कुमकुम और सिंदूर सिर्फ सुहाग की निशानी नही, इनके भी हैं कुछ वैज्ञानिक कारण

  • 2016-09-15 11:00:35.0
  • अजय आर्य

कुमकुम और सिंदूर सिर्फ सुहाग की निशानी नही, इनके भी हैं कुछ वैज्ञानिक कारण

हिन्दू धर्म में सोलह श्रृंगार का बहुत महत्व है। सुहागन महिलाओं के लिये ये श्रृंगार जरूरी माने गये हैं। लड़कियों के जीवन में विवाह के बाद बहुत कुछ बदल जाता है उनका घर, परिवार, रहने का तरीका, काम करने का तरीका और भी बहुत कुछ। शादी के बाद उनके जीवन शामिल हो जाते हैं ये सोलह श्रृंगार धार्मिक तर्काे के अनुसार पति की लंबी उम्र और सुखमय वैवाहिकजीवन के लिये महिलाओं का श्रृंगार करना जरूरी बताया गया है। आज हम आपको बताते हैं किइन धार्मिक परंपराओं के पीछे कौन से वैज्ञानिककारण हैं।


कुमकुम: कुमकुम भौहों के बीच में लगाया जाता है। यह बिंदु अज्ना चक्र कहलाता है। सोचिए जब भी आपको गुस्सा आता है तो तनाव की लकीरें भौहों के बीच सिमटी हुई नजर आती हैं। इस बिंदु पर कुमकुम लगाने से शांति मिलती है और दिमाग ठंडा रहता है। यह बिंदु भगवान शिव से जुड़ा होता है।

सिंदूर लगाना: सिर के बीचोंबीच मांग में सिंदूर इसलिये लगाया जाता है क्योंकि इस बिंदु को महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है। सिंदूर लगाने से दिमाग हमेशा सतर्क और सक्रिय रहता है। दरअसल, सिंदूर में मरकरी होता है जो अकेली ऐसी धातु है जो लिक्विड रूप में पाई जाती है। इससे शीतलता मिलती है और दिमाग तनावमुक्त रहता है। सिंदूर शादी के बाद लगाया जाता है क्योंकि ये रक्त संचार के साथ ही यौन क्षमताओं को भी बढ़ाने का भी काम करता है।

कांच की चूडिय़ां: सुहागनों के लिये कांच की चूडियां पहनना शुभ माना जाता है। कांच की चूडिय़ों की खनक से घर में बहू की मौजूदगी का अहसास होता है। इसके पीछे वैज्ञानिकों का कहना है कि कांच में सात्विक और चैतन्य अंश प्रधान होते हैं। इस वजह से चूडिय़ों के आपस में टकराने से जो आवाज होती है। वह नेगेटिव एनर्जी को दूर भगाती है।

मंगलसूत्र: प्रत्येक विवाहित महिला को मंगलसूत्र अवश्य पहनना चाहिये। बड़े-बुजुर्र्गों का कहना है कि इसे छुपाकर ररखना चाहिये। इसके पीछे वैज्ञानिकतर्क यह है कि भारतीय हिंदू महिलाएं काफी शारीरिक श्रम करती हैं, इसलिए उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहना जरूरी है। मंगलसूत्र छिपाकर रखने से ये हमारे शरीर से स्पर्श करेगा और इसका अधिक से अधिक लाभ हमें मिल पाएगा।

बिछुआ: शादीशुदा हिंदू महिलाएं पैरों में बिछुए जरूर पहनती हैं। इसे पहनने के पीछे भी विज्ञान छिपा है। पैर की जिन उंगलियों में बिछुआ पहना जाता है, उनका कनेक्शन गर्भाशय और दिल से है। इन्हें पहनने से महिला को गर्भधारण करने में आसानी होती है और मासिक धर्म भी सही रहता है। चांदी का होने की वजह से जमीन से यह ऊर्जा ग्रहण करती है और पूरे शरीर तक पहुंचाती है।

नाक की लौंग: नाक में लौंग पहनने से सांस नियंत्रित होती है और श्वांस संबंधी रोगों से बचाव होता है।
पायल: चांदी की पायल पहनने से पीठ, एड़ी, घुटनों के दर्द और हिस्टीरिया रोगों से राहत मिलती है। साथ ही चांदी की पायल हमेशा पैरों से रगड़ती रहती है, जो स्त्रियों की हड्डियों के लिए काफी फायदेमंद होती है। इससे उनके पैरों की हड्डी को मजबूती मिलती है, साथ ही ये शरीर की बनावट को नियंत्रित भी करती है।

इयररिंग्स: कानों में इयररिंग्स पहनना फैशन तो होता ही है साथ ही इससे शरीर पर एक्युपंचर इफेक्ट भी पड़ता है। कान में छेद कराकर उसमें कोई धातु धारण करना मासिक धर्म को नियमित करने में सहायक होता है।
शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए सोने के ईयर रिंग्स और ज्यादा ऊर्जा को कम करने के लिए चांदी के ईयररिंग्स पहनने की सलाह दी जाती है। अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अलग-अलग धातु के ईयर रिंग्स पहनने की सलाह दी जाती रही है। पहले पुरुष भी इसे पहना करते थे।