कश्मीर पर बदला चीन का रुख

  • 2016-08-17 05:00:13.0
  • राकेश कुमार आर्य

कश्मीर पर बदला चीन का रुख

बहुत पहले एक गीत सुना था-'न जाने किस दिन लालकिला मर्दानी भाषा बोलेगा।' इस स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब पीओके और बलूचिस्तान का नाम लेकर पाकिस्तान को स्पष्ट संकेत दे रहे थे कि वह स्वयं अपने गिरेबान में झांके और कश्मीरियों की स्वतंत्रता की बात करने से पहले अपने लोगों की स्वतंत्रता की बात करे, तो पहली बार लगा कि लालकिला आज मर्दानी भाषा बोल रहा है। पीएम के इस भाषण का असर भी हुआ। बौखलाए पाकिस्तान ने हमारे प्रधानमंत्री का भाषण समाप्त होने से पहले बलूच नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया। इतना ही नही अब चीन के रुख में भी बड़ा बदलाव नजर आता दिख रहा है। सरकार द्वारा संचालित मीडिया ग्लोबल टाइम्स अब तक पाक अधिकृत कश्मीर को पाक प्रशासित कश्मीर के नाम से जिक्र करता था। लेकिन 'ग्लोबल टाइम्स' ने दो बार पाक अधिकृत कश्मीर का जिक्र किया है। जिसे जानकार चीन की नीति में एक अहम परिवर्तन मान रहे हैं। पेपर में लिखा गया है कि कश्मीर के मुद्दे पर इस बात की संभावना बेहद ही कम है कि चीन भारत या पाकिस्तान का पक्ष लेगा। हाल ही में सरकार द्वारा संचालित 'पीपल डेली' ने पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी और पाकिस्तानी आर्मी के जवानों की गश्ती दल का एक फोटो छापा था, और कहा था कि दोनों देशों के जवान चीन-पाक सीमा पर अभ्यास कर रहे थे। लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान के चीन-पाकिस्तान इकॉनिमक कॉरिडोर(सीपीइसी) पर ऐतराज के बाद ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि इस बात की संभावना बेहद ही कम है कि भारत के विरोध के बाद चीन सीपीइसी पर काम करना बंद कर देगा।


चीन इसके विपरीत भारत और पाकिस्तान से आर्थिक क्षेत्रों में ज्यादा सहयोग चाहता है। इन हालात में चीन निश्चित तौर पर भारत और पाकिस्तान के पक्ष में नहीं जाएगा। बल्कि वो तटस्थ भूमिका में रह सकता है। पेपर के हवाले से कहा गया है कि चीन का मत है कि पीओके में किसी तीसरे देश के व्यापारिक प्रवेश को रोकने के लिए भारत को भी आगे आना चाहिए। सीपीइसी के मुद्दे पर भारत को पूर्वाग्रह रहित होकर खुले दिमाग से सोचने की जरूरत है। कश्मीर से सटे पाक सीमा के पास भारत आधारभूत संरचना के द्वारा वो सीपीइसी तक पहुंच बना सकता है। और सीपीईसी के जरिए भारत सेंट्रल एशिया तक पहुंच बना सकता है।

गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान का विरोध कर रह अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ताओं ने सीपीइसी को बंद करने को कहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पाकिस्तान सरकार से अधिकार चाहिए ऐसा न होने पर वो किसी भी कीमत पर सीपीईसी का निर्माण नहीं होने देंगे। ये सारे संकेत और परिस्थितियां स्पष्ट कर रही हैं कि जब किसी देश का नेता दिल से बोलता है, और देश के सम्मान को देखते हुए पूरी गंभीरता के साथ बोलता है, तो उसके अच्छे परिणाम आते हैं। भारत का प्रत्येक नागरिक अंतर्राष्ट्रीय शांति के प्रति वचनबद्घ है, और वह नही चाहता कि हमारे देश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक आतंकवादी या युद्घ के लिए भडक़ाने वाले देश के रूप में जाना जाए। परंतु इसके साथ-साथ यह भी सत्य है कि भारत का हर नागरिक अपने देश की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अंतर्राष्ट्रीय शांति के प्रति अपनी वचनबद्घता से कहीं अधिक प्रतिबद्घ है। पाकिस्तान बात-बात पर सवा अरब की आबादी के इस देश का अपमान करे और ऐसी परिस्थितियां पैदा करे कि जिससे वातावरण तनावपूर्ण हो तो भारत को भी बोलने का पूरा अधिकार है। प्रधानमंत्री श्री मोदी को इस बात के लिए दाद देनी होगी कि उन्होंने लालकिले की प्राचीर से बहुत ही मर्यादित और संतुलित शब्दों का प्रयोग किया, और कूटनीतिक ढंग से पड़ोसी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा जकडक़र बांधने में सफलता प्राप्त की कि वह मोदी द्वारा लगायी गयी गांठों को खोलने में अब शायद ही सफल हो पाए।

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

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