हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन

  • 2016-10-26 12:30:54.0
  • उगता भारत ब्यूरो

हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन

हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार क्षार
डमरू की वह प्रलयध्वनि हूं जिसमें नचता भीषण संहार
रणचंडी की अतृप्त प्यास मैं दुर्गा का उन्मत्त हास
मैं यम की प्रलयंकर पुकार जलते मरघट का धुँवाधार
फिर अंतरतम की ज्वाला से जगती में आग लगा दूं मैं
यदि धधक उठे जल थल अंबर जड़ चेतन तो कैसा विस्मय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
मैं आज पुरुष निर्भयता का वरदान लिये आया भूपर
पय पीकर सब मरते आए मैं अमर हुवा लो विष पीकर
अधरों की प्यास बुझाई है मैंने पीकर वह आग प्रखर
हो जाती दुनिया भस्मसात जिसको पल भर में ही छूकर
भय से व्याकुल फिर दुनिया ने प्रारंभ किया मेरा पूजन
मै नर नारायण नीलकण्ठ बन गया न इसमें कुछ संशय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
मैं तेज:पुन्ज तम लीन जगत में फैलाया मैंने प्रकाश
जगती का रच करके विनाश कब चाहा है निज का विकास
शरणागत की रक्षा की है मैंने अपना जीवन देकर
विश्वास नही यदि आता तो साक्षी है इतिहास अमर
यदि आज देहली के खण्डहर सदियों की निद्रा से जगकर
गुंजार उठे उनके स्वर से हिन्दु की जय तो क्या विस्मय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
दुनिया के वीराने पथ पर जब जब नर ने खाई ठोकर
दो आँसू शेष बचा पाया जब जब मानव सब कुछ खोकर
मैं आया तभी द्रवित होकर मैं आया ज्ञान दीप लेकर
भूला भटका मानव पथ पर चल निकला सोते से जगकर
पथ के आवर्तों से थककर जो बैठ गया आधे पथ पर
उस नर को राह दिखाना ही मेरा सदैव का दृढनिश्चय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
मैंने छाती का लहु पिला पाले विदेश के सुजित लाल
मुझको मानव में भेद नही मेरा अन्त:स्थल वर विशाल
जग से ठुकराए लोगों को लो मेरे घर का खुला द्वार
अपना सब कुछ हूं लुटा चुका पर अक्षय है धनागार
मेरा हीरा पाकर ज्योतित परकीयों का वह राज मुकुट
यदि इन चरणों पर झुक जाए कल वह किरिट तो क्या विस्मय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
मैं वीरपुत्र मेरी जननी के जगती में जौहर अपार
अकबर के पुत्रों से पूछो क्या याद उन्हें मीना बझार
क्या याद उन्हें चित्तौड़ दुर्ग में जलनेवाली आग प्रखर
जब हाय सहस्त्रों माताएं तिल तिल कर जल कर हो गईं अमर
वह बुझनेवाली आग नही रग रग में उसे समाए हूं
यदि कभी अचानक फूट पड़े विप्लव लेकर तो क्या विस्मय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
होकर स्वतन्त्र मैंने कब चाहा है कर लूं सब को गुलाम
मैंने तो सदा सिखाया है करना अपने मन को गुलाम
गोपाल राम के नामों पर कब मैंने अत्याचार किया
कब दुनिया को हिन्दु करने घर घर में नरसंहार किया
कोई बतलाए काबुल में जाकर कितनी मस्जिद तोड़ी
भूभाग नहीं शत शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
मै एक बिन्दु परिपूर्ण सिन्धु है यह मेरा हिन्दु समाज
मेरा इसका संबन्ध अमर मैं व्यक्ति और यह है समाज
इससे मैंने पाया तन मन इससे मैंने पाया जीवन
मेरा तो बस कर्तव्य यही कर दूं सब कुछ इसके अर्पण
मैं तो समाज की थाती हूं मैं तो समाज का हूं सेवक
मैं तो समष्टि के लिए व्यष्टि का कर सकता बलिदान अभय
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय !!
अटल बिहारी वाजपेयी