हर साख पे उल्लू बैठा है

  • 2016-03-11 03:30:38.0
  • राकेश कुमार आर्य

मुझे मेरे एक मित्र भूटान के नरेश के विषय में बता रहे थे कि मैंने जब उनसे यह पूछा कि आपके यहां इतनी अशिक्षा क्यों है तो इस पर भूटान नरेश बोले-‘‘शिक्षित होते ही ये लोग हमारे विरूद्घ ही कमर कस लेंगे। सबसे पहली मांग इनकी होगी-राजशाही से मुक्ति या लोकतंत्र की स्थापना, इसलिए हम इन्हें अधिक नही पढ़ाते। दूसरी बात है कि पढ़ लिखकर लोग भूटान को छोडक़र भारत या अन्य दूसरे देशों में चले जाते हैं। इनके अशिक्षित रहने से ये अपने परंपरागत रोजगारों में लगे रहेंगे।’’

भूटान नरेश ने ये बातें स्वीकार कीं - यह तो अच्छी बात है पर भारत में बहुत से ‘नरेश’ ऐसे हैं जो अपनी इस प्रकार की सोच को या जनता के प्रति अपनी भावना को स्वीकार नही करते हैं, अन्यथा अधिकांश राजनीतिज्ञों की सोच यही रहती है कि गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा, बेरोजगारी ये सब बनी रहनी चाहिए। क्योंकि इन्हीं के ऊपर उनका ‘बिजनैस’ (राजनीति) चलता है, और ‘मोटी कमाई’ उन्हें होती है। अपने देश के लोगों की भूलने की प्रवृत्ति है। यहां के राजनीतिज्ञों ने जनता के लिए क्या-क्या कहा है और जनता ने उसे कितना याद रखा है, इसे देखकर आप भी सोचेंगे कि ‘‘हां! हम तो इसे भूल ही गये थे।’’

हर साख पे उल्लू बैठा है

तनिक सोचिए, राहुल गांधी के विषय में। ये वही राहुल गांधी हैं जिन्होंने एक बार कहा था कि ‘‘गरीबी एक सोच है, मानसिक बीमारी है।’’ आज यही राहुल गांधी सत्ता से दूर होकर गरीबी का सच समझ गये हैं। उन्हें अब सत्ता के बिना ‘गरीबी’ का अहसास हो रहा है, और स्वयं एक बीमारी से ग्रस्त से लगते हैं। इन्हीं महोदय ने एक बार कहा था कि जो लोग मंदिर जाते हैं, वे ही लडक़ी छेड़ते हैं। बिना सोचे समझे बोलने के लिए प्रसिद्घ हो चुके राहुल स्वयं भी मंदिर जाते हैं। तब उनके विषय में क्या कहा जाए? इन्हीं राहुल गांधी का कहना रहा है कि यूपी के लोग भिखारी होते हैं, और पंजाब के 70 प्रतिशत लोग नशैड़ी होते हैं। अब इनकी पार्टी की विचारधारा पर आइये। इनकी पार्टी का मानना है कि रामायण एक कहानी है, राम कभी पैदा ही नही हुए थे और रामसेतु राम ने नही बनाया। जबकि राम और रामसेतु के विषय में अब तो विदेशियों की सोच में भी परिवर्तन आ रहा है। ‘नासा’ जैसे संगठन मान रहे हैं कि रामायण अपने आप में एक काल्पनिक ग्रंथ नही है और ना ही यह एकउपन्यास है। राहुल की पार्टी वेदों को ग्वालों के गीत मानती है, और इसलिए उन पर किसी प्रकार के अनुसंधान की आवश्यकता इनकी पार्टी ने कभी नही मानी। ‘ग्वालों के गीत’ वैसे भी व्यक्ति को आधुनिकता की दौड़ से पीछे करते हैं, इसलिए देश की अज्ञानी जनता जितना शीघ्र हो सके उतनी शीघ्रता से इन ‘ग्वालों के गीतों’ के जंजाल से बाहर निकाली जाए-यह सोच राहुल की कांग्रेस पार्टी की रही है।

राहुल की पार्टी के बड़े नेताओं की वाणी पर भी चर्चा करें। वैसे तो राहुल गांधी कांग्रेस की हांडी के वह चावल हैं, जिन्हें देखकर सारी हांडी के चावलों की जानकारी हमें हो जाती है, परंतु फिर भी कुछ नेताओं के वक्तव्यों को देखना उचित होगा। जिनसे यह पता चल सके कि हमारे राजनीतिज्ञों को कितना शिष्टाचार आता है? या उन्हें राजनीतिक आचार संहिता को अपनाने की और बोलने से पहले राजनीतिक शिष्टाचार को सीखने की कितनी आवश्यकता है? कांग्रेस के एक बड़े नेता रहे हैं-श्री प्रकाश जायसवाल। उनका मानना रहा है कि बीवी यदि पुरानी हो जाए तो मजा नही आता। कहने का अभिप्राय है कि मान्यवर वृद्घावस्था में भी ‘मजा’ ढूंढ़ रहे हैं। क्या सामाजिक आदर्श स्थापित करेंगे? ‘बड़े मियां सो बड़े मियां, छोटे मियां सुभान अल्लाह’ वाली बात पर काम करते हुए हरियाणा कांग्रेस के प्रवक्ता रहे धर्मवीर गोयत ने एक बार कहा था कि-‘‘90 प्रतिशत बलात्कार तो लडक़ी की मर्जी से होते हैं।’’ अब सोनिया गांधी महिला दिवस पर महिलाओं के अधिकार मांग रही थीं। शायद वह स्वयं भूल गयीं कि दो वर्ष पूर्व तुम्हारी अपनी सरकार थी। उस समय तुमने यह सब क्यों नही किया, जिसे आज मांग रही हो? दो साल में ही तुम्हारे अधिकार (अर्थात नारीशक्ति के) समाप्त हो गये। तुम्हारे अपने समय में तो यह कहा जा रहा था कि 90 प्रतिशत बलात्कार के मामले झूठे होते हैं। पता नही पिछले दो वर्ष में क्या हुआ है कि अचानक कांग्रेस को लगने लगा है कि बलात्कार के 99 प्रतिशत मामले सच्चे होते हैं? सोनिया जी! बात नही बनी। सोनिया गांधी की अपनी ही पार्टी की नेता रही रेणुका चौधरी ने एक बार कहा था-‘‘बलात्कार तो हर जगह होता है।’’ कहने का अभिप्राय था कि यह तो छोटी मोटी घटना है। इस पर कहां-कहां कार्यवाही करोगे? ऐसी सोच के कारण ही कांग्रेस के दिग्विजय ने एक लडक़ी को देखकर एक बार कह दिया था कि-‘‘क्या टंच माल है?’’ टंच माल के रसिक ने अपनी वास्तविकता का परिचय उस समय दे दिया था जब अपने ही कार्यालय में कार्यरत एक महिलाकर्मी से 68 वर्ष की अवस्था में विवाह कर लिया। हमारे नेता अक्सर अपने व्यक्तिगत जीवन की दुर्गंध को छिपाने के उद्देश्य से कहते मिलते हैं कि किसी के व्यक्तिगत जीवन में मत देखो। इस एक वाक्य से ही इनके ‘पाप’ सामने नही आते। अन्यथा सत्य तो यह है कि व्यक्तिगत विचार सार्वजनिक विचारों की और व्यक्तिगत जीवन सार्वजनिक जीवन की नींव होता है। इनके व्यक्तिगत विचार क्योंकि निम्न हैं, इसलिए इनके सार्वजनिक जीवन में भी उच्चता, भव्यता और दिव्यता नही है। अब देखिए कि कैसे हमारे नेता गैर जिम्मेदाराना बयान देकर अपनी बौखलाहट का प्रदर्शन करते हैं। कांग्रेस के ही अजीत पंवार ने एक बार कहा था कि-‘‘पीने के लिए पानी नही है तो क्या बांधों में पेशाब करके ला दूं।’’ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने एक बार कहा था कि हमारे पास कोई जादू की छड़ी नही है जिससे महंगाई पर काबू  किया जाए। वैसे उस समय (कांग्रेसी शासन में) महंगाई से लोगों का ध्यान बंटाने के उद्देश्य से कांग्रेस ने भांति-भांति के बहाने गढ़े थे। पी.चिदंबरम ने कहा था कि महंगाई अधिक इसलिए है कि लोग सोना अधिक खरीद रहे हैं। जबकि राजबब्बर ने तो देश में गरीबी का नामोनिशान तक नही माना था। उन्होंने कह दिया था कि पांच रूपये में गरीब को भरपेट भोजन मिल जाता है। उनकी बात का अभिप्राय यही था कि देश में गरीबी कहां है, कभी तो नही। इसीलिए राहुल गांधी की सोच बनी कि गरीबी तो केवल एक बहम है।

अब आइए हिंदुओं के बारे में अपने नेताओं के विचारों पर। कांग्रेस के सुशील शिंदे ने कहा था कि पाकिस्तान के हिंदुओं को यह सिद्घ करना पड़ेगा कि उनके ऊपर पाकिस्तान में अत्याचार हो रहे हैं। इसका अर्थ हुआ कि पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग और वैश्विक संगठनों के उन आंकड़ों को शिंदे मानने को तैयार नही थे जिनके अनुसार पाकिस्तान में हिन्दुओं की जनसंख्या तेजी से घटती जा रही है और वहां पर हिंदुओं पर कठोर अत्याचार होते रहते हैं। कांग्रेस के दिग्विजयसिंह का मानना था कि भारत को आरएसएस से अधिक खतरा है ना कि इस्लामिक आतंकवाद से। जबकि सारा विश्व इस समय इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रहा है। कांग्रेस के ही मणीशंकर अय्यर का कहना था कि भगवा और तिलक को देखकर गुस्सा आता है। इसीलिए मनमोहनसिंह ने भी कह दिया था कि देश के आर्थिक संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है। उन्हीं का अनुकरण करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कह दिया था कि केवल मुस्लिम लड़कियां ही हमारी बेटियां हैं। जबकि राहुल गांधी की मान्यता रही है कि इस देश को हिंदुओं से अधिक खतरा है। कुल मिलाकर एक ही बात बार-बार जिह्वा पर आती है कि कैसे बचेगा यह देश?’ हर साख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?

राकेश कुमार आर्य ( 1586 )

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