भारत के शत्रु सकते में

  • 2016-11-11 03:30:31.0
  • राकेश कुमार आर्य

भारत के शत्रु सकते में

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपनी कार्यशैली है और उनके बनाये चक्रव्यूह का द्वार तोडऩा हर किसी वश की बात नही होता। यह उनके कुशल प्रशासक होने का ही प्रमाण है कि उन्होंने 500 व 1000 के नोट बंद करने के अपने निर्णय की भनक अपने कार्यालय और मंत्रियों तक को भी नही लगने दी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कालेधन की सर्जिकल स्ट्राइक का चक्रव्यूह छह महीने पहले अपने दो विशिष्ट विश्वसनीय अधिकारियों के साथ मिलकर रचा था। इसे गोपनीय रखना सचमुच राष्ट्रहित में बहुत ही आवश्यक था। वास्तव में बहुत से ऐसे अरबपति हैं जिनकी सीधी मुलाकात मंत्रियों से है और अधिकारियों से होती रहती है। बस यही वह कमजोर पेंच था जिससे प्रधानमंत्री सावधान थे कि यदि मंत्रियों व अधिकारियों को उनके किसी 'बड़े धमाके' की जानकारी हो गयी तो योजना क्रियान्वित होने से पहले सार्वजनिक हो जाएगी, और फिर उसका कोई औचित्य नही रहेगा। अपनी योजना को सिरे चढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार बनते ही तमिलनाडु के साफ सुथरी छवि वाले 1980 बैच के तेज तर्रार आईएएस अफसर शक्तिकांत दास को कृषि मंत्रालय के फर्टिलाइजर विभाग में नियुक्त किया। वर्तमान में प्रधानमंत्री मोदी की कसौटी पर ये आईएएस अधिकारी पूर्णत: खरा उतरा। जिसके चलते प्रधानमंत्री मोदी उनके काम से प्रभावित हुए और उनकी नियुक्ति वित्त मंत्रालय में राजस्व का कार्य पर कर दी। यह अधिकारी अपनी योग्तया का प्रमाण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी के हृदय में बस गये।

प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी तैनाती पिछले साल 29 सितंबर 2015 को आर्थिक सचिव पद पर की। इसके साथ वह रिजर्व बैंक का भी कामकाज देख रहे थे। बताया जाता है कि पिछले छह महीने से मोदी इस चक्रव्यूह को रचने की तैयारी में थे। जिसके चलते ही प्रधानमंत्री ने जनधन योजना के तहत पहले हर आदमी को बैंक के खाते से जोड़ा, जिससे देश का सारा काम डेबिट कार्ड से हो और कालेधन की समानान्तर व्यवस्था की जा सके। फलस्वरूप वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ सौरभ गर्ग की सिक्योरटी में करोड़ों रुपये के 500 और 1000 रुपये के नोट की भरपाई के लिए 500 और 2000 रुपये की नई नोट पहले से छाप कर इस स्ट्राइक से पहले रख ली जाएं। मगर इस बात की भनक किसी को न लगे। इसके लिए गोपनीय तरीके से इन नोटों को छापने का काम किया जाये।

काम तो कठिन था, लेकिन बड़े भरोसे का था। यहां तक कि इस बात की भनक रिजर्व बैंक के बड़े अफसरों तक को नहीं थी। यही नहीं किसी भी बैंक को भी इस बात की भनक नहीं लगी। विदित हो कि काले धन की वापसी के लिए इनकम डिक्लेरेशन स्कीम (आईडीएस) शुरू कर 23 जुलाई से 30 सितंबर तक का समय अपनी संपत्ति घोषित करने के लिए दिया था।जिसके चलते कई लोगों ने अपनी संपत्ति घोषित कर करोड़ों रुपये सरकार के खाते में जमाकर लगान अदा की। लेकिन रियल इस्टेट, फेक करेंसी और आतंकवादी संगठनों पर ख़र्च किया जाने वाला पैसा इस योजना से नहीं आ सका। एमविट कैपीटल के आकंड़े बताते हैं कि भारत में 30 लाख करोड़ रूपया इन तीन कामों में इधर से उधर घूम रहा है।

फिलहाल सितंबर महीने में रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराज राजन की छुट्टी करते हुए मोदी ने इसीलिए अपने खास और सबसे भरोसेमंद अफसर उर्जित पटेल की तैनाती करने के लिए उन्हें प्रोन्नति देकर उन्हें रिजर्व बैंक का गवर्नर नियुक्त किया। इसके बाद मोदी ने अपने सबसे भरोसेमंद दोनों अफसरों शक्तिकांत दास और उर्जित पटेल के साथ फंसे हुए कालेधन की सर्जिकल स्ट्राइक का वो चक्रव्यूह तैयार किया, जिसका द्वार कोई लांघ न सके। काम कठिन था। लेकिन इरादे साफ थे। इसीलिए पीएम मोदी ने कई रात जागकर इन अफसरों के साथ गोपनीय बैठकें भी कीं। शक्तिकांत और उर्जित की टीम पीएम के आदेश पर इतिहास रचने में जुट गए। दरअसल इतना बड़ा फैसला लेने से पहले देश के एटीएम और करोड़ों जनता के हाथों में नई करेंसी भी देनी थी। ताकि किसी को अचानक लिए गए इस फैसले के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी के चलते रात 12 बजे से बंद हुई पुरानी 500 और 1000 रुपये कि करेंसी बंद होते ही नई करेंसी की खेपें अगले दो दिन के भीतर बैंक और एटीएम में डाल दी जायेंगी। बहरहाल बैंक में नोट बदलने गए व्यक्ति को अपना आधार कार्ड दिखाकर अपने बैंक में कैमरे की निगरानी में करेंसी बदलनी पड़ेगी। जिसके चलते कालेधन को छिपाये जाने वाले अरबपतियों पर अब पीएम मोदी का चाबुक चलने से कोई नहीं रोक सकेगा। प्रधानमंत्री सचमुच अपने इस निर्णय से लोगों के मन में बस गये हैं। मुट्ठीभर लोग हैं जिनकी बेईमानी अब नही चलेगी और वे इसीलिए प्रधानमंत्री के निर्णय का विरोध कर रहे हैं। परंतु देश के लगभग सभी लोग प्रधानमंत्री के निर्णय से प्रसन्न हैं। वास्तव में ऐसी ही दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रधानमंत्री देश के पास होना भी चाहिए।

प्रधानमंत्री के इस निर्णय से बंगलादेश और नेपाल में आईएसआई द्वारा जो अरबों खरबों के जाली नोट फैला रखे थे और जिनसे वे भारत की अर्थव्यवस्था को मिटाने का काम कर रहे थे उन्हें प्रधानमंत्री ने एक मिनट में रद्दी में बदल दिया। पाकिस्तान सहित कई शत्रु हमारे प्रधानमंत्री के इस साहसिक निर्णय के बाद सकते में हैं वह समझ नही पा रहे हैं कि मोदी यह क्या कर दिया है? इतना ही नही भारत के उन राजनीतिज्ञों पर भी अब लगाम कसी जा सकेगी जो काले धन से चुनाव लड़ते थे और कुछ लोगों को चुनाव लड़वाकर उन्हें जीतने के बाद सरकारों के गिराने या अपनी मनमाफिक कीमत लेने के लिए सरकार पर दबाव बनाते थे। इस निर्णय से चुनाव सुधारों की ओर भी बढऩे में हमें सहायता मिलेगी।

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

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