‘वायसराय’ नही जननेता चुनने का समय है

भारत के एक अधिकार विहीन लेकिन अपनी सादगी के भीतर छिपे अधिकार संपन्न प्रधानमंत्री के अवसान का समय आ गया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जा रहे हैं, लेकिन शिकन उनके चेहरे पर न होकर सोनिया गांधी के चेहरे पर हैं। डा. मनमोहन सिंह को राजनीतिक अधिकार विहीन करके बैठाया गया और ‘सोनिया कीर्तन मंडली’ ने […]

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अकबर था-फतेहपुर सीकरी का संस्थापक?

राकेश कुमार आर्य(पिछले दिनों 26 मार्च को अपनी बार एसोसिएशन के अधिवक्ता साथियों के साथ फतेहपुर सीकरी जाने का मुझे सौभाग्य मिला। हमारे 46 सदस्यीय यात्री दल का नेतृत्व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री महीपाल सिंह भाटी कर रहे थे। जिसमें मुझसे अलग अधिवक्ता साथियों में प्रमुख नाम थे-श्री जयपाल सिंह नागर, श्री ऋषिपाल भाटी, […]

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सांस्कृतिक मूल्यों को समझने की आवश्यकता है

जब किसी विद्वान ने हिंदी साहित्य के लिए तन, मन और धन के शब्द के समुच्चय को दिया होगा तो सचमुच उसने हिंदी साहित्य की बहुत बड़ी सेवा की थी। ये तीन शब्द भारत की ही नही अपितु विश्व की भी समग्र व्यवस्था को अपने आप में निहित करने वाले सार्थक शब्द हैं। परिवार से […]

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आर्य-द्राविड़ की धारणा का झूठ

भारत में आर्यों को विदेशी बताने वालों ने ही यहां गोरे-काले अथवा आर्य-द्राविड़ का भेद उत्पन्न किया। जिससे यह बात सिद्घ हो सके कि भारत में तो प्राचीन काल से ही गोरे-काले का भेद रहा है और यहां जातीय संघर्ष भी  प्राचीन काल से ही रहा है। इसके लिए देवासुर संग्राम को या आर्य दस्यु […]

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सावरकर ने हमें बताया था नेहरू के कारण हम चीन से हारे

आस्टे्रलियाई पत्रकार मेक्सवेल से भी पहले सावरकर ने हमें बताया थानेहरू के कारण हम चीन से हारे राकेश कुमार आर्य जितना यह सत्य है कि अहिंसा की रक्षा हिंसा से होती है, उतना ही यह भी सत्य है कि सत्य की रक्षा शस्त्र से होती है। आजादी के बाद उभरे हमारे नेतृत्व ने भारत के […]

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संविधान निर्माण पर डा० अंबेडकर के विचार

हमारे देश के संविधान के विषय में समय-समय पर कुछ लोगों को आपत्तियां होती रही हैं, डा. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान सभा के अंतिम दिन जो भाषण दिया था वह हमारे लिए बहुत कुछ मार्गदर्शन कर सकता है। इस भाषण में डा. बी.आर. अंबेडकर ने कई शंकाओं का समाधान प्रस्तुत किया। जिसे ध्यान से पढऩे […]

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आर्यों का आदि देश आर्यवर्त (भारत) है

राकेश कुमार आर्य एक षडय़ंत्र के अंतर्गत भारत को नष्ट करने के लिए जो मिथ्या और भ्रामक कथा-कहानियां गढ़ी गयी है उनमें सबसे प्रमुख है-आर्यों का विदेशी होना। प्रश्न है कि ऐसी कहानियां गढ़ी क्यों गयीं? इसका उत्तर ये है कि भारतीयों के प्राचीन धर्म और इतिहास को मिटाकर भारत में ईसाइयत का प्रबलता से […]

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…और नेहरू बोले-‘जला डालो इन्हें’

शहरों में हम जहां एक ओर मानवता के संपूर्ण विकास का सपना संजोते हैं और उसे धरती पर उतारने का प्रयास करते हैं, वहीं मानव समाज को एक पाशविक समाज की भांति रहने के लिए अभिशप्त हुआ भी देखते हैं। इसे मानवता की घोर विडंबना ही कहा जाएगा कि एक ओर जहां बहुमंजिली इमारतें हमारे […]

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…और अंतिम क्षणों में गोडसे ने गांधी से कहा था-‘नमस्ते, गांधी जी’

राकेश कुमार आर्य 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई गयी है। इस अवसर पर कुछ विचारणीय बातें हैं, जिन्हें इतिहास से ओझल करने का प्रयास किया गया है। उदयवीर ‘विराज’ की पुस्तक ‘तीन गांधी हत्याएं’ इस विषय में हमारे सामने बहुत कुछ स्पष्ट करती है। उक्त पुस्तक के अध्ययन से कई तथ्य स्पष्ट […]

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मेरठ, महर्षि दयानंद और मोदी

मेरठ का भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह क्षेत्र कुरूवंशी राजधानी हस्तिनापुर से ध्वंसावशेषों के पास ही बसा है। महाभारत की साक्षी है कि जब अर्जुन और कृष्णजी ने खाण्डव वन का दहन किया तो उन्होंने मय नामक शिल्पकार से मित्रता कर युधिष्ठिर के राजभवनों का इंद्रप्रस्थ में निर्माण कराया। जिनके अवशेष […]

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