सदगुण विकृति के शिकार अखिलेश यादव

  • 2016-08-04 03:30:46.0
  • राकेश कुमार आर्य

सदगुण विकृति के शिकार अखिलेश यादव

अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के एक युवा मुख्यमंत्री हैं और उनके विषय में हमारी मान्यता है कि वह एक गंभीर व्यक्तित्व के ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो समाज में व्याप्त विसंगतियों से जूझने का साहस रखते हैं। पर उनके साहस रूपी पैरों में चाचा आजम खां और चाचा शिवपाल जैसे कई पत्थर बंधे हैं, जो उन्हें ऊंची छलांग नहीं लगाने देते। फिर भी मुख्यमंत्री अपने चारों ओर डेरा डाले पड़ी नकारात्मक और विध्वंशात्मक शक्तियों से लड़

रहे हैं। श्री यादव जिस प्रकार की भावभंगिमा और सहनशीलता के साथ इन शक्तियों से निपट रहे हैं उससे उनके विरोधी भी प्रभावित हैं। यही कारण है कि भाजपा सहित किसी भी पार्टी को प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री को घेरने का कोई मुद्दा नहीं मिला है।

प्रदेश में कैबिनेट मंत्री आजम खां मुख्यमंत्री श्री यादव के लिए सबसे अधिक समस्याएं खड़ी करते हैं। इसके दो कारण है- एक तो आजम खां को 'नेताजी' का वरदहस्त प्राप्त रहा है। मुलायम सिंह यादव अपने अजीज आजम खां

की सब कुछ सुन सकते हैं पर उनके विरुद्ध किसी की कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। इसलिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने काबिना मंत्री के विरुद्ध कार्यवाही करने से बचते हैं। दूसरे, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक संकोची स्वभाव के मुख्यमंत्री हैं। वह पिता का सम्मान करने के साथ-साथ उनके मित्रों का भी सम्मान करना चाहते हैं। इस प्रकार मुख्यमंत्री अखिलेश एक 'सदगुण विकृति
' के शिकार हैं।

ऐसा भी नहीं है कि अखिलेश यादव एक निस्सहाय मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने डी पी यादव जैसे आपराधिक किस्म के व्यक्ति को अपनी पार्टी में घुसने नहीं दिया और अभी पिछले दिनों सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के चाहने के उपरांत भी एक मुस्लिम नेता की पार्टी के सपा में विलय को उन्होंने होने नहीं दिया। इसका अभिप्राय है कि अखिलेश सपा को अपराधियों की पार्टी की छवि से बाहर निकालना चाहते हैं। उनकी सोच

है कि पार्टी को सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने और अपराधियों से हाथ मिलाने से दूर किया जाए।

अपनी इस सोच को सिरे चढ़ाने में मुख्यमंत्री के लिए सबसे पहली और सबसे बड़ी बाधा आजम खां हैं। जिन्होंने अभी हाल ही में बुलंदशहर हाईवे पर मां बेटी के साथ हुई हैवानियत के मामले में फिर एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि बुलंदशहर की घटना में पुलिस अफसरों के विरुद्ध की गई कार्यवाही तो ठीक है

, परंतु सपा सरकार को विरोधियों पर भी नजर रखनी होगी क्योंकि विरोधी सपा सरकार को बदनाम करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। इसका अर्थ हुआ कि प्रदेश में ऐसी हैवानियत को भी विपक्षी ही करा रहे हैं।

वास्तव में बुलंदशहर की घटना में मुस्लिमों के नाम आते ही आजम खां को 'दाल में काला' दिखाई देने लगा। वैसे आजम खां और उनके समर्थक या उनकी विचारधारा के 'सेकुलर' महानुभावों की घोषणा होती है कि अपराधी का कोई मजहब नहीं होता पर पता नहीं क्या बात है

ये हमारे 'सेकुलर महानुभाव' अपराधी के मजहब को पहचानकर ही अपनी टिप्पणियों का निर्धारण करते हैं। ऐसा करते समय ये भूल जाते हैं कि हैवानियत करने वाला केवल एक अपराधी है। उसका कोई धर्म नहीं रहा-इसलिए वह अधर्मी, अन्यायी और अत्याचारी होकर पापी हो गया। उस पापी का मजहब पहचानकर पता नहीं कब तक हमारे नेता देश को छलेंगे? प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव को चाहिए कि वह अपने मंत्री की जुबान पर लगाम
लगाएँ।

वैसे प्रदेश के मंत्रिमंडल में केवल आजम खां ही एक ऐसे मंत्री हैं जो बेलगाम रहते हैं। इससे उनको बहुत बड़ी राहत मिलती है। क्योंकि ऐसा करने से एक तो उनके वर्ग के लोगों में उनकी छवि एक बेधड़क नेता के रूप में बनती है। उन लोगों में ये संदेश जाता है कि आजम खां का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यद्यपि मुस्लिमों में भी बहुत लोग ऐसे हैं जो आजम खां के 'विषवमन' को प्रदेश की जनता के लिए

घातक मानते हैं। दूसरे आजम खां की तैयारी अखिलेश को और सपा को अपने लिए 'कंधा' बनाकर आगे बढ़ने की है। वह इस मंच का उपयोग अपने को नेता बनाने के रूप में कर रहे हैं। वह सपा को उपयोग करके फेंक देंगे और हो सकता है कि एक अलग पार्टी बना लेंगे। ठाकुर अमर सिंह को पार्टी में लाने पर उन्होंने पार्टी अध्यक्ष के लिए कहा था कि उनकी पार्टी है वह जैसा चाहे कर सकते हैं। इसका अर्थ यही था कि मुझे तो कुछ देर इस मंच का दुरुपयोग करना है और उनकी पार्टी को इनके लिए छोड़ कर आगे बढ़ना है। उन्होंने एक निजी न्यूज़ चैनल के चीफ एडिटर को साक्षात्कार देते हुए भी कहा है कि वह स्वयं प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं।
अब सपा में मुलायम सिंह यादव के रहते उन्हे किसने प्रधानमंत्री पद का दावेदार बना दिया? स्पष्ट है कि किसी ने भी नहीं, तो फिर उन्होंने ऐसा क्यों कह दिया कि वह स्वयं प्रधानमंत्री पद के दावेदार
हैं। स्पष्ट है कि उनका दीर्घकालीन चिंतन और भीतर ही भीतर उनकी चल रही तैयारी ही इस बात को उनसे कहला गई है।

हो सकता है कि मुलायम सिंह यादव आजम खां के इरादों को भांप नहीं पा रहे हो क्योंकि वह जिस पर कृपालु होते हैं उस पर कृपालु हुए ही रहते हैं। पर अखिलेश यादव के साथ ऐसा नहीं है वह जान रहे हैं कि आजम खां के निकले हुए 'पंख' पार्टी के लिए कितने दु:खदायक हो सकते हैं। हां, इतना अवश्य है कि अखिलेश जानकर भी चुप हैं क्योंकि प्रदेश में विधानसभा चुनाव का समय है।

चुनावों से पहले वह कुछ करना नहीं चाहते। उनका सदगुण अब उनके लिए भारी होता दिख रहा है। अब उनसे न तो कुछ सटका जा रहा है और न ही कुछ उगला जा रहा है।

हमारी मीडिया को भी आजम खां जैसे लोगों से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया लेने से बचना चाहिए। ऐसे विवादित बयान देने वाले नेता सुर्खियों में आने के लिए विवादित बयान देते रहते हैं। विवादित बयान के माध्यम से उनकी राजनीति चलती रहती है और अंधे को क्या चाहिए

?- दो नैन। आजम खां प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं, पार्टी अध्यक्ष या पार्टी प्रवक्ता नहीं तब उनकी ओर मीडिया जाती क्यों है? क्या उन्हें एक नया 'जिन्ना' बनाने के लिए ऐसा होता है या इस होने में भी कोई षड्यंत्र है? प्रदेश में अन्य मंत्री भी हैं जिन्हें कोई नहीं जानता, तो मीडिया को आजम के साथ भी ऐसा ही बर्ताव करना चाहिए।

मुख्यमंत्री अखिलेश जितनी जल्दी अपनी सदगुण

विकृति के जंजाल से बाहर निकलकर अपनी फॉर्म में कार्य करेंगे उतना ही वह प्रदेश और पार्टी के हित में होगा।