घास की रोटियां और कीचड़ का पानी पीने को मजबूर हैं बुंदेलखंड के किसान

  • 2016-04-16 08:30:59.0
  • अजय आर्य

क्या आप जानते हैं कि हर रोज कितने किसान गरीबी की मार झेल कर मौत को गले लगाते हैं या बीती रात कितने लोग बगैर खाये सो गए थे? शायद नहीं. इससे हमें क्या फर्क पड़ता है? वो लोग थोड़ी न कोई सेलेब्स हैं, जिनकी मौत का दुःख करके हम भी फेसबुक के ट्रेंड कर रहे ऑप्शन से लोगों की नज़रों में आ पाएंगे. हमारे लिए महत्व्पूर्ण यह है कि आज प्रधानमंत्री जी की अमेरिका रैली में कितने लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए या किस व्यक्ति की थाली में बीफ था?
अब कुछ लोग कह सकते हैं कि मीडिया जो दिखाता है हम वही देखते हैं. पर मीडिया को ये अधिकार दिया किसने? हमनें. जो TRP बढ़ाने के लिए हर वो खबर दिखाने पर आमादा है, जो उनकी जेब भरने में सहायक हो. इस सब के बीच में धरातल और सतही ख़बरें बेशक ही छूट क्यों न जाएं.

पहली नज़र में देखने पर ये तस्वीरें अफ्रीका के किसी गरीब कबीले की लग सकती हैं.


कीचड़ का पानी

यहां सूखे का आलम यह है कि लोग भूख मिटाने के लिए घास से बनी रोटियां और कीचड़ का पानी निकाल कर पीने को मजबूर हैं.


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देश तरक्की कर रहा है, हम सबको दिखाई दे रहा है. हमारी GDP भी आज विश्व सूचकांक पर अपनी स्थिति दर्ज करा रही है. रोज नई योजनाएं बनाई जा रही हैं, रोज नए वादे किये जा रहे हैं. पर असल में हमारे देश की क्या स्थिति है, ये हम खुद नहीं जानते.

(साभार:गजब पोस्ट)

अजय आर्य ( 40 )

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