कुण्डली में होता है एक विष योग

  • 2016-08-30 03:30:29.0
  • मनोज शास्त्री

कुण्डली में होता है एक विष योग

ज्योतिषशास्त्र में शुभ योग है तो अशुभ योग भी है.शुभ योग अपने गुण के अनुसार शुभ फल देते हैं तो अशुभ योग अशुभ फल प्रदान करते हैं.अशुभ योगों में एक योग है विषयोग .यह किस प्रकार बनता है एवं इसका क्या प्रभाव होता है, आइये देखते हैं. विषयोग की स्थिति: कुण्डली में विषयोग (Visha yoga) का निर्माण शनि और चन्द्र की स्थिति (placement of Saturn and Moon) के आधार पर बनता है.शनि और चन्द्र की जब युति (conjunction of Saturn and Moon)होती है तब अशुभ विषयोग बनता है. लग्न में चन्द्र पर शनि की तीसरी,सातवीं अथवा दशवी दृष्टि (Saturn's 3rd, 7th or 10th aspect in Ascendant) होने पर यह योग बनता है.कर्क राशि में शनि पुष्य नक्षत्र में हो और चन्द्रमा मकर राशि में श्रवण नक्षत्र का हो और दोनों का परिवर्तन योग (alternative yoga) हो या फिर चन्द्र और शनि विपरीत स्थिति में हों और दोनों की एक दूसरे पर दृष्टि (inter -aspects of Saturn and Moon)हो तब विषयोग की स्थिति बनती है.सूर्य अष्टम भाव में(Sun in 8rth house), चन्द्र षष्टम (Moon in 6th house) में और शनि द्वादश (Saturn in 12th house) में होने पर भी इस योग का विचार किया जाता है. कुण्डली में आठवें स्थान पर राहु हो और शनि मेष, कर्क, सिंह या वृश्चिक लग्न में हो (Saturn in Aries, Cancer, Leo or Scorpio) तो विषयोग (Vishayoga) भोगना होता है. विषयोग में शनि चन्द्र की युति का फल: जिनकी कुण्डली में शनि और चन्द्र की युति प्रथम भाव (combination of Saturn and Moon in the 1st house) में होती है वह व्यक्ति विषयोग (Vishayoga) के प्रभाव से अक्सर बीमार रहता है.व्यक्ति के पारिवारिक जीवन में भी परेशानी आती रहती है.ये शंकालु और वहमी प्रकृति के होते हैं.जिस व्यक्ति की कुण्डली में द्वितीय भाव (vish yoga in 2nd house) में यह योग बनता है पैतृक सम्पत्ति से सुख नहीं मिलता है.कुटुम्बजनों के साथ इनके बहुत अच्छे सम्बन्ध नहीं रहते.गले के ऊपरी भागों में इन्हें परेशानी होती है.नौकरी एवं कारोबार में रूकावट और बाधाओं का सामना करना होता है. तृतीय स्थान (vish yoga in 3rd house)में विषयोग सहोदरो के लिए अशुभ होता है.इन्हें श्वास सम्बन्धी तकलीफ का सामना करना होता है.चतुर्थ भाव (4th house)का विषयोग माता के लिए कष्टकारी होता है.अगर यह योग किसी स्त्री की कुण्डली में हो तो स्तन सम्बन्धी रोग होने की संभावना रहती है.जहरीले कीड़े मकोड़ों का भय रहता है एवं गृह सुख में कमी आती है.पंचम भाव (vish yoga in 5th house) में यह संतान के लिए पीड़ादायक होता है.शिक्षा पर भी इस योग का विपरीत असर होता है.षष्टम भाव (6th house)में यह योग मातृ पक्ष से असहयोग का संकेत होता है.चोरी एवं गुप्त शत्रुओं का भय भी इस भाव में रहता है. सप्तम स्थान कुण्डली में विवाह एवं दाम्पत्य जीवन का घर होता है (7th house is the house of marriage and life partner). इस भाव मे विषयोग दाम्पत्य जीवन में उलझन और परेशानी खड़ा कर देता है.पति पत्नी में से कोई एक अधिकांशत: बीमार रहता है.ससुराल पक्ष से अच्छे सम्बन्ध नहीं रहते.साझेदारी में व्यवसाय एवं कारोबार नुकसान देता है.अष्टम भाव में चन्द्र और शनि की युति (combination of Saturn and Moon in 8th house) मृत्यु के समय कष्ट का सकेत माना जाता है.इस भाव में विषयोग होने पर दुर्घटना की संभावना बनी रहती है.नवम भाव (9th house) का विषयोग त्वचा सम्बन्धी रोग देता है.यह भाग्य में अवरोधक और कार्यों में असफलता दिलाता है.दशम भाव (10th house)में यह पिता के पक्ष से अनुकूल नहीं होता.सम्पत्ति सम्बन्धी विवाद करवाता है.नौकरी में परेशानी और अधिकारियों का भय रहता है.एकादश भाव (11th house) में अंतिम समय कष्टमय रहता है और संतान से सुख नहीं मिलता है.कामयाबी और सच्चे दोस्त से व्यक्ति वंचित रहता है.द्वादश भाव (12th house)में यह निराशा, बुरी आदतों का शिकार और विलासी एवं कामी बनाता है. विषयोग के उपाय: भगवान नीलकंठ महादेव की पूजा एवं महामृत्युजय मंत्र जप से विष योग में लाभ मिलता है. शनि देव एवं चन्द्रमा की पूजा भी कल्यणकारी होती है.

मनोज शास्त्री