सहारनपुर रियासत का इतिहास

  • 2016-06-26 11:30:43.0
  • श्रीनिवास आर्य

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वर्तमान समय में गुर्जर प्रतिहारों की केवल तीन ही रियासतें बचीं हुई है लंधौरा रियासत, समथर रियासत और झबरेडा रियासत लंधौरा रियासत के वर्तमान महाराजा श्री कुँवर प्रणव सिंह जी परमार हैं  (पँवार वंश), समथर रियासत के वर्तमान महाराजा श्री रणजीत सिंह जी जूदेव (खटाणा) और झबरेडा रियासत के यशवीर व कुलवीर सिंह इन तीनो गुर्जर प्रतिहार रियासतों के महल और किले बहुत ही खूबसूरत है जो आज भी ऐसी शान से खडे है जिन्हे देखते ही हर वीर का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएं।

राजा हरिसिंह गुर्जर गुर्जरगढ़ (सहारनपुर) रियासत के आखिरी राजा थे। 19वीं सदी तक सहारनपुर का नाम गुर्जरगढ़ था। 1857 के गुर्जर विद्रोह मे राजा हरिसिंह का राजपाठ अंग्रेजो द्वारा समाप्त कर दिया गया था। जिसमे गद्दार रजवाडो कि मदद से 1858 तक सब देश प्रेमी गुर्जरो और उनके राजाओ को खत्म करदिया गया था (सहारनपुर, परिक्षितगढ,दादरी, इत्यादि गुर्जर रियासत) जहा आज सिर्फ किले के कुछ कोने ही बचे हुए है।

सहारनपुर के किले को 1858 मे तोड डाला था। 1857 की क्रान्ति की शूरूआत कोतवाल धनसिंह गुर्जर द्वारा हो चुकी थी जिसकी चिंगारी आस पास के सभी गुर्जर बहूल क्षेत्रो मे पहुच गई और वीरो ने बढ-चढ कर हिस्सा लिया जिसमे सैकडो-हजारो वीर गुर्जर शहीद हो गए और पूरे उत्तर प्रदेश मे फैल गई। बाकी राज्य के क्रान्ति मे हिस्सा ना लेने के कारण इनका मनोबल टूट गया और मिशन असफल रह गया।

1857 के गुर्जर विद्रोह का बदला लेने के लिए अंग्रेजो ने गुर्जरो के गाँवो को उजाडना शुरू करदिया।

राजपूताना के रजवाडो की सैना की मदद से सहारनपुर की गुर्जर रियासत जप्त कर ली गई और राजा हरिसिंह गुर्जर को तोप के मुहँ से बांधकर मार डाला गया। अंग्रेजो ने हर 16+ उम्र के गुर्जर लडके को भून डाला ।  हर पेड पर 10-15 लाशे लटकी रही इतनी क्रूरता थी अंग्रेजो की उनका अंतिम संस्कार भी नही करने दिया गया। लेकिन इतना ही देशप्रेम और वीरता थी गुर्जरो की देशभक्ति और देशप्रेम के लिए अपनी जान देदी पर आखिरी दम तक हार नही मानी।

राजा हरिसिंह के बेटे (चौ. आशाराम) को गुर्जर ग्रामीणो ने बचा भगाया और वंश को समाप्त  होने से बचाया। बडे होकर चौ. आशाराम  को राय साहेब की पडाती और औनरी मजिस्ट्रेट का टाईटल दिया गया था और सहारनपुर जिले के पहले मजिस्ट्रेट बने और उनके बेटे गुर्जर संगत सिंह पंवार गुर्जर समाज के पहले आई.पी.एस बने और अपने समय के बडे ही शूरवीर माने जाते थे। रिटायरमेंट के बाद इन्हे कश्मीर का गवर्नर बनने का ऑफर भी मिला। संगत सिंह जी की पत्नी पीरनगर रियासत से थी और उनका नाम पीतमकौर प्रधान था (मावी गुर्जर)। इनकी  बुआ लढ़ौरा रियासत की राजगद्दी पर बैठने वाली आखिरी रानी थी। समथर रियासत भी एक गुर्जर रियासत थी जो इनके ही सबंध मे आती थी। समथर रियासत झांसी के पास पडती है जो गुर्जरो की सबसे बडी रियासत है । रनजीत सिंह खटाणा समथर के राजा है। भारतीय इतिहास लेखन में बहुत से राजवंशों और समुदायों को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया है। ऐसे राजवंशों का उल्लेख यदाकदा इतिहास के संदर्भ ग्रन्थों में मिल जाता है, परन्तु इनके संगठित एवं क्रमबद्ध इतिहास का प्राय: अभाव है।

हमारा देश इन वीर गुर्जरो के बलिदान का सदा आभारी रहेगा। वर्तमान मे सहारनपुर रियासत वंशावली के वंशज विक्रमसिंह गुर्जर है और इन देवताओ का वंशज होना ही अपने लिए सबसे बडा आशिर्वाद मानते है।

- श्रीनिवास आर्य

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