कभी नहीं थे बैट खरीदने के पैसे अब चमक रहा है कोहली के इस चेले का सितारा

  • 2016-04-15 15:01:41.0
  • आशीष विकल

जब 12 साल की उम्र में बनाए थे 439 रन


सरफराज खान

Sarfaraz Khan तब चर्चा में आए थे जब 12 साल की उम्र में उन्होंने हैरिस शील्ड इंटर स्कूल टूर्नामेंट में 421 गेंदों पर 439 रन की जबरदस्त पारी खेली थी। ऐसा करके उन्होंने सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तोड़ा था। सचिन ने नाबाद 326 रन बनाए थे। सरफराज ने अपनी इस पारी में 56 चौके और 12 छक्के लगाए थे।

शतक बना कर आउट होने पर पिता से पड़ी थी डांट


सरफराज खान

वर्ष 2013 में भारत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अंडर 19 मैच खेल रहा था। लक्ष्य मिला था 270 रन का और भारतीय पारी 93 रन पर चार विकेट गंवा कर कुछ लडख़ड़ाई हुई थी कि मैदान पर एंट्री हुई एक छोटे कद के बल्लेबाज सरफराज खान की। सरफराज ने मैदान में चारों ओर शॉट्स लगाए और महज 66 गेंदों में 101 रन जड़ कर टीम को अकेले दम पर मैच में वापसी दिला दी। हालांकि इस शानदार पारी के बाद भी जब वे आउट होकर पवेलियन लौट रहे थे तो उनके पिता ने उन्हें डांटते हुए कहा था कि तुम्हें आउट नहीं होना था, तुम्हें मैच जिता कर लौटना चाहिए था। फिलहाल सरफराज आईपीएल में जलवा दिखा रहे हैं।


विराट कोहली ने थपथपाई पीठ


सरफराज खान

वर्ष 2015 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरु ने 50 लाख रुपए में सरफराज खान को खरीदा था। वे आईपीएल में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के तौर पर उतरे और दूसरे ही मैच में 21 गेंदों पर 45 रन की पारी खेल न केवल अपनी काबलियत का सबूत पेश किया, बल्कि विराट कोहली, क्रिस गेल और शेन वॉटसन की तारीफ भी बटोरी। कोहली खुद सरफराज की बल्लेबाजी को निखारने में लगे हैं। यहां तक कि गेल कह चुके हैं कि उन्हें सरफराज में अपनी जवानी नजर आती है और वे उसे अपने बेटे जैसा मानते हैं। यही नहीं इस सीजन में सरफराज ने भुवनेश्वर कुमार के ओवर में 1, 4, 4, 6, 4, 4 शॉट लगाकर उन्हें हैरान कर दिया।

गंदगी भरे मैदान में करते थे प्रैक्टिस


sarfaraz copy

सरफराज का आईपीएल तक का यह सफर आसान नहीं था। उनके पिता उन्हें लेकर सपनों के शहर मुंबई लाए। वह समय नौशाद और सरफराज के लिए बेहद मुश्किल था। रेलवे में फोर्थ ग्रेड के कमचारी नौशाद ने मुंबई में सरफराज को क्रिकेट ट्रेनिंग दिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। वे नौकरी के अलावा आमदनी के दूसरे जरिए ढूंढने के लिए कड़ी मेहनत करने लगे। सरफराज भी घर के पास ही गंदगी से भरे मैदान में प्रैक्टिस किया करता था। वे जब 15 साल के थे तो उन्हें बीसीसीआई की बैटिंग एकेडमी से अनुशासन की कमी के चलते निकाल दिया गया था। जब उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा तो उनके पिता उन्हें मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की एक मनोवैज्ञानिक के पास ले गए जिन्होंने सरफराज को मानसिक तौर पर मजबूती देने में काफी मदद की।