आओ करें शुभ संध्या

  • 2016-10-03 05:00:12.0
  • विमलेश बंसल ‘आर्या’

आओ करें शुभ संध्या

ओ३म् नमस्ते जी?
तेरी महती दया कृपा में,
हे प्रभु नर तन सफल बनाऊँ।
चलूँ स्वस्ति के मार्ग पर अनथक,
आतप से न कभी घबराऊँ।
मुझको दो वर विमल पिता हे,
सुख में तुमको भूल न जाऊँ।
तू ही तू हर कर्म में दीखे,
तेरे ध्यान में मैं खो जाऊँ।
शुभ संध्या आओ करें वैदिक संध्या।

क्या किसी से मिलते वक़्त हाथ जोडक़र मुस्कराते हुए, नमस्तेजी बोलते हैं क्या आप दोनों वक़्त संध्या करते हैं क्या आपका सबके साथ प्रेमपूर्ण मधुर व्यवहार है? क्या आप अपने बच्चों को आर्यसमाज ले जाते हो? क्या आप सडक़ पर पड़े केले आदि के छिलके हटाकर दूर करते हो? क्या आप नित्य मातापिता की सेवा शुश्रूषा करते हो? क्या आप दुकान या ओफ्फिस में पूर्ण ईमानदारी बरतते हो? क्या आप अपने भाइयों व रिश्तेदारों को इज्जत देते हो? क्या पंचयज्ञों का नित्य पालन हो रहा है? क्या आप उपरोक्त बातें पढ़ कर पालन कर रहे हो यदि हाँ तो आप उत्तम कोटि के आर्य हो।