बनारस में बना रस

  • 2016-12-27 06:30:02.0
  • राकेश कुमार आर्य

बनारस में बना रस

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने चुनाव क्षेत्र बनारस में जाकर विपक्ष को और खासतौर से राहुल गांधी को जिस प्रकार धोया है उससे दो बातें स्पष्ट हो गयीं हैं-एक तो यह कि उत्तर प्रदेश सहित जिन प्रदेशों में भी 2017 विधानसभा चुनाव होने हैं, उनका मुख्य चुनावी मुद्दा नोटबंदी रहेगा। दूसरे-प्रधानमंत्री के बोलने से कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी द्वारा 'भूकंप' ला देने की उनकी सारी भविष्यवाणियां क्षीण हो गयी हैं। राहुल गांधी प्रधानमंत्री पर कोई ठोस और तथ्यात्मक आरोप लगाने में असमर्थ रहे हैं और प्रधानमंत्री ने अपने वाक चातुर्य से जनता के सामने उल्टे राहुल को ही कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। नोटबंदी के चलते उत्तर प्रदेश का चुनाव बेईमानों को संरक्षण देने वाले दलों और बेईमानों का पर्दाफाश करने वाले दलों के बीच बनने वाला चुनाव होकर रह गया है। यदि इस प्रकार यह चुनाव होता है तो यह उचित ही होगा।

नोटबंदी का विरोध कर रहे नेताओं और पार्टियों पर निशाना साधते हुए बनारस में मोदी ने कहा, कुछ लोग कहते हैं कि मोदी ने इतना बड़ा फैसला (नोटबंदी) ले लिया, लेकिन उनको अनुमान नहीं था। यह बात सही है कि इस फैसले को लागू करने से पहले मैंने बहुत सी बातें सोची थीं, बहुत सी चीजों का अनुमान किया था, लेकिन मैं एक चीज का अनुमान नहीं कर पाया था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि देश के कुछ नेता और राजनीतिक दल हिम्मत के साथ बेईमानों के पक्ष में खड़े हो जाएंगे। आपको पता है कि पाकिस्तान घुसैपठियों को भारत में भेजने के लिए सीमा पर फायरिंग शुरू कर देता है। इससे सुरक्षाबलों का ध्यान भटक जाता है और आतंकी लपक कर घुस जाते हैं। इन दिनों संसद में आपने देखा होगा, तू-तू, मैं-मैं होती है। इससे ध्यान भटकाया जाता है। बेईमानों को बचाने के लिए, उन्हें रास्ता दिखाने के लिए तरह-तरह की तरकीबें अपनाई जा रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस वक्तव्य में कांग्रेस सारे विपक्ष के द्वारा संसद की गयी उपेक्षा और वहां बहस से बचने की उसकी सारी चालों को बड़ी चतुराई से जनता की संसद में लाकर रख दिया है। मोदी समझते हैं कि इस देश की जनसंसद निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने चण्डीगढ़ के परिणामों को देख लिया है और बनारस में बोल रहे मोदी चण्डीगढ़ के परिणामों को देखकर और भी कहीं अधिक उत्साहित और आक्रामक दिखाई दिये।

पीएम ने कहा अगर गन्दगी का ढेर हो और आप वहां से निकलते हैं तो बदबू आती है पर जैसे ही गंदगी साफ करते हंै तो बदबू बहुत भयंकर हो जाती है, वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है। बात साफ है कि प्रधानमंत्री गंदगी के सारे ढेर को मिटाने की प्रतिज्ञा कर चुके हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि देश की जनता भी अपने प्रधानमंत्री के साथ खड़ी दिखाई दे रही है और वह पचास दिन नही बल्कि सौ दिन भी कष्ट सहने के लिए तैयार है। हां, इतना अवश्य है कि देश की जनता बेईमानों का उपचार चाहती है। यदि प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता को उपचार देने में सफल होते हैं और बेईमानों व भ्रष्टाचारियों का सफाया करने में उन्हें मनोवांछित सफलता मिलती है तो वह निश्चय ही देश के महानतम प्रधानमंत्री की श्रेणी में पहुंच जाएंगे। पर अभी मोदी को इस परीक्षा से गुजरना होगा। प्रधानमंत्री मोदी के विरोधी हर प्रकार का चक्रव्यूह रचने की तैयारियां कर रहे हैं, उन्हें बाहरी शत्रुओं से ही नही देश के भीतरी शत्रुओं से भी खतरा है। शत्रु हर कदम पर बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा है। जिन लोगों का बनाया हुआ बड़ा साम्राज्य मोदी ने भंग किया है उन्हें निश्चय ही बहुत बड़ी पीड़ा हो रही है। पर मोदी को अपने देश की स्थिति को देखकर जो पीड़ा होती है वह बेईमानों की पीड़ा से कहीं बड़ी है। सारा देश बहुत समय से कह रहा था-
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।
हर सडक़ पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
आज मोदी ने देश की इस पीड़ा का उत्तर बनने का प्रयास किया है और बहुत बड़ी क्रांति करके लोगों को आश्वस्त किया है कि यदि हम सब बेईमानों के विरूद्घ उठ खड़े होंगे तो इस देश को फिर से सोने की चिडिय़ा बनाने में देर नही लगेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने ठीक ही कहा है कि पाक जैसी रणनीति हमारे कुछ लोग अपना रहे हैं, पाक जैसी हरकतें हमारे विरोधी कर रहे हैं, कुछ राजनेता बेईमानों के साथ खड़े हैं, जब हमने फैसला लिया, तब हमने नेताओं का आंकड़ा नहीं देखा, अब देखिएगा देश सोने की तरह तपकर साफ निकलेगा, अच्छा है किसी का कालाधन तो किसी का कालामन खुल रहा है, देश के पढ़े लिखे नौजवानों की मुझे मदद चाहिए, भ्रष्टाचार, कालाधन की लड़ाई हमें जीतनी है, 8 नवंबर को ही जाली नोट दफन हो गए। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के सार में ये मुद्दे उठाकर देश की जनता से और विशेषत: देश के नौजवानों से सहयोग प्राप्त करने की बात कही है। यह उनकी भाषण शैली का एक निराला ढंग है कि वे सीधे जनसंवाद स्थापित कर देश के युवावर्ग को अपने साथ लेने में सफल हो जाते हैं। बनारस में चुनावी चासनी के लिए जो रस बना है वह भाजपा के लिए प्रदेश में सरकार बनाने में कितना कारगर होगा, यह तो समय बताएगा परंतु पीएम मोदी ने इस समय विपक्ष को सियासी काशी के चक्रव्यूह में फंसाकर तो खड़ा कर ही दिया है।

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

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