मोदी की कूटनीति और विदेश नीति-भाग-2

  • 2015-12-14 01:30:45.0
  • राकेश कुमार आर्य

Narendraअब आते हैं सुरक्षा मामलों पर। इस क्षेत्र में अजीत डोबाल को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपकर भी नरेन्द्र मोदी ने उचित निर्णय किया। जिसे पूरा देश ही नही, अपितु पड़ोसी देश भी अनुभव कर रहे हैं। अभी कुछ समय पहले की ही बात है कि अमेरिका के पेंटागन, इजराइल, व जापान से टाइअप किये गये। तब हमने अजीत डोबाल के साहसिक और देशभक्ति से भरे हुए रोमांचकारी शब्द सुने। जिनसे हर देशवासी का सीना गर्व से चौड़ गया था। तब अजीत डोबाल ने कहा था कि-
‘‘
किसी भी प्रकार का मुंबई जैसा हमला यदि पाकिस्तान ने इस बार किया तो पाकिस्तान बलूचिस्तान को हार जाएगा।’’ फलस्वरूप हमने आतंकी नाव को समुद्र में ही रोक दिया। अजीत डोबाल की भाषा ने समस्या का त्वरित समाधान प्रस्तुत किया, उनके शब्दों में ना तो किसी  प्रकार का भय था और ना ही किसी प्रकार याचना थी। उनके शब्द स्पष्ट कर रहे थे कि वह एक स्वाभिमानी राष्ट्र के साहसी राजनयिक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम पहले हमला नही करेंगे, परंतु यदि आप हमला करोगे तो हम अब दूसरा गाल आपके सामने नही करेंगे।

भारत ने उत्तर पूर्व चीनी सीमा पर सडक़ निर्माण की अनुमति दी इस सडक़ निर्माण के कार्य में प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत स्तर पर रूचि ली। जबकि संप्रग के शासनकाल में एशियन विकास बैंक ने चीन के विरोध के कारण इस कार्य के लिए धन उपलब्ध कराने से स्पष्ट मना कर दिया था। तब संप्रग सरकार भी इस फाइल पर कोई निर्णय नही ले पायी थी। जबकि यह इतना संवेदनशील प्रकरण था कि सीमा पर सडक़ों की सुविधा न होने के कारण हमारे सैनिकों को कष्ट उठाने पड़ रहे थे और उनके मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इसके उपरांत भी शासन में बैठे लोग मौन धारण किये रहे।

भारत सरकार यमन के युद्घ क्षेत्र से न केवल पैंतालीस सौ से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाल पाई, अपितु उसने 41 अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने में प्रशंसनीय भूमिका निभाई। इससे भारत का सिर विश्व में गर्व से ऊंचा हुआ और उसके प्रति लोगों के मन में विश्वास का भाव जाग्रत हुआ।  तब भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब के राजा सलमान से स्वयं बातचीत करके भारतीय वायुसेना को सुरक्षित उड़ान की अनुमति प्रदान कराई। ध्यान रहे कि सऊदी अरब ने ही यमन पर हमला बोला था और यमन के वायुक्षेत्र को यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। इस बातचीत के कारण हमें कुछ घंटों की सुरक्षित उड़ान मिली थी। इस सारी योजना के पीछे अजीत डोबाल, श्रीमती सुषमा स्वराज और जनरल वी.के. सिंह का मस्तिष्क कार्य कर रहा था। सचमुच अब से पूर्व ऐसे साहसिकनिर्णय लेते हुए हमने किसी मंत्री या मंत्रियों के समूह को नही देखा।

भारतीय वायु सेना को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने राफेल लड़ाकू विमान के लिए फ्रांस से समझौता किया और उससे कहा कि वह भारतीय सेना को 36 विमान जितना शीघ्र हो सके उतना शीघ्र उपलब्ध करा दे। इस समझौते को प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी एजेंट या दलाल के पूर्ण कराया, स्पष्ट है कि इस सौदे में पूर्णत: पारदर्शिता बरती गयी और किसी को कोई कमीशन नही दिया गया। 42 वर्षों के पश्चात भारत के किसी प्रधानमंत्री ने कनाडा की यात्रा की। यह यात्रा भी मौज मस्ती करने या गुलछर्रे उड़ाने के लिए नही की गयी थी, अपितु यह यात्रा पूर्णत: राजनयिक यात्रा थी। तब हमारे प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय समझौते में कनाडा से यूरेनियम सप्लाई करने का समझौता किया। कनाडा भारत को अब अगले पांच वर्ष तक भारतीय परमाणु ऊर्जा के रियक्टर को यूरेनियम सप्लाई करेगा। जिससे भारत को बिजली की समस्या के निदान में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। कनाडा में भारतीय यात्रियों के लिए ऑनएराबल वीजा की अनुमति भी प्रदान की है।

अभी हाल ही तक भारत विदेशों से न्यूक्लीयर रियक्टर खरीदने के लिए स्वयं को एक भिखारी से भी निकृष्ट अवस्था में अनुभव किया करता था। उसे न्यूक्लीयर रियक्टर रूस व अमेरिका से खरीदने पड़ते थे, और ये देश हमारे द्वारा इन रियक्टरर्स के प्रयोग को संदेह की दृष्टि से देखते थे। तब हमें उन्हीं की शर्तों पर उनसे रियक्टर  खरीदना पड़ता था। अब प्रधानमंत्री मोदी ने इस समस्या का समाधान और निदान खोजते हुए फ्रांस को न्यूक्लीयर रियक्टर देने के लिए तैयार कर लिया है। फ्रांस का न्यूक्लीयर रियक्टर  रूस और अमेरिका के न्यूक्लीयर रियक्टर  से उत्तम है। ये ‘भारत में ही बनाओ’ योजना के तहत एक भारतीय कंपनी की साझेदारी में होगा।

अमेरिका यात्रा के दौरान नरेन्द्र मोदी ने बराक ओबामा को न्यूक्लीयर फ्यूल टै्रकिंग के नियम छोडऩे के लिए सहमत किया। उत्तरदायित्व के नियम को सुलझाया, जिसके कारण सोलह न्यूक्लीयर रियक्टर  पावर प्रोजेक्ट के रास्ते खुल गये।

क्या अठारह माह के शासन काल में देश के भीतर सुरक्षा का इतना विश्वसनीय तानाबाना बुन देना और देश को आत्मविश्वास के मार्ग पर आरूढ़ कर देना कम है? निश्चित रूप से जितना कुछ किया गया है उसे नरेन्द्र मोदी ही कर सकते थे। इसलिए अभी तक मोदी को भारत का सबसे उत्कृष्ट प्रधानमंत्री माना जा रहा है। वह अपनी कार्यशैली से सिद्घ कर रहे हैं कि उनके लिए राष्ट्र सर्वप्रथम है, और किसी भी राजनेता के लिए ऐसा ही होना भी चाहिए।

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

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