोग प्रभु कृपा को भली प्रकार समझते हैं या उसका हृदय से अनुभव करते हैं वही इस बात को समझ सकते हैं कि प्रभु की कृपा में कितनी बड़ी शक्ति होती है।

पाठकों का प्रेम और प्रभु की कृपा के पश्चात आता है बड़ों का आशीर्वाद। बड़ों का आशीर्वाद भी जहां जुड़ा होता है वहां मंजिल की ओर बढऩा और यात्रा मार्ग तय करते जाना सरल हो जाता है। प्रभु की कृपा जहां एक अदृश्य जगत की अनोखी और अनुपम छाया है वहीं बड़ों का आशीर्वाद इस दृश्यमान जगत  की प्रभु कृपा की ही दूसरी अनुकृति है। जो लोग इस देन को हृदय से अनुभव करते हैं उन्हें यह भी अनुभव होता है बड़ों का आशीर्वाद हमारी आपदाओं के पर्वतों को हमारे पैरों के नीचे लाने में सबसे अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करता है।

हम आपके इस समाचार पत्र के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रभु कृपा के समक्ष तो नतमस्तक हैं ही साथ ही जिन महानुभावों ने इस पत्र को किसी भी प्रकार से अपना सहयोग और आशीर्वाद प्रदान किया है उनके आशीर्वाद के समक्ष भी नतमस्तक हैं। यदि हमारे ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संरक्षकों का शुभाशीर्वाद हमारे साथ न होता तो भी यह पत्र या तो अपने मंतव्य से भटक सकता था या अपने गंतव्य से मुंह फेर सकता था। पर हम सही दिशा में आगे बढ़े तो इसका अभिप्राय यही है कि प्रभु कृपा और बड़ों का आशीर्वाद दोनों हमारे लिए ‘रामबाण औषधि’ के रूप में हमारे साथ उपस्थित रहे।

समाचार पत्र एक वर्ष के इस काल में ‘उगता भारत’ टीम का वह प्रत्येक सदस्य भी अभिनंदन और साधुवाद का पात्र है जिसने कहीं पर भी और किसी भी प्रकार से अपने पत्र के प्रति अपना सहयोग प्रदान करने का निश्चय लिया और उसे तन-मन-धन से पूर्ण करने का प्रयास भी किया।

इस सबके उपरांत भी हमारी संपूर्ण ‘उगता भारत’ टीम अपनी ‘थीम और ड्रीम’ के प्रति आज भी समर्पित है। समस्याएं आज भी खड़ी हैं और अत्यंत भयावह ढंग से हमारा पीछा कर रही हैं परंतु इसके उपरंात भी आशा और विश्वास की डोर को पकडक़र समाचार पत्र निरंतर गतिमान है। हमें इस पत्र के दूसरे वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह जिस प्रकार हमें पिछले एक वर्ष में अपनी कृपादृष्टि की छत्रछाया में लेकर हमें आगे बढ़ाने में सहायक रहे हैं वैसे ही उनकी कृपादृष्टि की छत्रछाया हमें आगे भी प्राप्त होती रहेगी।

ऐसी ही प्रार्थना हमें अपने बड़ों के आशीर्वाद के संदर्भ में करनी चाहिए। साथ ही हमें अपनी ‘उगता भारत’ टीम के सफल समन्वय को इसी प्रकार बनाये रखने के लिए नया संकल्प लेने की आवश्यकता है। मैं अपने समाचार पत्र परिवार की ओर से अपने सभी सुबुद्घ पाठकों से अपेक्षा करता हूं कि उनका प्रेम और मार्गदर्शन हमें भविष्य में भी पूर्ववत मिलता रहेगा और ‘उगता भारत’ समृद्घ, सशक्त स्वच्छ और ‘विश्वगुरू’ भारत के  निर्माण में सहयोगी और सहभागी होगा।

देवेंद्र सिंह आर्य ( 262 )

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