प्रभु भजन

  • 2015-10-25 04:00:14.0
  • रोहताश सिंह आर्य

ओ३म् नाम, ओ३म् नाम, ओ३म् नाम कहिए।
जाहि विधि राखे ओं, ताहि विधि रहिए।।
मुख में हों ओं नाम, ओं सेवा हाथ में।
तू नही अकेला प्यारे, ओं तेरे साथ में।
विधि का विधान जान, हानि लाभ सहिए।
जाहि विधि राखे ओं, ताहि विधि रहिए।। 1 ।।
किया अभिमान तो, फिर मान नही पाएगा।
होगा वही प्यारे जो, ओं जी को भाएगा।
फल की आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिए।
जाहि विधि राखे ओं, ताहि विधि रहिए।। 2 ।।
जिंदगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के।
महलों में रखे चाहे, झोंपड़ी में वास दे।
धन्यवाद निर्विवाद ओं ओं कहिए।
जाहि विधि राखे ओं, ताहि विधि रहिए।। 3 ।।
आशा एक ओं जी की, दूजी आशा छोड़ दे।
नाता एक ओं जी से, और नाता तोड़ दे।
साधु संग ओं रंग, अंग जंग भीखे।
जाहि विधि राखे ओं, ताहि विधि रहिए।। 4।।
काम रस त्याग प्यारे, ओं रस पीजिए।
जाहि विधि राखे ओं, ताहि विधि रहिए।। 5 ।।

रोहताश सिंह आर्य ( 10 )

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