समय प्रतिशोध का है

  • 2016-09-20 17:00:36.0
  • राकेश कुमार आर्य

समय प्रतिशोध का है


उड़ी सेक्टर में हमारे 18 जवान शहीद कर दिये गये हैं। सारे देश ने अपने अमर शहीदों को नम आंखों से श्रद्घांजलि दी है। हमलावर चार आतंकियों को हमारी सेना ने मार गिराया है। आतंकियों के पास से जो उपकरण व अन्य सामग्री मिली है उस पर पाकिस्तानी मार्क लगा है। हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने देश को आश्वस्त किया है कि अपने जवानों के हत्यारों को दण्ड अवश्य दिया जाएगा। देश के गृहमंत्री राजनाथसिंह और हमारी सेना सहित देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी इस कार्रवाई पर शत्रु के प्रति कड़ी कार्रवाई के संकेत दिये हैं।
हम अपने अमर शहीदों को अपनी भावपूर्ण श्रद्घांजलि देते हैं। उनकी शहादत को नमन करते हैं। उनके परिजनों के प्रति पूर्ण सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं। हमारा मानना है कि देश के लिए फिर एक बार एक चुनौती आयी है, नाजुक घड़ी है। इतनी नाजुक कि यदि बौखलाहट में कुछ भी कर दिया गया तो सारी मानवता के लिए संकट आ उपस्थित होगा। कुछ 'कवि' और कुछ लेखक 'आग' उगलने लगे हैं, उन्हें चाहिए-केवल युद्घ। यद्यपि वह जानते हैं कि इस बार दांव पर भारत या पाकिस्तान नही, सारी मानवता होगी और युद्घ नही महायुद्घ होगा। सोई हुए नेतृत्व को जगाना उनका कत्र्तव्य है, परंतु नेतृत्व के भीतर बौखलाहट भरना नेतृत्व को जगाना नही होता।
हम भी चाहते हैं कि युद्घ हो, क्योंकि अब भारत के अपमान को अधिक सहन करना भी अपमान का अपमान सा नजर आ रहा है। पर हम 'अंधा युद्घ' नही चाहते कि खड़े हो जाओ और मरने को चल दो। ऐसे युद्घ हमने इतिहास में बहुत लड़े हैं, जिनमेें हमने केवल बलिदान तो दिये हैं, पर मातृभूमि की रक्षा नही कर पाये।
उन युद्घों में हमारा शौर्य वंदनीय रहा, नमन और अभिनंदन का पात्र रहा, पर हमारी कुर्बानी व्यर्थ गयी। अत: हमारा देश के बुद्घिजीवियों, लेखकों कवियों से विनम्र अनुरोध है कि वे सरकार को जगाने के अपने लेखन धर्म का पालन अवश्य करें, पर किसी 'अंधे युद्घ' की ओर धकेलने के लिए सरकार को उकसावें नही। वह 'कृष्ण' बनें, युद्घ की विभीषिका को देखें और अपने 'अर्जुन' को युद्घ की विभीषिका से बचाकर निकालने की योजना पर कार्य करें। थोड़ी देर के लिए 'ताली' बजवाने के व्यामोह से बाहर निकलें।
हर देशवासी अब समझ ले कि अब विरोध व प्रतिरोध का समय चला गया है। अब ना चाहते हुए भी क्रोध व प्रतिशोध की ओर हम जा रहे हैं। सचमुच चुनौती ने क्रोध को भडक़ाया है और प्रतिशोध के लिए प्रेरित किया है। भारत सरकार भी इस बात को समझ ले कि अब उसे 'महारण' की तैयारी कर मां भारती के 'महाऋण' से मुक्ति का मार्ग खोजना होगा। देश की आत्मा की आवाज इस समय सरकार को सुननी ही होगी। देश अब अपने वीर जवानों को श्रद्घांजलि देते-देते थक चुका है, अब अपने शेरों का शौर्य देखने की मचलन से देश मचल रहा है। पर फिर भी नेतृत्व पूरी गंभीरता और पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे तो ही अच्छा है।
इतिहास हमें बड़ी निकटता से देख रहा है। वह सीमा के उस पार से आने वाले शब्द 'आतंक, आतंक और आतंक' और इधर से उठने वाली आवाज 'युद्घ, युद्घ और युद्घ' को विस्मय भरी दृष्टि से देख रहा है। क्योंकि वह जान रहा है और अपनी आंखों से देख भी रहा है कि युद्घ के परिदृश्य में उसे करोड़ों निरपराधों की तड़पती लाशें दिखाई दे रही हैं। वह 'शरीफ' नाम के राक्षस को उन लाशों को दिखाना भी चाहता है, पर वह देखने को तैयार नही है। क्योंकि उसकी आंखें पर उसकी सेना और आतंकियों ने पट्टी बांध दी है। इतिहास इस समय देश के बुद्घिजीवियों, कवियों और लेखकों में से उस 'कृष्ण' को खोज रहा है जो 'कुरूक्षेत्र' के चारों ओर ऐसी रेखा खींचने की विद्या जानता हो जिससे युद्घ के आणविक अस्त्रों का प्रयोग उस रेखा के भीतर रहने वाले लोगों पर ही हो और निरपराध जनता पर उन हथियारों का कोई प्रभाव न हो। चुनौती इस समय अर्जुन बनने की ही नही है, कृष्ण बनने की भी है। भीड़ में से पहले कृष्ण खोजो-धृतराष्ट्र की आंखें खोलने के लिए नीतियुक्त विनम्र किंतु सच्ची भाषा बोलने वाला विदुर भी ढूंढ़ो-तभी 'पाण्डव पक्ष' की विजय संभव है। यह आज के बुद्घिजीवियों, लेखकों और कवियों का फौरी राष्ट्र धर्म है।
प्रधानमंत्री मोदी जी! अब युद्घ अवश्यम्भावी हो गया है, इसे अब आप टाल नही सकते। आपकी सेवा में केवल एक बात कहकर अपनी बात समाप्त कर रहा हूं कि महर्षि चरक ने जब अपनी 'चरक संहिता' पूर्ण कर ली तो एक दिन पूर्णिमा के चांद की चांदनी में वह अपने शिष्यों के साथ अपने आश्रम में चहलकदमी कर रहे थे। आश्रम के एक कोने में एक गड्ढे में भरे जल को देखकर महर्षि अचानक रूक गये। शिष्यों ने पूछा गुरूजी क्या बात है? गुरूजी ने कहा कि यह जल प्रदूषित हो गया है, और मैं देख रहा हूं कि इस समय वायु भी प्रदूषित हो गयी है। इन दोनों का प्रदूषण मुझे महाविनाशकारी युद्घ की ओर संकेत कर रहा है, जिसमें अणुबमों का प्रयोग भी होता दिख रहा है। ऋषि की यह भविष्यवाणी उसमें पूर्ण हुई या नही, यह तो नही पता पर आज पूर्ण होने वाली है, जल और वायु का प्रदूषण आज भी कुछ कह रहा है। जल और वायु का प्रदूषण हम सबकी मौजूदगी में बढ़ गया। जब हम उस महा अपराध को रोक नही पाये तो अब परिणाम को भला कौन रोकेगा। इसलिए युद्घ तो अब होगा ही पर अपने 'मित्रों' को बता दो कि युद्घ की 'व्यूह रचना' शीघ्र करें, शत्रु बचने न पावे, देश बलिदानों के लिए तैयार है। देश आपको क्रोध में (पागल होकर अंधा युद्घ करना) नही 'मन्यु' में (संयम, विवेक, धैर्य के साथ युद्घ का बिगुल फूंककर शत्रु को समाप्त करने की मुद्रा) देखना चाहता है। पर यदि उसे कुछ लोग क्रोध ही मान रहे हों तो हम भी कहेंगे कि समय क्रोध और प्रतिशोध का है। अर्जुन बनकर खड़े हो जाओ-कृष्ण की आत्मा आज आपका आवाहन कर रही है और ऋषि चरक की आत्मा आपको सचेत कर रही है कि महाअपराधियों को दण्ड मिलने का समय आ चुका है, उससे मुंह फेरना भी अब अपराध है।

राकेश कुमार आर्य ( 1582 )

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