क्या ताजमहल कभी हिंदू मंदिर था...........

  • 2015-12-05 03:30:52.0
  • उगता भारत ब्यूरो

tajmahalदिल्ली से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर सांवली यमुना के किनारे सफेद संगमरमर से गढ़ी गई इमारत दुनिया का सातवां अजूबा भी है और अब तक आम जनता को यह बताया गया है कि एक शहंशाह के प्यार की ऐसी दास्तान है जिसका दीदार आज भी हर दिल को धडक़ने पर मजबूर कर देता है. लेकिन ताज महल की खूबसूरती की ये कहानी आक्रान्ताओं के द्वारा हिदुओ पर अत्याचार को बता रही है, इस पर एक विवाद सरकार की इतिहास पर कमजोरी, एक वजह बनीं हुई है. विवाद ये कि ताज महल हिंदू इमारत है या मुगलों का ख्वाब? देश के संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने संसद में ताज महल पर  एक बयान दिया और ताज महल को लेकर फिर तूफान खड़ा हो गया है. सरकार को इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला है कि ताजमहल मूल रूप से हिंदू मंदिर था. महेश शर्मा ने ये बयान संसद में ताजमहल के उस विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में देना पड़ा है जो हिंदूवादी संगठनों की ओर से ताजमहल को एक शिव मंदिर साबित करने से जुड़ा हुआ है।

इससे पहले ताज महल को हिंदू मंदिर घोषित करने की इस कानूनी जंग के पन्नें पलटें तो जानें, कि जिस ताज का दीदार करने हर साल 30 लाख लोग आगरा पहुंचते हैं. जिस ताज को 1983 में युनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया था और जिस ताज पर हर कोई नाज करता है । भारत  में ताज के बारें में कुछ बाते इतिहास से दूर रखी गई है। हमारे और आपके दिलों में बरसों से रची बसी ताज की वो कहानी जो 16 वीं सदी में पांचवे मुगल शासक शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज महल के इश्क से शुरू होती है.

इतिहास के पन्नों पर दर्ज ये दास्तान बताती है कि मुमताज महल की मौत के बाद साल 1632 में शाहजहां ने मुमताज महल का ये मकबरा बनवाया और अपनी चाहत को संगमरमर के इस हुस्न में हमेशा के लिए कैद कर दिया. ताज महल को देखने दुनिया भर से जो पर्यटक आते हैं उन्हें यही कहानी जाने कितनी बार सुनाई गई है.

ताजमहल संगमरमर की इमारत को साल 1192 में राजा परमार्दिदेव ने बनवाया था. ये इमारत एक मंदिर थी जिसमें अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर शिवलिंग की पूजा होती थी. शाहजहां ने इसे राजपूत राजा मानसिंह के पोते जयसिंह से हासिल किया था.  शाहजहां की बेगम मुमताज महल का असली मकबरा बुरहानपुर में था. शाहजहां ने कब्जे के बाद शिव मंदिर को ही मकबरे में बदल दिया था.

जहाँ तक मन्दिर होने की बात है, कि नदी के किनारे सिर्फ मंदिर होते हैं और दुनिया में किसी मकबरे का नाम महल नहीं रखा गया है। आगरा में पांच शिव मंदिरों में से सिर्फ चार बचे हैं क्योंकि पांचवा मंदिर तेजू महल था जिसे मुगल शासकों ने ताजमहल में बदल दिया गया. इन तर्कों को लेकर आगरा के छह वकील निचली अदालत में ये साबित करने की कोशिश में जुटे हैं कि ताज महल शिव मंदिर है. ताजमहल को लेकर याचिका श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान' की तरफ से लखनऊ के वकील हरिशंकर जैन ने दाखिल की है जिस के मुताबिक खसरा नंबर 12, मौजा बसई, तहसील सिटी, जि़ला आगरा में स्थित संपत्ति तेजो महालय है।

ताज महल में कुएं की मौजूदगी यह साबित करती है कि कुएं मकबरे में नहीं बल्कि मंदिर में होते हैं. ताजमहल की मुख्य इमारत का आकार अष्टभुजाकार है। हिंदू धर्म 10 दिशाएं मानता है आकाश और पाताल मिलाकर आठ कोने दरअसल 10 दिशाओं के प्रतीक हैं। ताजमहल के शिखर की और देखा जाये तो ये हिंदू पूजा विधि में इस्तेमाल होने वाले नारियल और आम्रपल्लव का प्रतीक है। ताजमहल की नक्काशी में मौजूद कमल का फूल भी इसे हिंदू इमारत साबित करता है। ताज महल की दीवारों पर मौजूद नक्काशी में बनी आकृति के धतूरे का फूल होने और इसमें ओम नजर आता है. दीवारों पर मौजूद निचले हिस्से को ध्यान से देखा जाए तब हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें बनी हुई लगती है जिन्हें मिटा दिया गया। ताजमहल के पिछले हिस्से से नजर आने वाली लाल पत्थर से बनी दो निचली मंजिलों में मौजूद 22 कमरों के बंद है उन्हें निगरानी में खुलना चाहिए, जिसमे मंदिर होने के सबूत हो सकते है, सरकार पहल करे.....।

ताज महल को हिंदू इमारत साबित करने के लिए पीएन ओक ने ऐसे एक दो नहीं कुल 104 तर्क दिए थे. इंदौर के रहने वाले पीएन ओक ने हिंदुस्तान टाइम्स और स्टेट्समैन अखबार में काम किया और फिर साल 1964 में भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन के लिए एक संस्था बनाकर एक मुहिम छेड़ दी थी,  ताज महल भी उसी मुहिम का हिस्सा थी जिसे 2007 में उनकी मौत के बाद हिंदूवादी  अदालत तक ले गए हैं। ताज महल को शिव मंदिर साबित करने वाली याचिका पर अगली सुनवाई फरवरी में होनी है, सबूतों के नाम पर दूसरे मंदिरों की परंपरा के तर्क तो दिए जा रहे हैं लेकिन ना तो अब तक ताजमहल की उम्र का पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग की गई है और ना ही उस शिवलिंग का कोई सुराग पता किया गया है जिसका जिक्र बार-बार किया जाता रहा है यह तभी संभव है जब सरकार पहल करे।