महामहिम राज्यपाल रामनाईक जी, से भाग-2

  • 2016-10-29 04:30:00.0
  • राकेश कुमार आर्य

महामहिम राज्यपाल रामनाईक जी, से भाग-2

प.उ. में उच्च न्यायालय की खण्डपीठ हो
महोदय,
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 28 जिले लंबे समय से अपने लिए अलग उच्च न्यायालय की खण्डपीठ का संघर्ष करते आ रहे हैं। परंतु प्रांतीय सरकारें अपनी संकीर्णता और राजनीतिक स्वार्थों के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता के साथ न्याय नहीं कर पा रही हंै। पूर्वांचल को साधने के लिए वर्तमान सपा सरकार भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग उच्च न्यायालय की पीठ देने से स्पष्ट मना कर चुकी है। जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही पूर्वांचल का विकास होता है, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही प्रदेश का अधिकांश राजस्व आता है। वैसे भी लोकतंत्र में सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करना शासन का पहला उद्देश्य होता है तब सस्ता और सुलभ न्याय प्राप्त करना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता का भी संवैधानिक अधिकार है। जिसके विषय में आप अच्छी पहल कर सकते हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करने हेतु वहां उच्च न्यायालय की खण्डपीठ स्थापित करा सकते हैं।

नायब तहसीलदार, तहसीलदार व एसडीएम अधिवक्ताओं में से बने
उच्च न्यायालय का जज वहां प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं में से बन सकता है, बशर्ते कि ऐसा अधिवक्ता वहां 10 वर्ष प्रैक्टिस कर चुका हो। इसी नियम या व्यवस्था को विस्तार देकर तहसील स्तर पर कार्यरत वरिष्ठ अधिवक्ताओं से (जिनकी प्रैक्टिस 10 वर्ष की हो चुकी है) नायब तहसीलदार से एसडीएम तक के अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, इससे प्रतिभावान प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति करने में सहायता मिलेगी। वर्तमान में देखा यह जा रहा है किये अधिकारी कानून की ना जानकारी के कारण या तो प्रक्रिया के विरूद्घ जाकर आदेश पारित करते हैं या फिर मैरिट पर भी गलत आदेश पारित कर देते हैं। इन्हें कानूनी जानकारी लेने के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है और अधिकतर वादों में अपने किसी अधीनस्थ कर्मचारी या किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे मुक्ति पाने के लिए अनुभवी अधिवक्ताओं को अवसर दिया जाना चाहिए।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों के नाम क्रांतिकारियों के नाम पर रखे जाएं
नोएडा, ग्रेटर नोएडा में जितने भर भी सेक्टर हैं, उनके नामकरण आज तक नहीं किये गये हैं ना ही गोलचक्करों के नाम विधिवत रखे गये हैं। आपसे अनुरोध है कि इस महानगर के सेक्टरों के नाम नेताजी सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगतसिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, दुर्भाभाभी, सरदार पटेल, सम्राट मिहिर भोज, राजेन्द्र लाहिड़ी, अशफाक उल्लाखान आदि के नाम पर रखे जाएं। यहां के प्रसिद्घ परिचौक पर सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा लगाकर यह चौक उन्हीं को समर्पित किया जाए। जबकि सूरजपुर स्थित चौक को सम्राट मिहिर भोज के नाम से और वर्तमान में तिलपता चौक को 'विजय सिंह पथिक'के नाम से स्थापित करते हुए इसी प्रकार महर्षि दयानंद चौक, विवेकानंद चौक, एपीजे कलाम चौक आदि महापुरूषों को समर्पित चौकों का नामकरण किया जाए। वैसे भी ग्रेटर नोएडा से हमारे क्रांतिकारियों का गहरा संबंध रहा है, यहां पर उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों को सजीवता देने के लिए राव कौशल सिंह के किले के जीर्णशीर्ण अवशेषों को सुधार कर वहां हमारे क्रांतिकारियों की आदम कद प्रतिमाएं स्थापित की जाएं और उनका संक्षिप्त जीवन चरित्र भी वहां खुदवाया जाए।

सडक़ों का नामकरण इतिहासनायकों को समर्पित हो
प्रदेश में यमुना एक्सप्रैस हाईवे और अब आगरा से लखनऊ तक का हाईवे जैसे कई हाईवे निर्मित किये गये हैं, इन्हें इतिहास नायकों को समर्पित करते हुए उन्हीं के नाम से राजमार्ग का नाम दिया जाए-जैसे आगरा यमुना एक्सप्रेसवे को सम्राट मिहिर भोज एक्सप्रेसवे का नाम दिया जा सकता है। नोएडा व ग्रेटर नोएडा को जोडऩे वाली 130 मीटर की सडक़ को भी इसी प्रकार किसी महापुरूष के नाम के साथ से जोड़ा जा सकता है।

स्थानीय कस्बों नगरों का इतिहास सजीव किया जाए
हमारे प्रदेश के प्रत्येक ग्राम, नगर, कस्बे का कोई न कोई इतिहास है। अच्छा होगा कि शासन उस लुप्त इतिहास को सजीव करने का प्रयास करे और हर गांव कस्बे या नगर के बीचों-बीच किसी चौराहे पर वहां का स्थानीय इतिहास अंकित किया जाए। किसी ऐसे स्थानीय महापुरूष की प्रतिमा वहां लगायी जाए जिसने अपने समय में भारत की स्वतंत्रता की प्राप्ति में और क्रांतिकारी गतिविधियों में विशेष सहयोग देते हुए आत्म बलिदान दिया हो। इससे अपने महापुरूषों को और अपनी स्वतंत्रता की कीमत चुकाने में, उनके योगदान को समझने में युवा पीढ़ी को सहायता मिलेगी।

पाठ्यक्रम में राष्ट्रवाद पर बल दिया जाए
हमारे विद्यालयों में जारी पाठ्यक्रम को भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारत की सामासिक संस्कृति के साथ जोडऩे का प्रयास किया जाए। साम्प्रदायिक शिक्षा को किसी भी विद्यालय में न दिया जाना अनिवार्य किया जाए। हमारे महापुरूषों और ऋषि, संत, महात्मा आदि के जीवन चरित्र पढ़ाकर बच्चों के लिए नैतिक शिक्षा अनिवार्य की जाए। साथ ही योग और भारत के वेद, उपनिषद आदि ग्रंथों की मानवतावादी शिक्षाओं को बच्चों के लिए पढ़ाया जाना अनिवार्य किया जाए। सारे संप्रदायों का सम्मान करना और धर्मांतरण न होने देना भी अनिवार्य किया जाए।
आशा है आप 'उगता भारत परिवार' की इन भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदेश सरकार को उचित निर्देश देकर हमें कृतार्थ करेंगे। हम आपकी कृपा से सदैव ऋणी रहेंगे।

राकेश कुमार आर्य ( 1586 )

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