मोरारी बापू का अभिनंदन

  • 2016-10-12 02:15:37.0
  • राकेश कुमार आर्य

मोरारी बापू का अभिनंदन

कभी दाराशिकोह ने भारत की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य थाती उपनिषदों का फारसी में अनुवाद कराकर और उनके रहस्य ज्ञान गाम्भीर्य को समझकर उनके लिए श्रद्घा में अपना मस्तक झुकाया था तो आगे चलकर जर्मनी के विद्वान शॉपनहॉवर ने भी जब उपनिषदों के ज्ञान गाम्भीर्य को समझा और उसकी भीतरी दुनिया में उसने स्वयं ही प्रकाश हुआ अनुभव किया तो वह भी उपनिषदों को सिर पर रखकर नाच उठा था।

.........और

आज फिर इसी श्रंखला को आगे बढ़ाते हुए प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू के कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति के मानवतावाद से प्रभावित होकर मुस्लिम देश यूनाइटेड अरब अमीरात की राजकुमारी श्रद्घा से भर उठीं और उन्होंने सम्मान से अपने सिर पर पवित्र रामचरित मानस को उठा लिया। मोरारी बापू की सरल प्रस्तुति और हमारे मर्यादा पुरूषोत्तम राम सीताजी की चारित्रिक विशेषताओं का ही चमत्कार था कि जिस
मजहब में कदम-कदम पर फतवे जारी कर चीजों को इस्लामिक और गैरइस्लामिक दृष्टिकोणों से देखने के लिए लोग प्रेरित करते हों, वहां 'रामचरितमानस' को एक मुस्लिम देश की राजकुमारी इस प्रकार सर पर रख ले। इतना ही नही इस मुस्लिम देश के राजकुमार 'जय सियाराम' बोलते हुए भारतीय संस्कृति के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हुए सामने आए।

इस्लाम को लेकर कुछ लोगों ने इसे अपना धंधा बना लिया है और इसे

कुछ इस प्रकार का दिखाते रहने का प्रयास करते रहते हैं कि जैसे उसे किसी अन्य मजहब या सम्प्रदाय या संस्कृति के धर्मग्रंथों से घोर घृणा है और यह उन्हें फूटी आंख भी देखना पसंद नही करता। ऐसे लोगों के लिए संयुक्त अरब के शाही परिवार के राजकुमार राजकुमारी का उपरोक्त कार्य प्रशंसनीय ही कहा जाएगा, इससे जहां इस्लाम को एक उदारवादी मजहब बनाने में सहायता मिलेगी, वहीं हम सब मिलकर एक वैश्विक
संस्कृति का निर्माण करने में भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वैसे भी आज कलह और क्लेश में धधकते विश्व को एक ऐसी विश्व संस्कृति की आवश्यकता है, जिसमें सबका भला हो और सबका लाभ हो। इस बड़ी सोच को जो-जो लोग अपनाएं उनका हार्दिक अभिनंदन होना चाहिए। परंतु इसके लिए शर्त केवल यही होनी चाहिए कि मानवतावाद को इस वैश्विक संस्कृति का मौलिक धर्म स्वीकार करने की क्षमता ऐसे व्यक्तियों के
भीतर स्वाभाविक रूप से होनी चाहिए।

एक वायरल हुए वीडियो में प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू के कार्यक्रम में मुस्लिम देश यूनाइटेड अरब अमीरात की राजकुमारी अपने सर पर पवित्र रामचरित मानस उठाये नजर आयी हैं जबकि राजकुमार 'जय सियाराम' बोलते दिख रहे हैं। यूएई के किंग के बेटे और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नहयान का ये वीडियो आजकल सोशल मीडिया में बेहद तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें

वे भारतीय संत मोरारी बापू के एक कार्यक्रम में भाषण देते हुए नजर रहे हैं।

वीडियो में आप देखेंगे कि अबू धाबी के प्रिंस अपने भाषण की शुरूआत और समापन दोनों ही 'जय सियाराम' के उच्चारण के साथ करते हैं। बताया जा रहा है कि, यह वीडियो मोरारी बापू के संत्संग कार्यक्रम का है। जो 17 सितंबर, 2016 से 25 सितंबर 2016 के बीच अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात) में हुआ था।

सत्संग में हिस्सा

लेने पहुंचे प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने मंच पर आते ही 'जय सियाराम' कहकर संबोधित किया तो काफी देर तक तालियां गूंजती रहीं। इस्लामिक देश में हिंदू कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ पर गर्व करते हुए प्रिंस ने सभी को धन्यवाद दिया।

मोरारी बापू के कार्यक्रम में प्रिंस नाहयान ने कहा कि मोरारी बापू, मैं आपके जितना ज्ञानी नहीं हूं। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि यहां आकर हमारा

सम्मान बढ़ाने के लिए धन्यवाद। उन्होंने कहा कि, संयुक्त अरब अमीरात सत्य, प्रेम और करुणा की धरती है। इसका सबसे बड़ा सबूत इतने बड़े धार्मिक गुरु का यहां कार्यक्रम आयोजित करना है। मैं यहां अरबी लोगों को देखकर बेहद खुश हूं। मैं इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए व्याकुल हूं। जय सियाराम।

ऐसे माहौल में जबकि कुछ लोग इस्लामिक जेहाद के आधार पर विश्व में वैर विरोध बढ़ाने में

लगे हैं और चारों ओर साम्प्रदायिक तनाव की परिस्थितियां बनी हुई हैं, तब संयुक्त अरब अमीरात की धरती से निकली समरसता की यह आवाज निश्चय ही हम सबका मार्गदर्शन करने वाली सिद्घ हो सकती है। हमें अपने धरती पुत्र और संस्कृति पुत्र मोरारी बापू का भी हार्दिक अभिनंदन करना चाहिए, जिन्होंने इतनी दूर जाकर भारतीय संस्कृति का और मर्यादा पुरूषोत्तम राम माता जानकी का गुणगान किया है। उनके पुरूषार्थ
को नमन करते हुए हमें संयुक्त अरब अमीरात के शाही परिवार के साहस को भी नमन करना चाहिए जिन्होंने खुली हवाओं को भीतर

राकेश कुमार आर्य ( 1586 )

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