खुदा करेगा ना माफ

  • 2015-11-24 10:30:50.0
  • विजेंदर सिंह आर्य

मजहब की आड़ में, मौत बांटने वालो सुन लो।

एक छोटी सी बात, ये मेरे हृदय के जज्बात....

इंसानियत और मासूमों के, क्यों बन गये सैय्याद?

देख दरिन्दगी-बेरहमी को, शरमाता जल्लाद।

अपना चमन उजाड़ रहे, जो कल तक था आबाद।।

धरती कर दी लाल लहू से, दिल में बहुत विषाद।

बूढ़े बच्चे विधवा बिलखें, कोई सुनता नही फरियाद।।

उनकी चीख बींधती दिल को, बंद करो ये फसाद।

त्राहि-त्राहि मची हुई है, बड़ा हृदय विदारक नाद।।

दिन-दिन बढ़ती जाती है, अब जुल्मों की तादाद।

रोते-रोते छोड़ रहे हैं, घर जमीन जायदाद।।

बेरहमी से दाग रहे हैं, अपनों पर बारूद।

हृदय बैठने लगता है, जब मिटता कहीं वजूद।।

ये मौत का मंजर देख, हृदय में बेहद है अवसाद।

बेगुनाहों को निगल रहा, धरती पर आतंकवाद।।

अपनी नस्ल को अपने हाथों, क्यों कर रहे बर्बाद?

खुदा के बंदे कहलाने का, क्या रहेगा एतकाद?

आज सीरिया की गलियों में, ये किसका आत्र्तनाद?

कुरान शरीफ और हदीस की, क्यों भूल गये मर्याद?

जो मौत का मंजर देख रहे, फिर बैठे क्यों खामोश वहां?

लुट रहा चमन, ये कैसा अमन, उनसे पूछे एक रोज जहां?

चेतो मानवता के रखवालो, तुरंत करो इमदाद।

सारे मिलकर आज बचाओ, मानवता का वाद।।

दहशतगर्दी से धरती को, कर दो तुम आजाद।

अमन-चैन, बहबूदी का, कोई रास्ता करो ईजाद।।

कयामत के दिन जब होगा, अल्लाह का इंसाफ।

मानवता के हत्यारों को, खुदा करेगा ना माफ।।

-प्रो. विजेन्द्रसिंह आर्य