गुर्जर सम्राट मिहिर भोज, भोजपुरी भाषा और भोजपुर (बिहार) के बीच का संबंध

  • 2016-05-15 04:15:42.0
  • उगता भारत ब्यूरो

गुर्जर सम्राट मिहिर भोज

भोजपुर,बिहार जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, भोजपुरी भाषा बोलने वाला सांस्कृतिक क्षेत्र है। बिहार के अलावा पूर्वी उत्तर-प्रदेश का कुछ क्षेत्र भी इस सांसकृतिक पॉकेट का अभिन्न हिस्सा है।बिहार शायद एक अनोखा राज्य है जो अपने अलग-अलग सांस्कृतिक भू-भागों में अलग-अलग सांस्कृतिक धरोहरों के लिए विख्यात है। भोजपुरी क्षेत्र निष्कर्षत: लोक-संस्कृति प्रधान रहा है। भोजपुर क्षेत्र की सीमा को विद्वानों ने उत्तर में हिमालय पर्वतमाला की तराई, दक्षिण मध्यप्रान्त का जसपुर राज्य, पूर्व में मुजफ्फपुर की उत्तरी-पश्चिमी भाग और पश्चिम में बस्ती तक के विस्तार को माना है। इस प्रकार इसका क्षेत्रफल लगभग पच्चास वर्गमील है।

पृथ्वीसिंह मेहता अपनी पुस्तक बिहार एक ऐतिहासिक दिग्दर्शन में लिखते है कि गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने अपने नाम से भोजपुर किले की स्थापना की। लेखक पृथ्वीसिंह मेहता का मत है कि कन्नोज के गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने भोजपुर बसाया था। भोजपुर राजा भोज का बसाया है, यह बात जनता में आजतक प्रचलित है, लेकिन कन्नोज के गुर्जर सम्राट मिहिर भोज को भूल जाने के कारण लोग आज धार (मालवा) के राजा भोज परमार को उसका संस्थापक मान बैठे हैं। मालवा का राजा भोज परमार महमूद गजनवी का समकालीन था और बिहार से उसका कोई सम्बन्ध न था। उत्तरी भारत में के लगभग 836 ई0 गुर्जर सम्राट रामभद्र का बेटा गुर्जर सम्राट मिहिर भोज गद्दी पर बैठा। भोज के गद्दी पर बैठते ही स्थिति बदल गयी। देवपाल को हराकर उसने शीध्र ही कन्नौज वापस ले लिया और भिन्नमाल की जगह कन्नौज को ही अपना राजधानी बनाया। हिमालय में काश्मीर की सीमा तक का प्रदेश जीतकर ने अपने राज्य में शामिल कर लिया और अपनी पश्चिमी सीमा वहाँ मुलतान के अरब राज्य तक पहुँचा दी।

पूरब में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के राज्य की सीमा बिहार तक थी। राजा देवपाल से उसने पश्चिमी बिहार (प्राचीन मल्ल देश) छीन लिया।गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के ग्वालियर प्रशस्ति (इपिग्राफिका इंडिका-भाग 12 , पृ0 156 ) से यह स्पष्ट होता है कि इसने धर्मपाल के पुत्र देवपाल को हराया था, साथ ही सारन जिले के दिवा-दुवौली ( इण्डियन एंटिक्वेरी - भाग 12 , पृष्ठ 112 ) नामक गाँव से पाये गये ताम्रपत्र से भी यह बात सिद्ध होती है कि प्रतिहार भोज का राज्य गोरखपुर तथा सारन तक था। पृथ्वीसिंह मेहता यह भी लिखते हैं कि पालों कि रोकथाम के लिए उन्होने शाहबाद जिले में अपने नाम से भोजपुर की स्थापना की। उसी भोजपुर नाम से आज पश्चिमी बिहार की जनता और उनकी बोली भोजपुरी कहलाती है। पृथ्वीसिंह मेहता का विचार अधिक प्रामाणिक है , क्योंकि कम से कम गुर्जर सम्राट मिहिर भोज का राज्य सारन तक तो रहा। इसकी संभावना भी है कि उसने पालों की रोकथाम के लिए भोजपुर में किले की स्थापना की गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के भोजपुर में किला बनवाने की बात ही सबसे अधिक कही जाती है।
प्रस्तुति : राकेश आर्य (बागपत)