नेशनल हैराल्ड और कांग्रेस

  • 2015-12-11 01:30:51.0
  • राकेश कुमार आर्य

rahul and soniaनेशनल हैराल्ड प्रकरण ने सारे देश का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर लिया है। कांग्रेसी अपनी नेता श्रीमती सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को इस प्रकरण से जितना निकालने या निर्दोष सिद्घ करने का प्रयास कर रहे हैं, उनके प्रयासों पर उतने ही बड़े-बड़े प्रश्नचिन्ह लगते जा रहे हैं।

‘नेशनल हैराल्ड’ मामले में सरकार कितनी दोषी है? या कांग्रेस की अध्यक्षा और उनके बेटे राहुल गांधी कितने निर्दोष हैं इसे समझने के लिए पहले इस प्रकरण को समझना होगा। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में 8 सितंबर को ‘नेशनल हैराल्ड’ नामक समाचार पत्र की स्थापना की थी। पंडित नेहरू ने इस अखबार का संचालन लखनऊ से प्रारंभ किया था, और इसके पहले संपादक भी वही बने थे। उस समय समाचार पत्र-पत्रिकाएं ‘देश जागरण’ के कार्य में विशेष रूप से बढ़-चढक़र भाग लिया करते थे। इसलिए इस पत्र ने भी अपने धर्म का निर्वाह किया और राष्ट्र जागरण में प्रमुख भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री बनने तक पंडित जवाहर लाल नेहरू ‘नेशनल हैराल्ड’ बोर्ड के चेयरमैन रहे। पत्र ने अपने विचारों का और भी अधिक प्रचार-प्रसार करने के लिए हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘कौमी आवाज’ नामक दो पत्रों का प्रकाशन भी किया, जिससे लोगों को उस समय बहुत लाभ मिला।

2008 में अपनी आर्थिक व्यवस्था के बिगड़ जाने के कारण इस ‘नेशनल हैराल्ड’ पत्र का प्रकाशन बंद हो गया। तब पत्र का स्वामित्व ‘एसोसिएटेड जरनल्स’ के पास था। ‘नेशनल हैराल्ड’ को चलाने वाली कंपनी ‘एसोसिएटेड जरनल्स’ ने कांग्रेस पार्टी से बिना ब्याज के 90 करोड़ रूपये का कर्ज लिया। कांग्रेस ने कर्ज देने का उद्देश्य कंपनी के कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचाना बताया। वास्तव में यह एक बहाना था, क्योंकि पत्र इतने बड़े ऋण को लेने के पश्चात भी पुन: प्रकाशित नही किया गया। जिससे लगता है कि कहीं न कहीं दाल में काला अवश्य था। ‘नेशनल हैराल्ड’ अखबार का दोबारा प्रकाशन तो नही हुआ पर 26 अप्रैल 2012 को ‘यंग इंडिया’ कंपनी ने एसोसिएटेड जरनल्स का स्वामित्व अवश्य प्राप्त कर लिया।

इस यंग इंडिया कंपनी में 76 प्रतिशत शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हैं। जिनमें से 38 प्रतिशत सोनिया गांधी और 38 प्रतिशत राहुल गांधी के हैं।  इनके अतिरिक्त जो शेयर बचते हैं उनमें सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, मोतीलाल बोरा और आस्कर फर्नाडीस के पास हैं। यंग इंडिया ने ‘नेशनल हैराल्ड’  की सोलह सौ करोड़ की परिसंपत्तियां केवल 50 लाख रूपये में प्राप्त कीं। ये सारी स्थिति परिस्थितियां किसी घोटाले की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करती हैं। अपनी प्रकृति और प्रवृत्ति में मस्त रहने वाले डा. सुब्रहमण्यम् स्वामी ने इन संदेहास्पद परिस्थितियों का सूक्ष्मता से परीक्षण और निरीक्षण किया और इस प्रकरण को संदेहास्पद समझकर उठा लिया।

डा. स्वामी का आरोप है कि गांधी परिवार ‘नेशनल हैराल्ड’  की संपत्तियों का अवैध ढंग से उपयोग कर रहा है। इनमें दिल्ली का ‘नेशनल हैराल्ड’ हाउस और अन्य संपत्तियां भी सम्मिलित हैं। डा. स्वामी इस आरोप को लेकर 2012 में न्यायालय गये। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के पश्चात 26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अतिरिक्त मोतीलाल बोरा, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा को सम्मन जारी कर पेश होने के आदेश जारी किये थे। तब से आदेश की तामील लंबित चली आ रही थी।

सोनिया और राहुल की कंपनी ने यंग इंडिया ने दिल्ली में सात मंजिला ‘नेशनल हैराल्ड’  को किराये पर कैसे दिया-यह भी डा. स्वामी का एक आरोप है। इसकी दो मंजिलें पासपोर्ट सेवा केन्द्र को किराये पर दी गयीं, जिसका उद्घाटन तत्कालीन विदेशमंत्री एस.एम. कृष्णा द्वारा किया गया। इसका अभिप्राय है कि यंग इंडिया किराये के रूप में भी बहुत पैसा कमा रही है।

डा. स्वामी का मानना है राहुल ने एसोसिएटेड जरनल्स में शेयर होने की जानकारी 2009 चुनाव आयोग को दिये शपथ पत्र में छुपायी और बाद में दो लाख बासठ हजार चार सौ ग्यारह शेयर प्रियंका गांधी को हस्तांतरित कर दिये। ये सारे कार्य पूर्णत: विधिसंगत नही कहे जा सकते। विशेषत: तब जब कांग्रेस दूसरों के कार्यों पर बहुत गहराई से ध्यान देती रही हो, और उसे किसी नेता के राजनीतिक कैरियर को नष्ट करने में कोई देर न लगती हो।

अब डा. स्वामी कहते हैं कि 20 फरवरी 2011 को अंतत: कैसे ‘नेशनल हैराल्ड’  बोर्ड के प्रस्ताव के पश्चात एसोसिएटेड जरनल्स प्राइवेट लिमिटेड को शेयर हस्तांतरण के माध्यम से यंग इंडिया को ट्रांसफर किया गया, जबकि यंग इंडिया कोई समाचार पत्र या जरनल निकालने वाली कंपनी नही है। कांग्रेस द्वारा एसोसिएटेड जरनल्स प्राइवेट लिमिटेड को बिना ब्याज पर 90 करोड़ रूपये से ज्यादा कर्ज कैसे दिया गया? जबकि यह गैर कानूनी है, क्योंकि कोई राजनीतिक दल किसी भी व्यावसायिक कार्य के लिए ऋण नही दे सकता?

जब एसोसिएटेड जरनल्स का हस्तांतरण हुआ, तब इसके अधिकांश अंशधारकों की मृत्यु हो चुकी थी, ऐसे में उनके अंश (शेयर) किसके पास गये और कहां हैं? आखिर कैसे एक व्यावसायिक कंपनी यंग इंडिया की मीटिंग सोनिया गांधी के सरकारी आवास 10 जनपथ पर हुई?

सारा प्रकरण देखने से और डा. स्वामी के सारे आरोपों की गहनता और सूक्ष्मता से पड़ताल करने से स्पष्ट होता है कि पूरा प्रकरण न्यायिक है और इसमें कौन कितना दोषी रहा या किसने किस विधिक प्रावधान का उल्लंघन करते हुए अवैधानिक कृत्य निष्पन्न किया, यह देखना और उस पर अपना मंतव्य स्पष्ट करना या आदेश पारित करना केवल न्यायालय का कार्य है। इस पर कांग्रेस को संसद को रोकने या वहां पर शोर-शराबा करके देश का ध्यान वास्तविक मुद्दे से हटाकर इधर उधर भ्रमित करने का कोई अधिकार नही है। कुछ समय पूर्व नरेन्द्र मोदी जब न्यायालयों में अपने विरूद्घ न्यायिक कार्यवाहियों का सामना कर रहे थे, तो उस समय कांग्रेस का कहना होता था कि कानून अपना काम करेगा। क्या ही अच्छा हो कि कांग्रेस आज भी कानून को अपना काम करने दे?