उगता भारत पत्र है न्यारा...

  • 2016-08-03 11:15:31.0
  • विमलेश बंसल ‘आर्या’

उगता भारत पत्र है न्यारा...

उगता भारत पत्र है न्यारा, प्राणों से भी प्यारा है।

नियमित पाठक बनकर हमने, अपना भाग्य संवारा है।।

हर सप्ताह के अंतिम दिन में, इंतजार आने का रहता।

लेखों गीतों भजन प्रवचनों, का मानो दरिया है बहता।

विजेंद्र आर्य, राकेश भाई का, हृदय से आभारा है।।

उगता भारत पत्र है न्यारा, प्राणों से भी प्यारा है।

करे उन्नति दिन दूनी, लाखों पाठक इसके बन जाएं।

'उगता भारत' भारत के, फिर से सोने के दिन लौटाए।

आर्यावर्त बने फिर से, होवे भारत जय कारा है

उगता भारत पत्र है न्यारा, प्राणों से भी प्यारा है।

लाख बधाई आप सभी को, हृदय से बहुत शुभ कामनाऐं।

फले फूले नित उगता भारत, सबके दिल में जगह बनाये।

'विमल' वेद वाणी से पूरित, जगमग करे सवेरा है।।

उगता भारत पत्र है न्यारा, प्राणों से भी प्यारा है।