यह कैसी पूजा है?

  • 2015-07-20 06:00:16.0
  • विजेंदर सिंह आर्य

धर्म, क्षेत्र संप्रदाय के नाम पर, कितना खून बहाया है?

हिंसा से हिंसा बढ़ती है, क्या अभी समझ नही पाया है?

गौतम, गांधी, ईशा, नानक ने, क्या हिंसा का पाठ पढ़ाया है?

यदि नही, तो फिर बतला, तूने क्यों इसे अपनाया है?

है सदियों पुरानी कमजोरी, क्या तूने कभी यह सोचा है?

मासूम थे वो, निर्दोष थे वो, फिर उनका मांस क्यों नोचा है?

आदि मानव कहलाता था, जब भटक रहा था जंगल में।

लगता है हमको आज वही, चाहे पहुंचे चांद और मंगल में।

था स्वार्थ हिंसा के घेरे में, है आज भी इनके घेरे में।

है वही कुटिल हृदय तेरा, अंतर आया है चेहरे में।

कभी घायल करता पत्थर से, आज एटम बम चलाता है। खाता था कच्चा मांस कभी, आज भून-भूनकर खाता है।

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विजेंदर सिंह आर्य ( 326 )

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