जानिए भारतीय पैनल कोड में धाराओ का मतलब

  • 2016-08-11 12:30:06.0
  • सौरभ सिंह आर्य

जानिए भारतीय पैनल कोड में धाराओ का मतलब

धारा 307 = हत्या की कोशिश
धारा 302 =हत्या का दंड
धारा 376 = बलात्कार
धारा 395 = डकैती
धारा 377= अप्राकृतिक कृत्य
धारा 396= डकैती के दौरान हत्या
धारा 120= षडयंत्र रचना
धारा 365= अपहरण
धारा 201= सबूत मिटाना
धारा 34= सामान आशय
धारा 412= छीनाझपटी
धारा 378= चोरी
धारा 141=विधिविरुद्ध जमाव
धारा 191= मिथ्यासाक्ष्य देना
धारा 300= हत्या करना
धारा 309= आत्महत्या की कोशिश
धारा 310= ठगी करना
धारा 312= गर्भपात करना
धारा 351= हमला करना
धारा 354= स्त्री लज्जाभंग
धारा 362= अपहरण
धारा 415= छल करना
धारा 445= गृहभेदंन
धारा 494= पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह
धारा 499= मानहानि
धारा 511= आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।
या
भारतीय दंड संहिता
या
भारतीय दंड विधान
या
(I. P. C)
♦ प्रस्तावना ♦
धारा – 1 =संहिता का नाम और विस्तार।
♦ साधारण स्पष्टीकरण ♦
धारा – 21= लोक सेवक।
धारा – 34 सामान आशय।
धारा – 52 = सद् भावपूर्ण।
धारा – 52. क = संश्रय।
♦ साधारण अपवाद ♦
धारा – 76 तथ्य की भूल के कारण अपराध (विधि द्वारा आबद्ध )।
धारा – 79 = तथ्य की भूल के कारण अपराध (विधि द्वारा न्यायनुमतः)।
धारा – 81 =यदि बड़ी हानि रोकने के लिए छोटी हानि करना अपराध नही।
धारा – 82 = 7 वर्ष से कम शिशु का अपराध नही।
धारा – 83 = 7-12 वर्ष के बीच अपराध नही (यदि अपरिपक्व हो)।
धारा – 84 = पागल द्वारा अपराध नही है।
धारा – 85 =मद्यपान में अपराध नही (इच्छा के विरुद्ध मद्यपान )।
धारा – 86 = मद्यपान में अपराध (इच्छा से, बिना ज्ञान के )।
♦ प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार ♦
धारा – 96 = आत्मरक्षा में अपराध नही है।
धारा – 97 = अपना व दूसरे के शरीर, चोरी, लूट व रिष्टी में आत्मरक्षा का अधिकार।
धारा – 98 = पागल व बच्चों के हमले पर आत्मरक्षा का अधिकार।
धारा – 99 = आत्मरक्षा के अधिकार के बन्धन।
धारा – 100 = आत्मरक्षा में मृत्यु कारित करना (1. मृत्यु होने की आशंका हो। 2. गम्भीर चोट की आशंका हो 3. बलात्कार के हमले पर 4. प्रकृति के विरुद्ध काम – तृष्णा करने पर 5.व्यपहरन में 6. कहीं पर बंद हो और वहा से छूटने के लिए 7. अम्लीय हमले पर)।
धारा – 101 = आत्मरक्षा में मृत्यु से भिन्न कोई चोट मारने का अधिकार।
धारा – 102 = आत्मरक्षा का अधिकार का प्रारंभ और बना रहना।
धारा – 103 = सम्पति की प्रतिरक्षा में मृत्युकारित करने का अधिकार (1.रात्री ग्रह भेदन 2. मानव के रहने वाले जगह पर रिष्टी (आग लगाना) 3. ग्रह-अतिचार में)।
धारा – 104 = आत्मरक्षा में मृत्यु से भिन्न कोई चोट पहुंचाने का अधिकार (सम्पत्ति के लिए )।
धारा – 106 = आत्मरक्षा में निर्दोष व्यक्ति को हानि पहुचाने का अधिकार।
♦ आपराधिक षडयंत्र ♦
धारा – 120.क = आपराधिक षड़यंत्र की परिभाषा (दो या दो से अधिक लोग रचे)।
धारा – 120.ख = आपराधिक षड्यंत्र का दण्ड।
♦ सरकार के विरुद्ध अपराध ♦
धारा – 121 = सरकार के विरुद्ध युध्द, प्रयत्न, दुष्प्रेरण करना।
धारा – 121.क = धारा – 121 का षड़यंत्र करना।
धारा – 122 = सरकार के विरुद्ध करने के आशय से युद्ध के सामान इकठ्ठा करना।
धारा – 123 = युध्द की होने वाली घटना को सफल बनाने के आशय से छिपाना।
धारा – 124 = किसी विधिपूर्वक शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश या प्रयोग करने या अवरोध करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला।
धारा – 124.क = राजद्रोह।
♦ लोक अशांति के अपराध ♦
धारा – 141 = विधि विरुद्ध जमाव (पाँच या ज्यादा )।
धारा – 142 = विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना।
धारा – 143 = दण्ड।
धारा – 144 = घातक हत्यार लेकर जमाव में सम्मिलित होना।
धारा – 149 = विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना (सामान उद्देश्य हो)।
धारा – 151 = पाँच या से अधिक लोगों को बिखर जाने का आदेश देने के बाद भी बना रहना।
धारा – 153 = किसी धर्म, वर्ग, भाषा, स्थान, या समूह के आधार पर सौहार्द बिगाड़ने का कार्य करना।
धारा – 159 = दंगा (दो या अधिक लोग लड़कर लोक शान्ति में विध्न डाले)।
धारा – 160 = दगें का दण्ड।
♦ लोक सेवकों के अपराध ♦
धारा – 166 = लोक सेवक सरकारी काम न करें किसी को नुकसान पहुंचाने के आशय से।
धारा – 166.क = कोई लोक जानते हुए सरकारी कार्य की अपेक्षा करना।
धारा – 166.ख = किसी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में पीड़ित का उपचार न करना (अपराधी केवल संस्थान का मुख्य होगा)।
धारा – 177 = जो कोई किसी लोक सेवक को ऐसे लोक सेवक को जो आबद्ध होते झूठी सूचना दे।