रोग पुराना है, उपचार होने दो

  • 2016-11-21 04:45:28.0
  • राकेश कुमार आर्य

रोग पुराना है, उपचार होने दो

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 500 व 1000 के नोटों को बंद करने के साहसिक निर्णय को देश-विदेश से बड़ी प्रशंसा मिली है। हमारा मानना है कि ऐसे साहसिक निर्णयों को लेकर देश की जनता को अपने लिए होने वाले थोड़े बहुत कष्ट को भूलकर सरकार का साथ देना ही चाहिए। यह अच्छा ही रहा कि देश की जनता ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की 'नौटंकी' को अपना समर्थन नहीं दिया है और उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने साहसिक निर्णय लेने वाले प्रधानमंत्री के साथ हैं।


वास्तव में देश में 500 व 1000 के नकली नोटों का प्रचलन दीर्घकाल से बढ़ रहा था। जिससे हमारी अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब होती जा रही थी। टास्क फोर्स ने वर्ष 2000 में बताया था कि हमारी अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने के लिए आई.एस.आई. बड़ी मात्रा में 500 और 1000 के नकली नोट छापकर नकली भारतीय मुद्रा (एफ.आई.सी.) भेज रही है। एफ.आई.सी. की तस्करी पाकिस्तान से लगते जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात की सीमा के साथ-साथ भारत बंग्लादेश और भारत-नेपाल सीमा पर हो रही है। खाड़ी देशों के वाहकों (जो हवाई यात्रा से अहमदाबाद, मुंबई, तिरूअनंतपुरम और चैन्नई आते हैं) को नकली भारतीय मुद्रा के साथ कस्टम के अधिकारियों ने कई बार पकड़ा है। बांग्लादेश से तस्करी द्वारा आयी एफ.आई.सी. कई बार पूर्वोत्तर के राज्यों, विशेषकर असम में पहुंचाते समय पकड़ा जा चुका है। काठमाण्डू में पाकिस्तानी दूतावास के कर्मचारियों को भी समय-समय पर पकड़ा जा चुका है, जो उत्तर प्रदेश और बिहार में नकली भारतीय मुद्रा पहुंचाने के लिए माध्यम के रूप में कार्य कर रहे थे। पाकिस्तान से समझौता एक्सप्रेस द्वारा अटारी, अमृतसर, पंजाब आने वाले पाकिस्तानी और भारतीय मुसलमानों से भी नकली भारतीय मुद्रा जब्त की गयी है। 29 जुलाई 2000 तक भारतीय मुद्रा की सबसे बड़ी जब्ती के मामले की जांच पड़ताल में गुजरात और महाराष्ट्र में फैले एक व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ जो भारत की अर्थव्यवस्था में नकली मुद्रा चला रहा था।

इतने बड़े स्तर पर भारतीय नकली मुद्रा का गोरखधंधा चल रहा था और इसकी सूचना भी हमारी गुप्तचर संस्थाएं सरकारों को देती आ रही थीं परंतु देश का नेतृत्व आंखें मूंदे बैठा था। हमारे राजनीतिक नेतृत्व की पंगा मोल न लेने की प्रवृत्ति सी भी बन गयी है। वह सोचता रहा है कि यदि किसी गलत या देशविरोधी कार्य की जानकारी जनता को नहीं हो रही है तो चुप रहा जाए, क्यों किसी से पंगा मोल लें? हमने देखा है कि यह पंगा मोल न लेने वाली स्थिति ही देश में बनी रही और हम चुपचाप लुटते रहे। हम दो मोर्चों पर बड़ी भारी जंग का सामना कर रहे थे-एक आतंकवाद की और एक फर्जी मुद्रा की और भारतीय नेतृत्व था कि सब जानकर भी चुप बैठा था।

मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए ही समस्या को समझ लिया था। इसलिए उन्होंने उसी समय एफ.आई.सी. को बंद कराने का मन बना लिया था। अब जानकारी हो रही है कि 2014 के चुनावों के समय अर्थात प्रधानमंत्री बनने से पूर्व ही मोदी और उनके साथियों के बीच यह सहमति बन गयी थी कि सत्ता में आने पर एफ.आई.सी. को बंद किया जाएगा। इसके लिए यह भी तय हो गया था कि इस महत्वपूर्ण निर्णय का उचित समय मोदी ही तय करेंगे।

अब से पूर्व की स्थिति को समझने के लिए टास्क फोर्स वर्ष 2000 की इस मान्यता को समझने की आवश्यकता है कि भारतीय रिजर्ब बैंक के डिप्टी गवर्नर के साथ हमारी बातचीत से एक दुखद तथ्य का पता चला है कि अब तक किसी अधिकार प्राप्त केन्द्रीय एजेंसी के पास नकली भारतीय मुद्रा की सभी जब्तियों की सूचना पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। परिणामस्वरूप अब तक की गयी कुल नकली भारतीय मुद्रा की जब्ती पर कोई वैधानिक वक्तव्य उपलब्ध नहीं है। वैसे, विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गयी कुल जब्ती से यही संकेत मिलता है कि करोड़ों रूपये की नकली भारतीय मुद्रा भारतीय बाजारों में पहुंचायी जा रही है।

अब आप अनुमान लगायें कि पिछले कई दशक से भारत में चल रही नकली मुद्रा से शत्रु देश पाकिस्तान और आतंकवादियों को कितना लाभ पहुंच चुका होगा? इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने नकेल डालकर कितने साहस का परिचय दिया है और किस प्रकार अपनी जान को जोखिम में डाल लिया है? यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसा नही है कि भारतीय नकली मुद्रा के इस खेल का और इससे होने वाले लाभ-हानि का ममता बनर्जी, केजरीवाल और राहुल गांधी को पता ना हो। वे सब जानते हैं-पर उनके साथ एक शब्द जुड़ा है 'नौटंकीबाज' का। केजरीवाल विशेषत: इस के लिए जाने जाते हैं। अब यदि उन्हें अपनी 'नौटंकी' के लिए ममता और राहुल और मिल जाएं तो यह उनके लिए एक'उपलब्धि' है। यद्यपि ममता और राहुल गांधी को यह जानना चाहिए कि इस व्यक्ति ने अपनी 'नौटंकी' के लिए अन्ना हजारे को प्रयोग कर उनके साथ क्या कर दिया था?

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस गोपनीयता से सारा कार्य किया है, उससे भी देश के जागरूक लोग सहमत हैं, उनकी गोपनीयता में ही उनके इस कार्य की पारदर्शिता छिपी है। उन्होंने अपने निकटस्थ व्यक्ति तक को भी सावधान नही होने दिया और उसकी जेब से लेकर तिजोरी तक में रखे कालेधन को पकड़ लिया। यदि वह एक-एक व्यक्ति को पकड़ते या नोट बंद करने के लिए समय देते तो देश को बहुत बड़ी क्षति उठानी पड़ जाती। सारे चोर तब अपने माल को ठिकाने लगाने में सफल हो जाते।

भारत के लोगों ने अपने अदभुत संयम का परिचय दिया है और अपने प्रधानमंत्री पर विश्वास करते हुए लंबी कतारों में खड़े होने का कष्ट सहकर भी स्वयं को उनके साथ खड़ा कर लिया है-यह शुभ संकेत है। जो लोग चिल्ला रहे हैं कि मोदी ने 'पाप' कर दिया है उनके विषय में समझ लेना चाहिए कि वे स्वयं 'पापी' हैं और मोदी ने केवल यह 'पाप' किया है कि उनके 'पाप' का खेल बंद कर दिया है। जनता इस सत्य को समझ गयी है। उसने समझ लिया है कि रोग पुराना है-इसका उपचार होने दिया जाए। अब जनता ममता दीदी और केजरीवाल से कह रही है......आपका क्या होगा जनाबे आली?

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

उगता भारत Contributors help bring you the latest news around you.