भारत की हिन्दू संस्कृति बनाम सांझा संस्कृति

  • 2016-10-13 08:15:52.0
  • राकेश कुमार आर्य

भारत की हिन्दू संस्कृति बनाम सांझा संस्कृति

आरूढ़ जिस पर भारत है
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात कांग्रेसी संस्कृति और साम्यवादी विचारधारा की मानसिकता के जिन लोगों ने भारत में जो भ्रांतिपूर्ण अवधारणाएं प्रतिस्थापित कीं उनमें से एक है-'भारत सांझी संस्कृति को मानने वाला राष्ट्र है।' दूसरे शब्दों में इसे यूं कह लें कि भारत की संस्कृति का निर्माण विभिन्न विचारधाराओं और संप्रदायों के लोगों ने किया है।

झूठ से भरे इतिहास का मिथक
इस विचारधारा और 'सांझा संस्कृतिवाद' के मिथक को सत्य बनाने के लिए दो झूठ गढ़े गये। प्रथम झूठ यह कि आर्य विदेशी थे। दूसरा झूठ यह कि भारतीय राष्ट्र की संस्कृति की प्राचीनता मात्र पांच हजार वर्ष की है।

भारत के साथ शत्रु भाव रखने वालों के द्वारा इन दोनों झूठों को इतनी बार बोला गया और लिखा गया कि ये दोनों झूठ ही हमारे अंत:करण पर एक संस्कार के रूप में रच, बस और रम गये हैं। हम स्वयं अपने विषय में ये ही मानते हैं कि 'आर्य यहां के मूल निवासी नही थे' स्थिति यह बना दी गयी कि अब तीसरे झूठ ने भी जन्म ले लिया-
सर जमीने हिन्द पर अखलाके आवामे फिराक।
काफिले आते गये और हिन्दोस्तां बनता गया।

अर्थात हम पर एक कोरा झूठ थोपा गया कि इस पवित्र भूमि पर विदेशियों के काफिले आते गये और हिन्दुस्तान बनता चला गया। इन विदेशियों के काफिले में अंतिम कड़ी मुस्लिमों की बताई गयी। काफिलों से बनने वाले इस हिन्दुस्तान के निर्माण की इस प्रक्रिया को इसलिए अपनाया गया कि जिससे इस पुरातन और सनातन राष्ट्र का कोई (पैतृक) उत्तराधिकारी न बन पाए। यह झूठ भी अंग्रेजों और मुस्लिमों ने मिलकर बोला, जिनका इस राष्ट्र के साथ कोई आत्मिक लगाव नहीं था।

यह झूठ बोल दिया गया और हम भारतीयों के द्वारा अपना भी लिया गया, किंतु एक प्रश्न तो पुनरपि अनुत्तरित रह ही गया। प्रश्न है कि जब बाहरी काफिलों के आने से ही हिंदुस्तान का निर्माण हुआ तो इस राष्ट्र का नाम हिंदूस्थान (हिंदुओं का स्थान) ही रूढ़ क्यों हुआ? बाहरी काफिलों ने कभी इस नामकरण पर विवाद क्यों नहीं किया?
भयावह झूठ यह था इस राष्ट्र की प्राचीनता के विषय में। हमें बताया गया कि हमारी संस्कृति संसार की प्राचीन संस्कृति है, जिसकी आयु 'मात्र पांच हजार वर्ष है' इस झूठ के बोलने और प्रतिस्थापित करने में पहले वाले झूठ से भी कहीं अधिक विष भरा हुआ था।

हिन्दू इतिहास से भयभीत अंग्रेज
ईसाइयों ने संसार को अपने द्वारा सभ्य बनाने और विज्ञानवाद से परिचित कराने का संसार में बढ़-चढक़र प्रसार और प्रचार किया था। इन्हें भली प्रकार ज्ञात था कि यदि हिंदुओं को यह बताया गया कि संसार ईसामसीह के आगमन के पश्चात से नही अपितु उससे भी हजारों और लाखों वर्ष पूर्व सर्वांगीण उन्नति भारत के नेतृत्व में कर चुका था तो स्थिति पलट जाएगी। तब इस सभ्य जाति पर राज्य करना असंभव हो जाएगा।
अत: उन्होंने हमें बताया कि तुम्हारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता को तो विदेशी आर्य जाति ने यहां से नष्ट भ्रष्ट कर समाप्त कर दिया था। इसके पश्चात यहां काला युग प्रारंभ हुआ और सार्वत्रिक अज्ञान, अन्याय और अभाव का साम्राज्य स्थापित हो गया।

(लेखक की पुस्तक 'वर्तमान भारत में भयानक राजनीतिक षडय़ंत्र : दोषी कौन?' से)

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

उगता भारत Contributors help bring you the latest news around you.