आखिर क्या कारण है जो कुछ लोग गोडसे को हीरो और गाँधी को विलेन मानते है

  • 2016-08-19 04:30:29.0
  • उगता भारत ब्यूरो

आखिर क्या कारण है जो कुछ लोग गोडसे को हीरो और गाँधी को विलेन मानते है

दीपक गहलौत राजपूत

क्या थी विभाजन की पीड़ा? विभाजन के समय हुआ क्या क्या ? विभाजन के लिए क्या था विभिन्न राजनैतिक पार्टियों का दृष्टिकोण? क्या थी पीड़ा पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थियों की, और मदन लाल पाहवा और विष्णु करकरे की? क्या थी गोडसे की विवशता ? क्या गोडसे नही जानते थे कि आम आदमी को मारने में और एक राष्ट्रपिता को मारने में क्या अंतर है ? क्या होगा परिवार का? कैसे कैसे कष्ट सहने पड़ेंगे परिवार और सम्बन्धियों को और मित्रों को

? क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ? क्या हुआ 30 जनवरी की रात्रि को पुणे के ब्राह्मणों के साथ? क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन? क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का.. कैसे नृशंस फांसी दी गयी उन्हें।

पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाडिय़ां आ रही थी, उनमें हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की बोरियों एक के ऊपर एक रची जाती हैं. अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे

, गला कटे हुए रेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी बैलगाडिय़ां ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाडिय़ों पर लिखा हुआ था,-'आज़ादी का तोहफा'। रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई थीं उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर
, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी-उन मृतदेहों की भयानक बदबू के चलते सियालकोट से खबरें आ रही थीं कि वहां से हिन्दुओं को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती, पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे-मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी. किसी भी गाड़ी पर हमला करके हाथ जो लगे उतनी महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया. बलात्कार किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी। बलात्कार किये बिना..
? जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आईं वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थीं।

डॉक्टर ने पूछा क्यों ?

उन महिलाओं ने जवाब दिया हम आपको क्या बताये हमें क्या हुआ हैं? हम पर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता नहीं हैं उनके सारे शरीर पर चाकुओं के घाव थे.

आज़ादी का तोहफा

जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया

, उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड) निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया।

1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था, उसके बावजूद 'पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए' ऐसा महात्मा गाँधी जी का आग्रह था। क्योंकि एक तिहाई भारत के टुकड़े हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था। विधि मंडल ने विरोध किया

, पैसा नहीं देंगे और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए- 'पैसे दो, नहीं तो मैं मर जाऊंगा।' एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, कि हिंसा उनको पसंद नहीं हैं दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक आतंकवाद की आड़ में दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी
, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी कि दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली-तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा कि दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश है मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई ताबा नहीं रहना चाहिए। निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदें खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टि में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं।

जनवरी की कडक़ड़ाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चों को हाथ पकडक़र पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के नीचे नहीं क्योकि तुम हिन्दू हो। 4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे, तब गांधीजी माइक पर से कहते थे-क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीं पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे

? यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे?

कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर कितना महान जिसने बिना तलवार उठाये 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया 2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआ और उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची।

10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया।

20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह-तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो कि 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढिय़ों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं कि जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो, परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं, वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र। आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण होते देखा होगा
, टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने।

और जब भारत का विभाजन हुआ.. तो क्या कारण थे कि पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में। परन्तु ऐसा नही हुआ। यहाँ पर उल्लेखनीय है कि मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था कि पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए

, बहुत कम लोगों को ज्ञात है कि 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी, यानि कि पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था-मोहनदास करमचन्द गाँधी के अनुसार। नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा। पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे उन्होंने फिर से मांग की कि हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रास्ते से घूम कर जाना पड़ता है । 2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं

, इसलिए कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचों बीच एक ष्टशह्म्ह्म्द्बस्रशह्म् बना कर दिया जाए।

2. जो लाहौर से ढाका तक जाता हो।

3. जो दिल्ली के पास से जाता हो 4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो।

5. इस पूरे में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे।

30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा-बच्चा यह जानता था कि यदि मोहनदास करमचन्द

3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी मान लिया जायेगा।

तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की स्थिति में था नही। समझने में और समय भी नहीं था-जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पड़ा। हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने प्राणों की आहुति दी हो-जिसको कि वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है। यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए कि हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जी ने क्या एक बार भी नहीं सोचा होगा कि वो क्या करने जा रहे हैं

?

किसके लिए ये सब कुछ कर रहे हैं ?

उनके इस निर्णय से उनके घर, परिवार, सम्बन्धियों, उनकी जाति और उनसे जुड़े संगठनो पर क्या असर पड़ेगा ?

घर परिवार का तो जो हुआ सो हुआ जाने-कितने जघन्य प्रकारों से समस्त परिवार और सम्बन्धियों को प्रताडि़त किया गया। परन्तु अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने

30 जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन-चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया।

10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गए। सोचने का विषय यह है कि उस समय संचार माध्यम इतने उच्च कोटि के नहीं थे, विकसित नही थे, फिर कैसे 3 घंटे के अंदर-अंदर इतना सुनियोजित तरीके से इतना बड़ा नरसंहार कर दिया गया। सवाल उठता है कि

, क्या उन अहिंसक आतंकवादियों को पहले से यह ज्ञात था कि गांधी वध होने वाला है ? जस्टिस खोसला जिन्होंने गांधी वध से सम्बन्धित केस की पूरी सुनवाई की। 35 तारीखें पडीं। अदालत ने निरीक्षण करवाया और पाया कि हुतात्मा पनदिर नाथूराम गोडसे जी की मानसिक दशा को तत्कालीन चिकित्सकों ने एक दम सामान्य घोषित किया। पंडित जी ने अपना अपराध स्वीकार किया। पहली ही सुनवाई में और अगली
34 सुनवाइयों में कुछ नहीं बोले-सबसे आखिरी सुनवाई में पंडित जी ने अपने शब्द कहे।

गाँधी वध के समय न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति मांगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी। नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी वध के सह अभियुक्त गोपाल गोडसे ने 60 वर्षों तक वैधानिक लड़ाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायलय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दे दी।

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