अभिनंदनीय व्यक्तित्व के धनी आर्यपुत्र बाबा रामदेव

  • 2017-09-30 13:30:09.0
  • रविकांत सिंह

अभिनंदनीय व्यक्तित्व के धनी आर्यपुत्र बाबा रामदेव

भारत प्राचीन काल से योगगुरू रहा है। इसके 'योग' में जीवन व्यवस्था है, जिसे अपनाकर व्यक्ति निरोग रह सकता है और शोकमुक्त हो सकता है। हमारे ऋषि पतंजलि ने प्राचीनकाल में हमें योगदर्शन दिया। जिसे अपनाकर भारत ने दीर्घकाल तक योग के क्षेत्र में संसार का मार्गदर्शन किया।
वर्तमान में ऋषि पतंजलि के ऋषि योग को विश्व के लगभग दो सौ देशों तक पहुंचाने का प्रशंसनीय कार्य किया है बाबा रामदेव ने। इनका वास्तविक नाम रामकृष्ण यादव है। बाबा रामदेव ने योगासन व प्राणायाम योग के क्षेत्र में योगदान दिया है। बाबा रामदेव की यह अनोखी विशेषता रही है कि स्वयं जगह-जगह जाकर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं, जिनमें प्राय: हर सम्प्रदाय के लोग आते हैं। रामदेव अब तक देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योग सिखा चुके हैं।
बाबा रामदेव का जन्म 26 दिसम्बर 1965 को सैयद अलीपुर, कस्बा-नांगल चौधरी, जिला-महेन्द्रगढ़, हरियाणा, में हुआ। उन्होंने गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की। इस विद्यालय से ही उन्हें योग की दिशा में विशेष कार्य करने की प्रेरणा मिली।
बाबा रामदेव की माता का नाम गुलाबो देवी एवं पिता का नाम रामनिवास यादव है। समीपवर्ती गाँव शहजादपुर के सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बलदेव जी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली। योग गुरु बाबा रामदेव ने युवावस्था में ही संन्यास लेने का संकल्प किया और रामकृष्ण, बाबा रामदेव के नये रूप में लोकप्रिय हो गए।
सार्वजनिक जीवन में प्रवेश
बाबा रामदेव मे 1995 में 'दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट' की स्थापना की। 2003 से आस्था टीवी के माध्यम से वह नित्यप्रति प्रात:काल में लोगों को योग कार्यक्रम दिखाते हैं, जिसने देश में योगक्रांति फैलाने में बड़ी भारी सहायता दी है। इसी टीवी चैनल के माध्यम से आज करोड़ों लोग स्वामी रामदेव जी के योग कार्यक्रम के साथ जुड़ चुके हैं।
योग को जन-जन तक पहुँचाने में बाबा रामदेव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, भारत और विदेशों में उनके योग शिविरों में आम लोगों सहित कई बड़ी-बड़ी हस्तियां भी भाग ले चुकी हैं।
बाबा रामदेव से योग सीखने वालों में अभिनेता अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का नाम उल्लेखनीय है।
बाबा रामदेव ने पहली बार देवबंद (उत्तर प्रदेश) में मुस्लिम समुदाय को संबोधित किया। जिसका मुस्लिम समाज पर भी अच्छा प्रभाव पड़ा। बाबा रामदेव किसी संप्रदाय के विरोध की बात नहीं करते। उनकी सबसे बड़ी और सराहनीय बात यह है कि वह अपनी भारतीय संस्कृति की अच्छाई और सच्चाई को लोगों के सामने लाने का प्रयास करते हैं। साथ ही लोगों को स्वदेशी अपनाने की प्रेरणा देते हैं। उनके स्वदेशी आंदोलन को भी लोगों ने सर आंखों पर लिया है और उसे अपनाकर विदेशी कंपनियों के उत्पादनों को देश में अपनाने से मना किया है। इतनी बड़ी सफलता अब से पहले देश के किसी भी सामाजिक व्यक्तित्व को नहीं मिली, जितनी बड़ी सफलता बाबा रामदेव प्राप्त कर चुके हैं।
योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ की स्थापना की। ब्रिटेन, अमेरिका, नेपाल, कनाडा और मारीशस में भी पतंजलि योगपीठ की दो शाखाएँ हैं-पतंजलि योगपीठ-एक और पतंजलि योग पीठ-दो। पतंजलि आयुर्वेद का 2015-16 में 5000 करोड़ रु का कारोबार हुआ। जबकि 2016-17 में यह कारोबार बढ़ता दस हजार करोड़ हो गया है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि देश के लोग बाबा रामदेव के उत्पादों में कितना विश्वास रखते हैं? बाबा रामदेव के उत्पादों से लोगों को आशातीत लाभ मिल रहा है।
हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट
स्वामी रामदेव ने सन् 2006 में महर्षि दयानन्द ग्राम हरिद्वार में 'पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट' के अतिरिक्त अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई 'पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड' नाम से दो सेवा प्रकल्प स्थापित किये। इन सेवा-प्रकल्पों के माध्यम से स्वामी रामदेव योग, प्राणायाम, अध्यात्म आदि के साथ-साथ वैदिक शिक्षा व आयुर्वेद का भी प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उनके द्वारा किये जाने वाले कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में देश विदेश से लोग भाग लेते हैं।
बाबा रामदेव के उनके प्रवचन विभिन्न टी0 वी0 चैनलों जैसे आस्था टीवी, आस्था इण्टरनेशनल, जी-नेटवर्क, सहारा-वन तथा इण्डिया टी0वी0 पर प्रसारित होते हैं। भारत में भ्रष्टाचार और इटली एवं स्विट्जऱलैण्ड के बैंकों में जमा लगभग 400 लाख करोड़ रुपये के 'काले धन' को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए बाबा ने पूरे भारत की एक लाख किलोमीटर की यात्रा भी की। भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव जी अनवरत लड़ाई जारी है और राष्ट्र निर्माण में भी वो प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं ।
भ्रष्टाचार वास्तव में हमारी भौतिकवादी जीवनशैली का एक आवश्यक अंग बन चुका है। इसमें व्यक्ति बेतहाशा दौड़-दौडक़र मर जाता है। यह पैसे की दौड़ है जिसमें भौतिक साधनों की पूर्ति कभी नहीं हो सकती। इसका एक ही उपाय है कि व्यक्ति को आत्मिक और मानसिक शांति प्राप्त हो, और यह केवल योग से ही संभव है। क्योंकि योग चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम है। जब तक चित्त की वृत्ति शांत नही होंगी, तब तक हम भौतिकवादी संसार में पूर्णत: भ्रष्टाचारमुक्त नहीं हो सकते। सरकार के कानून चाहे कितने ही कठोर हो जाएं, लेकिन वे व्यक्ति की चित्त की वृत्तियों को शांत नहीं कर सकते। इसलिए सरकारी कानून कभी भी मानव समाज में और मानव के मन मस्तिष्क में आत्मिक और मानसिक शांति स्थापित करने में भी सफल नही हो सकते। बस बाबा रामदेव की सबसे बड़ी सफलता का रहस्य यही है कि वह व्यक्ति को भीतर से सुधारकर उसे आत्मिक और मानसिक रूप से स्वस्थ कर देना चाहते हैं। जितने-जितने अनुपात में लोगों को अपने भीतर आत्मिक और मानसिक शांति का अनुभव हो रहा है उतने-उतने अनुपात में ही भारत भ्रष्टाचार मुक्त होता जा रहा है। इस क्षेत्र में बाबा रामदेव की सफलता की जितनी सराहना की जाए उतनी ही कम है। इसके अलावा स्वामी रामदेव ने 'स्वच्छ भारत अभियान' में भी भाग लिया। 'स्वच्छ भारत अभियान' के अंतर्गत बाबा रामदेव मनुष्य मात्र को भीतर से स्वच्छ और स्वस्थ कर देने पर बल दे रहे हैं, और यही स्वच्छ भारत अभियान की सफलता के लिए आवश्यक भी है। इतना ही नहीं उन्होंने इस अभियान के तहत हरिद्वार और तीर्थ नगरी ऋ षिकेश को गोद लेने की घोषणा की।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन
बाबा रामदेव ने जब 27 फऱवरी 2011 को रामलीला मैदान में जनसभा की थी-उस जनसभा में स्वामी अग्निवेश के साथ-साथ अन्ना हजारे भी पहुँचे थे। इसके बाद दिल्ली के जन्तर मन्तर पर 5 अप्रैल 2011 से अन्ना हजारे सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन की घोषणा की जिसमें एक दिन के लिये बाबा रामदेव भी शामिल हुए। बाबा रामदेव ने 4 जून 2011 से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के साथ सत्याग्रह की घोषणा कर दी। 4 जून 2011 को प्रात: सात बजे सत्याग्रह प्रारम्भ हुआ। रात को बाबा रामदेव पांडल में बने विशालकाय मंच पर अपने सहयोगियों के साथ सो रहे थे, चीख-पुकार सुनकर वे मंच से नीचे कूद पड़े और भीड़ में घुस गये। 5 जून 2011 को सुबह 10 बजे तक बाबा को लेकर अफ़वाहों का बाजार गर्म रहा। यह सिलसिला दोपहर तब जाकर रुका जब बाबा ने हरिद्वार पहुँचने के बाद पतंजलि योगपीठ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने बच कर निकलने की पूरी कहानी सुनाई। उस समय की कांग्रेस सरकार का यह सबसे अधिक निंदनीय कृत्य था। वास्तव में यह हमला बाबा रामदेव पर न होकर भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारत के स्वदेशी आंदोलन पर किया गया हमला था, जो कि तत्कालीन मनमोहन सरकार की असहिष्णुता का जीता जागता प्रमाण था। जिसे बाबा रामदेव ने सहन किया और अपने आगे के कार्यक्रम की घोषणा की। वह मनमोहन सरकार की असहिष्णुता की नीति के सामने झुके नहीं, और अपना आंदोलन निरंतर चलाते रहे।
योग शिविरों का आयोजन
बाबा रामदेव समय-समय पर योग शिविरों का आयोजन करते रहते हैं। अपने योग शिविरों के माध्यम से बाबा रामदेव भारतीय संस्कृति और योग के महत्व को विदेशों में भी जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। अपने इसी क्रम को आगे बढ़ते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर भारतीय संस्कृति का और योग का प्रचार-प्रसार किया, जिससे वहाँ पर भी लोग उनसे काफी प्रभावित हुए। बाबा रामदेव का एक संकल्प है की पूरा देश स्वस्थ हो और पूरे देश को स्वस्थ बनाने की कड़ी में बाबा रामदेव ने अब सेना के जवानों को भी योग सिखना शुरू किया है। जिसकी शुरुआत उन्होंने जैसलमेर में जवानों को योग सिखाने से की। इसके अलावा बाबा रामदेव ने दिल्ली में भी सैनिक और उनके परिवारजनों के लिए योग शिविर का आयोजन किया।
बेरहामपुर विश्वविद्यालय द्वारा स्वामीजी को डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि प्रदान की गई।
'इंडिया टुडे' पत्रिका द्वारा लगातार दो वर्षों से तथा देश की अन्य शीर्ष पत्रिकाओं द्वारा रामदेव को देश के सबसे ऊँचे, असरदार व शक्तिशाली 50 प्रभावशाली लोगों की सूची में सम्मिलित किया गया।
एसोचैम द्वारा स्वामीजी को 'ग्लोबल नॉलेज मिलेनियम' ऑनर सहित देश-विदेश की अनेक संस्थाओं व सरकारों ने भी प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किये हैं।
राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति, आन्ध्रप्रदेश द्वारा स्वामीजी को 'महामहोपाध्याय' की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय द्वारा योग गुरु बाबा रामदेव जी को 'ऑनरेरी डॉक्ट्रेट' प्रदान की गयी।
एमिटी यूनीवर्सिटी, नोएडा ने मार्च, 2010 में 'डी0एससी0' (ऑनर्स) प्रदान की।
डी0वाई0पाटिल यूनीवर्सिटी द्वारा अप्रैल 2010 में इन्हे डी0एससी0(ऑनर्स) इन योगा की उपाधि दी गयी। बाबा रामदेव को जनवरी 2011 में महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायण द्वारा चन्द्रशेखरानन्द सरस्वती अवार्ड प्रदान किया गया।
हम बाबा रामदेव के कार्यों का अभिनंदन करते हैं, जिनके कारण भारत की संस्कृति का आज सारे विश्व में डंका बज रहा है, और भारत 'विश्वगुरू' बनने की ओर अग्रसर है। भारत का संविधान भारत को 'विश्वगुरू' बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक का आवाह्न करता है। इस प्रकार भारत के संविधान के इस आवाह्न को सुन व समझकर बाबा रामदेव ने मानो संविधान की आत्मा को ही सम्मानित करा दिया है। सचमुच ऐसे सपूत धरती पर यदा-कदा ही आते हैं, जिनके आने से ये धरती धन्य हो जाती है। भारतमाता पुन: धन्य हो गयी है-बाबा रामदेव को पाकर। वह आर्यपुत्र हैं और आर्य संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए कृतसंकल्प हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हम बाबा रामदेव का इन्हीं शब्दों के साथ अभिनंदन करते हैं।