सपने

  • 2014-10-01 09:22:24.0
  • उगता भारत ब्यूरो

सपनों की दुनिया भी अजीब, सपने, सपने ही होते हैं।
वास्तविकता से अलग हें, दुनिया की सैर कराते हैं।।

जहां बंधन से, निर्बाध बने, हम स्वच्छंद विचरण करते हैं।
जो बातें यहां असंभव हैं, सपने में सच हो जाती हैं।।

कुछ सपने सच भी होते हैं, ऐसा विश्लेषक कहते हैं।
नींद खुली, सब छूट गया, ये सपने रूला भी देते हैं।।

गांधीजी ने सपना देखा, भारत मां को आजाद किया।
अपना सब कुछ वार दिया, पूरा जीवन आदर्श जिया।।

गांधीजी के सपने ने ही सोये भारत को जगा दिया।
गांव-गांव और शहर-शहर जन जीवन को झकझोर दिया।।

पांव उखड़ गये उस सत्ता के जहां कहीं अंधेरा न जिया
शत-शत नमन, ऐसे सपने का, दुनिया को संदेश दिया।।
सुरेश चंद्र नागर

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