हिन्दू-विरोधी संविधान को बदला जाए

  • 2016-10-01 14:30:15.0
  • दिनेश चंद त्यागी

हिन्दू-विरोधी संविधान को बदला जाए

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14-16 में राज्य किसी से धर्म, लिंग, जन्म, स्थान आदि किसी भी आधार पर भेदभाव नही करेगा और साथ ही राज्य किसी भी व्यक्ति को किसी भी आधार पर विशेष अधिकार भी नही देगा।

किंतु अनुच्छेद 29-30 में नागरिकों (अल्पसंख्यकों) को क्षेत्रीयता, भाषायी और सांस्कृतिक आधार पर विशेष अधिकार दिये गये हैं जो संविधान की समतावादी नीति के स्पष्ट विरोधी हैं। इतना ही नही, अनुच्छेद 331, 333, 336 में आंग्ल भारतीय समुदाय को लोकसभा और विधानसभा में नामांकित करने और नौकरियां देने का प्रावधान है जो स्पष्टत: समान अधिकारों का उल्लंघन है। सत्यता तो यह है कि भारत को दस बनाने वाले अंग्रेजों के प्रतिनिधियों को स्वतंत्र भारत की लोकसभा व विधानसभाओं में नामांकित करना स्वतंत्रता संग्राम का उपहास करना है। इस मानसिक दासता को अविलंब तिलांजलि दी जानी चाहिए।

अनुच्छेद 25 (1) के विषय में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री ए.एन. रे ने मध्य प्रदेश व उड़ीसा के धर्म स्वातंत्रय अधिनियमों (1968) के विषय में कहा कि अनुच्छेद 25 (1) किसी दूसरे को अपने धर्म परिवर्तित करने का अधिकार नही देता और यह अनुच्छेद अंतरात्मा की स्वतंत्रता की गारंटी प्रत्येक नागरिक को देता है। किंतु विदेशी ईसाई मिशनरियों द्वारा इस नियम का उल्लंघन करके लाखों हिंदुओं को ईसाई बनाया गया और नागालैंड, मिजोरम, मेघालय तीन प्रदेश बहुल राज्य बन गये जहां आये दिन भारतीय सैनिकों की हत्याएं की जा रही हैं।
जहां मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं उन्हें सुविधा दी जाती है, जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं वहां उन्हें विस्थापित कर दिया जाता है।

धार्मिक अल्पसंख्यकों को सुविधा देने के लिए संपूर्ण देश को एक इकाई माना गया है जबकि भाषाई अल्पसंख्यकों की सुविधा के लिए प्रदेश को इकाई माना गया है। परिणामत: जम्मू कश्मीर में जहां हिंदू अल्पगत में है वहां कश्मीर घाटी से 5 लाख हिन्दुओं को लूटपाट कर विस्थापित बना दिया गया किंतु वहां हिंदुओं को अल्पसंख्यक नही माना गया और उन्हें वे सुविधाएं नही दी गयीं जो ंिहन्दू बहुल प्रांतों में मुसलमानों को दी जाती हैं।

केरल में नम्बूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार ने मुस्लिम बहुल जिला मल्लापुरम बनाया, कांग्रेस की करूणाकरन सरकार ने कसरगोड बनाया, कांग्रेस की करूणाकरन सरकार ने कसरगोड जिला मुस्लिम जिला घोषित किया। जयललिता की सरकार ने तमिलनाडु में कायदेमिल्लत जिला मुस्लिम जिला घोषित किया। इस आधार पर देश के हिन्दू बहुल जिलों में प्रत्येक को हिंदू जिला घोषित किया जाना चाहिए और वहां हिन्ंदुओं को वहन्ी सुविधा और अधिकार मिलने चाहिए जो मुस्लिम जिलों में मुसलमानों को दिये गये हैं।

ईसाई राज्य, मुस्लिम राज्य बनाम हिन्दू राज्य
नागालैंड, मिजोरम और मेघालय में ईसाई बहुलता के कारण ईसाइयों को तथा जम्मू कश्मीर में मुस्लिम बहुलता के कारण मुसलमानों को धारा 371 तथा 370 के द्वारा जो विशेष अधिकार दिये गये हैं क्या वे हिन्दूबहुल राज्यों को भी दिये जा सकते हैं? धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदारों को यह अधिकार हिन्दुओं को भी देने चाहिए अन्यथा धारा 370 जैसी धाराएं समाप्त की जानी चाहिए।
देश के 41 मुस्लिम प्रभावित जिलों के 331 ब्लॉकों में मुसलमानों को विशेष सुविधाएं दी गयीं जबकि उनसे भी अधिक निर्धन हिंदुओं की सर्वथा उपेक्षा की गयी।

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने 11 मई 1983 को अल्पसंख्यकाकें को नौकरी व ब्याजमुक्त ऋण देने हेतु 15 सूत्री कार्यक्रम घोषित किया जो अब तक जारी है जबकि हिन्दुओं के लिए केवल एक सूत्री योजना सरकार के पास है उन्हें अपने ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर अहिंदू बनने के लिए विवश करना, हिंदुओं की नसबंदी करके उनकी जनसंख्या घटाना और अहिंदुओं की जनसंख्या बढ़ाने के लिए 4 पत्नियां रखने का अधिकार देना।

अल्पसंख्यक आयोग श्री मोरारजी देसाई भाई ने 1977 में गठित किया। क्या बहुसंख्यक आयोग भी गठित किया जा सकता है? यदि नहन्ी तो क्यों न मानव अधिकार आयोग बनाया जाए? इस प्रकार वर्ग विशेष के लिए आयोग बनाना ईष्र्या व घूणा को जन्म देता है। यह अत्यंत खेद का विषय है कि मोरारजी सरकार के इस काम को अटलजी व आडवाड़ी जी का पूर्ण सहयोग प्राप्त था।
हमारी धर्मनिरपेक्षता सरकार जहां हिंदुओं को अपने बालकों को धार्मिक शिक्षा की अनुमति नही देती वही दूसरी ओर इस्लामी मदरसों को खुला अनुदान देती है। अर्जुन सिंह ने 1994 में 25 लाख रूपये, माधवराव सिंधिया ने 1994 में 4 करोड़ रूपये इन मदरसों को शिक्षा मंत्रालय से अनुदान दिया। सन 1946 तक भारत में 206 इस्लामी मदरसे थे जो कि 1994 में इकतीस हजार हो गये।
भारत से 1993, 1994, 1995 में क्रमश: 20 हजार, 25 हजार, 31 हजार हज यात्री गये और 1996 में यह संख्या 56 हजार स्वीकृत हो गयी जिसके लिए 30 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया। 1995 में यह राशि 17.5 करोड़ थी।

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की हज समिति को प्रतिवर्ष 30 लाख रूपये अनुदान देती है। कल्याणसिंह की हिंदूवादी सरकार ने हज यात्रियों के बालकों को 150 रूपये 450 रूपये तक छात्रवृत्ति देना घोषित किया और मायावती सरकार ने सभी मुस्लिम छात्रों को क्रमश: 10 तथा 20 रूपये मासिक छात्रवृत्ति देना घोषित किया। कल्याणसिंह सरकार ने किसी हज यात्री के मृत हो जाने पर उसके परिवार वालों को 1 लाख रूपये का अनुदान घोषित किया। अमरनाथ या बद्रीनाथ यात्रा में मरने वाले हिंदू तीर्थ यात्रियों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था किसी ने नही की।
13 मई 1993 को इमामों के प्रतिनिधियों को श्री नरसिम्हाराव ने सरकारी कोष से वेतन देने का आश्वासन दिया जो अब पूरा कर दिया गया। पुजारियों के बारे में ऐसी कोई व्यवस्था तैयार नही की गयी।

घुसपैठ समस्या
अवैध विदेशी मुसलमानों घुसपैठियों को लगभग दो करोड़ की संख्या में विभिन्न प्रदेशों में बसाकर उन्हें यहां का नागरिक बनाया जा रहा है जबकि बंगलादेश के उत्पीडि़त चकमा बौद्घ हिंदुओं को त्रिपुरा व अरूणाचल की सरकारें धक्का देकर बंगलादेश वापिस भेजने में पुलिस व सेना का सहारा ले रही है।
घुसपैठ से प्रभावित क्षेत्रों में विधानसभा व लोकसभा क्षेत्रों को योजनाबद्घ ढंग से मुस्लिम बहुल बनाया जा रहा है।

हिन्दू जनसंख्या का हृास
उपरोक्त कारणों से स्पष्ट है कि हिंदुओं की जनसंख्या लगातार घट रही है और मुसलमान व ईसाई जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है। 1991 की जनसंख्या के अनुसार हिंदू वृद्घि 23.71 प्रतिशत हुई और मुसलमानों की वृद्घि 32.76 प्रतिशत हुई।

चेतावनी
इस प्रदेश को अहिन्दू देश बनाने के षडय़ंत्र किये जा रहे हैं। अखिल भारतीय हिंदू महासभा भारतवर्ष को ंिहन्दू देश बनाये रखने के लिए कृतसंकल्प है। सभी राष्ट्रवादी शक्तियों से हमारा आग्रह है कि इस पुनीत कार्य में आगे बढक़र देश-धर्म की रक्षा का संकल्प लें।