उत्तर प्रदेश और भाजपा के 'कागजी बम'

  • 2016-09-27 06:15:47.0
  • राकेश कुमार आर्य

उत्तर प्रदेश और भाजपा के कागजी बम

भाजपा उत्तर प्रदेश में सरकार बना पाएगी या नही यह प्रश्न सभी के दिलोदिमाग को छू रहा है। वैसे भी उत्तर प्रदेश एक बड़ा राज्य है और दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर ही जाता है-ऐसा भी माना जाता है। जहां तक भाजपा की बात है तो इस पार्टी ने अयोध्या स्थित राममंदिर के निर्माण को लेकर पिछले लगभग तीन दशक से प्रदेश की जनता को जिस प्रकार छला और ठगा है उससे प्रदेश की बहुसंख्यक जनता का इससे विश्वास उठा है। केवल भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जिसने अपने उस समय के मुख्यमंत्री कल्याणसिंह को इस्तीफा के लिए मजबूर कर दिया था हालांकि यह सभी जानते हैं कि उस समय उन्होंने वह सब कुछ किया था जो वह पार्टी के लिए कर सकते थे। पर सही समय पर भाजपा ने अपने ही नेता का हाथ झटक दिया था। यदि उस समय कल्याणसिंह सपा में होते और सपा उनसे यही कार्य कराती तो कार्य के हो जाने पर सारी सपा उनके पीछे खड़ी हो जाती। जैसा कि आज भी मुलायमसिंह यादव ने कह दिया है कि बाबरी मस्जिद की सुरक्षा के लिए 16 नही यदि 30 कारसेवक भी मारने पड़ते तो मरवाता। स्पष्ट है कि मुलायमसिंह अपने सिद्घांत पर कहीं अधिक कड़े और खरे उतरे, बजाय भाजपा जैसी 'सिद्घांतवादी' पार्टी के।


आज की भाजपा केवल मोदी पर निर्भर है। वह 'नमो' के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह से उनके कार्यकत्र्ता अधिक खुश नही रहते हैं, मोदी का जमाना है और जनता अभी मोदी के साथ है इसलिए अमित शाह को कार्यकर्ता सहन कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें श्री मोदी का वरदहस्त प्राप्त है। जहां तक श्री मोदी का प्रश्न है तो उनकी शक्ति का रहस्य केवल ये है कि वह सही बात को सही समय पर रहने की कला में कुशल हैं। उन्होंने 'कौशल विकास' का अच्छा प्रशिक्षण लिया है। अभी हाल ही में उन्होंने अपने 'बौद्घिक कूटनीतिक कौशल' का परिचय एक बार फिर दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के चुनावों का बिगुल दक्षिण में जाकर केरल की भूमि से पाक को लताडक़र फंूका है। किसी भी व्यक्ति ने या राजनीतिक दल ने यह अनुमान नही किया है कि श्री मोदी ने पाक के विरूद्घ केरल से 'कागजी बम' क्यों फोड़े हैं? जैसा कि हमने ऊपर कहा कि मोदी सही बात को सही मंच पर सही समय पर कहने के अभ्यस्त हैं, तो उन्होंने केरल को अपनी बात के लिए चुना और हमने देखा कि उत्तर प्रदेश की देशभक्त जनता पर उसका प्रभाव पड़ा। लोगों के कान खड़े हुए कि मोदी 'कुछ करना' चाहते हैं। इससे उत्तर प्रदेश के लोग संभले हैं और जो लोग ये सोचकर भाजपा से खिसक रहे थे कि ये कुछ कर नही पायी वे कुछ सोचते से लगते हैं। मोदी की यह पहली जीत है जिन्होंने यू.पी. के खिसकते जनाधार को रोका है, उनके बयान ने सपा, बसपा और कांग्रेस को मौन कर दिया है यदि मोदी यही बयान यू.पी. में कहीं से देते तो इसके चुनावी अर्थ निकलते, पर अब कोई ऐसा भी नही कह सकता। सचमुच मोदी राजनीति के कुशल खिलाड़ी हैं।

पर फिर भी भाजपा के जहाज में भारी छिद्र हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय गृहमंत्री के विषय में 2014 के आम चुनावों से पूर्व यह अच्छी चर्चा चली थी कि उन्होंने मोदी को आगे इसलिए किया है कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नही मिल पाएगा। तब उस परिस्थिति में सत्ता से थोड़ी दूर खड़ी भाजपा को किसी ऐसे चेहरे की आवश्यकता होगी जो अन्य दलों में अपनी ग्राहयता स्पष्ट कर सके। और वह चेहरा उनकी नजरों में वे स्वयं ही थे। पर उनका पीएम बनने का सपना चकनाचूर हो गया-जब भाजपा स्पष्ट नही बल्कि प्रबल बहुमत लेकर सत्ता में आ गयी और मोदी को पार्टी ने अपना नेता मान लिया। श्री सिंह के समर्थक आज भी उन्हें पीएम के लिए उकसाते हैं और वह स्वयं भी महत्वाकंाक्षी हैं। पर पांसे विपरीत जा रहे हैं। वह ज्योतिषियों में विश्वास करते हैं और देखते रहते हैं कि कैसे 'जुगाड़' लगे? इसलिए राजनाथसिंह उत्तर प्रदेश में भाजपा की बड़ी जीत के लिए संघर्ष करेंगे-कुछ कहा नही जा सकता।

भीतर की रस्साकशी भाजपा को तंग कर रही है। उसी का परिणाम है कि भाजपा अभी तक अपने सीएम का नाम घोषित नही कर पायी है। भाजपा की सोच है कि चुनावोपरांत यहां भी कोई 'खट्टर' मिल ही जाएगा। पर यह आवश्यक नही कि सब प्रांत हरियाणा ही हों और सब जगह 'खट्टर' हों। 'खट्टर' के विषय में भाजपा यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 'खट्टर' ही जिनका विरोध करते-करते जाट इतने उग्र आंदोलन पर उतारू हो गये थे कि वहां के उच्च न्यायालय को इस पर यह कहना पड़ा है कि ये उग्र आंदोलन स्वतंत्रता के बीते 70 वर्षों के काल का सबसे भयावह आंदोलन था। आप जीतकर आयें और थाली 'खट्टर' को दे दें-यह हर समय और हमेशा नही चला करता। उत्तर प्रदेश भाजपा ही नही उत्तर प्रदेश की जनता भी भाजपा से अपने भावी सीएम का नाम पूछ रही है। कुछ भी हो वर्तमान परिस्थितियों में भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता से अभी दूर है। अभी हम भाजपा को पाकिस्तान के विरूद्घ और भी अधिक उग्र होते देखेंगे, जिससे उत्तर प्रदेश में 'वोटों की बारिश' हो सके। जितने भी 'कागजी बम' छोड़े जाएंगे, वे सब उत्तर प्रदेश में हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनाने के लिए छोड़े जाएंगे, ताकि अच्छी बारिश होने पर भाजपा अपनी 'अच्छी फसल' उठा सके। देखते जाइये-आगे-आगे होता है क्या?

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

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