जम्मू-कश्मीर पर सर्वानुमति आवश्यक

  • 2016-09-05 05:45:19.0
  • राकेश कुमार आर्य

जम्मू-कश्मीर पर सर्वानुमति आवश्यक

कश्मीर हमारी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रतीक है। इस समय देश के लिए प्रसन्नता का विषय है कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान को कश्मीर पर मुंह की खानी पड़ रही है और वहां भारतीय पक्ष को लोग अधिक गंभीरता से सुन व समझ रहे हैं। पिछले 70 वर्ष से यह देश कश्मीर की आजादी की लड़ाई लड़ता आ रहा है। इस समस्या को लेकर किसने क्या गलती की, और किसकी नीतियों के कारण यह समस्या उलझती चली गयी, अब इस पर विचार करने या ताने उलाहने देने का समय नही है, अब तो समय राष्ट्रीय मुद्दों पर एकमत होकर और सर्वानुमति बनाकर काम करने का है। हमें इस विषय में दिखाना चाहिए कि देश में भाजपा की या किसी एन.डी.ए. की सरकार नही है अपितु एक राष्ट्रीय सरकार है, जिसे हर एक राजनीतिक दल की देश के हर वर्ग और संप्रदाय की स्वीकृति और सहमति प्राप्त है। देश की सरकार जो भी निर्णय लेगी उसे सब मानेंगे और सरकार भी वही निर्णय लेगी जिसे सब मानेंगे। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने को लेकर कोई राजनीति नही की जाएगी। श्री अब्दुल्ला, का यह कथन प्रशंसनीय है। लगता है कि वह भी पिछले इतिहास से शिक्षा लेना चाहते हैं और कश्मीर की उन्नति के लिए तथा इस 'धरती के स्वर्ग' की रक्षा के लिए वह भी अपनी ओर से सदप्रयास करने के इच्छुक हैं। जम्मू-कश्मीर की वर्तमान मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी कुल मिलाकर सही भूमिका निभा रही हैं। उन्हें भारतीय मीडिया और राजनीतिक दलों का सहयोग व समर्थन मिलना चाहिए। क्योंकि वह अपने आपको सर्वाधिक संकट में डालकर देश के साथ खड़ा करने में इस समय खुशी अनुभव कर रही हैं।


इस समय देश के बच्चे-बच्चे की इच्छा है कि कश्मीर समस्या का समाधान अब होना ही चाहिए और पी.ओ.के. को लेकर पाकिस्तान से बात होनी चाहिए ना कि हमारी कश्मीर को लेकर कोई बातचीत हो। सरकार 26 अक्टूबर 1947 के कश्मीर के महाराजा हरिसिंह के विलय पत्र को आधार बनाकर आगे बढ़े, जब इस रियासत का विलय भारत राज्य के साथ कर दिया गया था। उस समय के जम्मू-कश्मीर राज्य की जितनी बड़ी सीमाएं थीं, वहां तक का जम्मू-कश्मीर हमारा है। यह बिल्कुल वैसे ही माना जाए जैसे देश की अन्य रियासतों के विलय पत्रों के बाद उन्हें भारत का राज्य या एक भाग मान लिया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी जिस गंभीरता के साथ सभी लोगों का विश्वास जीतकर आगे बढ़ रहे हैं, उससे लोगों में उनके प्रति विश्वास बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी किसी समस्या के समाधान के लिए युद्घ को आवश्यक नही मानते हैं, यहां तक वह गांधीवादी हैं, पर युद्घ को अंतिम विकल्प अवश्य मानते हैं, यहां वह सावरकरवादी है। भारतीय राष्ट्र का इतिहास भी यही बताता है कि युद्घ को अंतिम विकल्प मानकर चलो। पर युद्घ से पहले शांति की हर संभावना पर कृष्णवादी बनकर विचार करो और यदि इस महान कार्य के लिए 'दूत' भी बनना पड़े तो बनो।

देश के गृहमंत्री राजनाथसिंह के नेतृत्व में 30 सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर के दौरे पर है, जो वहां जाकर कश्मीर समस्या के समाधान के लिए सभी आवश्यक उपायों पर विचार करते हुए कश्मीर के लोगों का विश्वास जीतने के प्रयास करने हेतु गया है। यह अच्छी बात है कि देश की सरकार इस समय राष्ट्रीय सरकार के रूप में काम कर रही है और वह कश्मीर पर आक्रामक होकर भी सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर एक राष्ट्रीय सहमति बनाकर उसके अनुसार काम करना चाहती है। वैसे कश्मीर की बर्फ में आग लगाने वालों को हमारा हर राजनीतिक दल यदि अपना शत्रु मानता है तो ऐसे राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलना आवश्यक है। अच्छा हो कि हमारा यह राष्ट्रीय परिवेश देर तक बना रहे और हम इसके चलते ही अपनी इस 70 वर्ष पुरानी समस्या का समाधान खोज लें। इस समय देश के नागरिकों का पावन कत्र्तव्य है कि वे कोई ऐसा कार्य ना करें जिससे समाज में किसी प्रकार की घृणा फैले या किसी राजनीतिक दल या सामाजिक संगठन के विरूद्घ कोई वैमनस्य का भाव उत्पन्न हो।

हमें ध्यान रखना होगा कि इस समय हमारा शत्रु तेजी से अपने लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने में लगा है, और वह बौखलाहट में आकर कोई भी निर्णय ले सकता है। हमें उसकी तैयारियों को समझना होगा। निश्चय ही हमारा संकेत पाकिस्तान की ओर है जिसका नेतृत्व कमजोर और सेना आतंकवादी है जिसके साथ आतंकवादी काम करके प्रसन्न होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी को इस समय देश के लोगों के नैतिक समर्थन की आवश्यकता है, उनकी यह समझदारी है कि उन्होंने कश्मीर पर देश के राजनैतिक दलों का राजनीतिक समर्थन प्राप्त करने की भी पहल की है। वास्तव में इस समस्या के समाधान के लिए हमें ऐसी ही सर्वानुमति की आवश्यकता है।

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

उगता भारत Contributors help bring you the latest news around you.