मेरा जुनून है, मेरा सनम है मेरा कर्म है वतन मेरा

  • 2016-04-03 05:09:30.0
  • देवेंद्र सिंह आर्य

हमारे देश की जनसंख्या इस समय लगभग सवा अरब है। इस देश में 2 सैनिकों की हत्या होने की कीमत लगभग 2000 नागरिकों के जीवन पर संकट होने के बराबर है। सोचिये, इस देश के 1 परमाणु वैज्ञानिक की यदि हत्या कर दी जाती है तो हमें उसकी हत्या की क्या कीमत चुकानी पड़ेगी? पर इस देश के विषय में सत्य है कि हमने अपने लगभग दो सौ परमाणु वैज्ञानिकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होते देखी है। इस सबके उपरंात भी हम चुप रहे हैं, हमारी सरकारें आपराधिक मौन साध गयीं। हममें से अनेक व्यक्ति इस बात से अनजान हैं।

हमें ये पता है कि आज सलमान ने क्या किया? या किस टीवी चैनल पर कौन सी फिल्म किस समय आ रही है या ऐसी ही वे अनर्गल बातें जिनका हमारे राष्ट्रीय जीवन में कोई औचित्य नही है, उनकी जानकारी हम रखते हैं, लेकिन क्या हमें ये पता है कि  वर्ष 2009 से 2013 के बीच इस देश के 10 परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या कर दी गई? ये सभी वैज्ञानिक देश की अनेक परमाणु संबंधी योजनाओं से जुड़े हुए थे। हमने तनिक भी ध्यान नही दिया कि इन शेरपुत्रों की हत्या के पीछे किसका षडयंत्र है और किसका मस्तिष्क काम कर रहा है। राष्ट्र के प्रति इतना उपेक्षाभाव हमने बना लिया है या हमको ऐसी परिस्थितियों में जीने के लिए कुछ लोगों ने अभिशप्त कर दिया है कि तुम उधर राष्ट्र की ओर मत देखो। दोनों स्थितियां ही विचारणीय हैं और गंभीर भी हैं।

मेरा जुनून है, मेरा सनम है मेरा कर्म है वतन मेरा

1995 से लेकर 2010 तक इस देश के 32 केंन्द्रों के 197 परमाणु वैज्ञानिकों की रहस्यमय मृत्यु हुई है। हमें पता ही नहीं। क्योंकि हम व्यस्त रहे हैं भारत-पाक के बीच होने वाले क्रिकेट मैच के परिणामों को देखने में, हमने यह नही देखा कि पाकिस्तान हमें दूसरे मोर्चे पर कितना पीछे धकेल चुका है। सारे काम देश की सरकार नही कर सकती, देश के नागरिकों की  भी जिम्मेदारी है कि वे भी जागरूक रहें। हम जागरूक नही रहते तभी तो शत्रु इस देश में प्याज और दाल का शोशा छो$डक़र सरकारें बदलवा देता है। आपकी मनपसंद और राष्ट्रहितों के अनुकूल काम करने वाली पार्टियां या नेता सत्ता से दूर कर दिये जाते हैं और महाभ्रष्ट लोगों को सत्ता सौंप दी जाती है।

बीएआरसी के वैज्ञानिक मिस्टर पदम नाभन (48) की लाश उनके ही फ्लैट में मिली। सप्ताह-भर से लापता सीएजी परमाणु-संयन्त्र से जुड़े सीनियर इंजीनियर एलएन महालिंगम की लाश काली नदी में तैरती पाई जाती है।

वर्ष 2013 में विशाखापत्तनम में रेलवे टै्रक के किनारे 2 वैज्ञानिकों केके जोश और  उनके साथी अभीष शिवम की लाश मिलती है, ये दोनों वैज्ञानिक देश की पहली स्वदेशी पनडुब्बी अरिहन्त के निर्माण से जुड़े थे।

क्या हमें पता चला इन सबकी हत्या कैसे हुई? क्यों न्यूज चैनल्स  ने हमें इन घटनाओं से बेख़बर रखा? इन सबकी हत्याओं में जो तरीके अपनाये गए वे दुनिया की कुछ चुनिंदा खुफिया एजेन्सी ही अपनाती हैं, जिनमें सीआईए, केजीबी, एम 16, मुसाद, आईएसआई जैसी एजेंसियाँ शामिल हैं। भारत देश के परमाणु कार्यक्रम के जनक डा. होमी जहांगीर भाभा की हत्या सीआईए ने की थी। हम ना जाने कहाँ खोये हैं, और देश पर गम्भीर संकट मंडरा रहा है।
किसी कवि ने हमारे लिए क्या सुंदर लिखा है :-

मेरी महफिल है, मेरा सेहरा है,
मेरा कफन है वतन मेरा....
एक जिंदगी नही, हर जन्म वार दूं, अपने हिन्दुस्तान पर
मेरा जुनून है, मेरा सनम है
मेरा कर्म है वतन मेरा
लहू की हर बूंद-बूंद से लाल कर दूं
सरहद-ए-हिन्दुस्तान,
मेरा इश्क है, मेरा फक्र है, मेरी जान है वतन मेरा.....

देवेंद्र सिंह आर्य ( 262 )

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