क्या कह रहे हैं-पाकिस्तानी सांसद

  • 2016-02-04 03:30:50.0
  • राकेश कुमार आर्य

1947 में जब पाकिस्तान का निर्माण हुआ तो इस देश ने मौहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में स्वयं को एक धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में घोषित किया। परंतु यह घोषणा केवल एक घोषणा ही बनकर रह गयी, क्योंकि पाकिस्तान अपने धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा नही कर पाया। उसने अपने आपको धर्म निरपेक्ष इसलिए घोषित किया था, जिससे कि उसका साम्प्रदायिक भेडिय़ापन लोगों की नजरों में न आने पाये, और हुआ भी यही। उसकी घोषणा से भ्रमित होकर और उसके नेतृत्व पर विश्वास करके ढाई से तीन करोड़ हिन्दू वहीं रह गये। जिन्हें लेकर उस समय का विश्व समुदाय चिंतित हुआ कि एक साम्प्रदायिक देश में इन हिन्दुओं का क्या होगा? बस, विश्व समुदाय की इसी चिंता के स्तर को तात्कालिक आधार पर हल्का करने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने दिखावे के रूप में स्वयं को एक धर्मनिरपेक्ष देश घोषित किया। उसे अपनी इस घोषणा का तात्कालिक लाभ भी मिला, परंतु अंत में विश्व समुदाय की चिंता सत्य साबित हो गयी जब पाकिस्तान अपने हिन्दुओं के अस्तित्व को लगभग मिटाने में सफल हो गया। वहां इस्लाम के समुद्र में एक सनातन-पुरातन धर्म का जहाज डूब गया। हम सभी इतिहास की उस क्रूरतम घटना के साक्षी बने हैं, पर कुछ भी नही कर पाये। हमारी संवेदनाएं मर गयीं और हमने ढाई तीन करोड़ लोगों को भेडिय़ों के रहमोकरम पर छोड़ दिया।
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पाकिस्तान को धर्मनिरपेक्ष बनना ही नही था, यह तो हमारी भूल थी कि हमने उसकी बात पर विश्वास किया। पाकिस्तान ने अपनी नीतियों का परिचय देते हुए पहले दिन से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि पाकिस्तान केवल मुसलमानों के लिए है इसलिए वहां किसी अन्य धर्मावलंबी के लिए कोई स्थान नही है। दूसरे कुरान के अनिवार्य पाठ को पाकिस्तान ने स्कूलों में अनिवार्य किया, साथ ही साथ शिक्षा पाठ्यक्रम के इस्लाम की शिक्षाओं को सभी विषयों में सम्मिलित किया उसने सभी संप्रदायों के लोगों के लिए यह व्यवस्था बलात लागू की, और बलपूर्वक विपरीत धर्मावलंबियों को अपनी शिक्षा देकर उनका धर्मांतरण करना आरंभ किया। अपने इसी पाठ्यक्रम में उसने यह भी सुनिश्चित और सुस्थापित किया कि भारत और भारतवासियों के प्रति घृणा उत्पन्न की जाए। जिसके लिए पाकिस्तानी विद्यार्थियों को जिहाद और शहादत का रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

भारत की सरकारें पाकिस्तान के घोषित एजेंडा पर बहुत देर तक विश्वास करती रही, और उन्होंने यह देखा ही नही या देखकर भी अनदेखा किया कि पाकिस्तान की वास्तविक इच्छा क्या है या वह वास्तव में क्या कर रहा है? इसलिए हमारे ‘नेहरू और अटल शांति’ का पैगाम लिखते भेजते रहे और पाकिस्तानी आवाम की समृद्घि की कामना करते रहे, और पाकिस्तानी शासक ही नही वहां की जनता का भी एक बहुत बड़ा वर्ग हमें और हमारे देश को विश्व मानचित्र से नष्ट करने का प्रयास करता रहा। इसी खेल में कई दशक बीत गये। आजादी से पहले जन्मे लोग अब लगभग समाप्त होते जा रहे हैं आजादी के बाद जन्मे लोग भी ‘दादा’ बन गये हैं। कहने का अभिप्राय है कि आजादी के बाद की तीसरी पीढ़ी हमारे बीच आ गयी है, और हम हैं कि पाकिस्तान को समझ नही पाये हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की इस बात के लिए प्रशंसा ही की जाएगी कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में अपना और भारत का एक विशिष्ट स्थान बनाया है। पहली बार भारत की बात को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बड़ी गंभीरता से सुना जा रहा है, जो लोग हमारे पास बैठना तक ठीक नही मानते थे अब वही हमारी बात पर आंख मूंदकर हस्ताक्षर कर रहे हैं। इस स्थिति ने पाकिस्तान को पहली बार कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। नवाज शरीफ की पार्टी के कुछ सांसदों ने अपनी चार पेज की रपट में सरकार को पहली बार कहा है कि कश्मीर घाटी में जिस आतंकवाद को लेकर भारत चिंतित है उसमें पाकिस्तान का हाथ है। अंतर्राष्ट्रीय दबाव और अंतर्राष्ट्रीय नेताओं की चिंता से अपनी सहमति व्यक्त करते हुए इन सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान भारत को अस्थिर करना बंद करे और किसी भी प्रकार की आतंकी घटनाओं को अपना समर्थन देना बंद करे।

इस प्रकार के प्रतिवेदन का स्पष्ट अर्थ है कि पाकिस्तान को अब अपने अस्तित्व पर चिंता होने लगी है। उसे दीखने लगा है कि वह जो कुछ कर रहा है, उससे एक दिन उसी का घर जलेगा। झूठ का खेल अंतत: कितनी देर चलेगा? पाकिस्तान ने अपना काल्पनिक इतिहास बनाया और उसे काल्पनिक बातों से या झूठों से भरने का प्रयास किया। उसने अपने लोगों को बताया कि सौ वर्ष से भी अधिक समय तक उपमहाद्वीप में तथा अन्य स्थानों पर रहने वाले मुसलमानों ने पाकिस्तान के निर्माण के लिए संघर्ष किया है। उसने अपने लोगों में इस धारणा को भी बैठाने का काम किया कि पाकिस्तान की स्थापना इस्लाम का गौरव बढ़ाने के लिए इस्लामिक राज्य के रूप में की गयी। उसने अपने लोगों को यह विश्वास कराने का हरसंभव प्रयास किया तत्कालीन परिस्थितियों में पाकिस्तान की स्थापना इस्लाम की सेवा के लिए अति आवश्यक थी और यदि आज भी पाकिस्तान भारत के विरूद्घ कुछ कर रहा है तो वह भी इस्लाम की सेवा के दृष्टिगत अति आवश्यक है। अपने सभी मंतव्यों को स्पष्ट करने के लिए पाकिस्तान ने ‘पाठ्यक्रम दस्तावेज प्राथमिक शिक्षा 1995’ में यह स्पष्ट कर दिया कि अध्ययन सामग्री में धर्म एवं भौतिकता के बीच भेद की कोई अवधारणा न हो, अपितु सभी सामग्री इस्लामिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत की जाए।

अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए पाकिस्तान ने अपने पाठ्यक्रम में यह भी स्थापित किया है कि भारत और उसमें रहने वाले हिंदू धूत्र्त, चालक और विश्वासघाती हैं और वे सामान्य रूप से इस्लाम एवं मुसलमानों विशेषत: पाकिस्तान का विनाश करने में लगे हैं। इसलिए ‘जिहाद’ और ‘शहादत’ प्रत्येक मुसलमान का पावन कत्र्तव्य है।

हमारा मानना है कि भारत के राष्ट्रवादी मुस्लिमों को पाकिस्तान के उद्देश्य को समझकर तथा भारत में हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए प्रयास करते हुए पाकिस्तानी चालों का भंडाफोड़ करने के लिए स्वयं आगे आना चाहिए। साम्प्रदायिक कट्टरता में जीते-जीते सैकड़ों वर्ष इस विश्व को हो चुके हैं, पर कोई शुभ परिणाम नही निकला। विश्व भयग्रस्त और लहूलुहान भी है। इसके भय को दूर करने के लिए अब नया इतिहास रचने का समय आ गया है। जिसे समझने की आवश्यकता है। पाकिस्तान के सांसदों की रपट पर यदि नवाज सही कदम उठाते हैं तो माना जाएगा कि वह कुछ करना चाहते हैं। पाक सांसदों ने जो कुछ कहा है वह साहसिक है और इस प्रतिवेदन को हमें दोनों के बीच बढ़ते टकराव को दूर करने के दस्तावेज के रूप में देखना चाहिए।

राकेश कुमार आर्य ( 1586 )

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