मायावाद का उत्कर्ष

  • 2015-07-23 05:50:00.0
  • विजेंदर सिंह आर्य

हुई मंद शिखा संभूति की, निशा असंभूति की छाई।
आज मानवता के नभमंडल में, एटम की बदली छाई।

है आज वही तम भूतल पर, जिसमें रावण कभी भटका था।
कंस, दुर्योधन शिशुपाल, शकुनि, जरासंध भी अटका था।

चंगेज मुसोलिन हिटलर ने, पाशविक शक्ति से पटका था।
तोजो, सिकंदर सीजर ने, जाने कितनों को सटका था।

किंतु अंत हुआ जब इनका, हुए बुरी तरह बर्बाद।
श्रद्घा से नही, घृणा से करेगा। इतिहास सदा इन्हें याद।

अरे! आज के उन्नत मानव भूला क्यों इतिहास?
तू ही केन्द्र रहा धरती पर, पतन हुआ या विकास।

आखेटक से संग्रहीक, हुआ अन्वेषक जिज्ञासु।
था जीव मात्र का प्रहरी तू।

विजेंदर सिंह आर्य ( 326 )

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