कर ग्रहण, राष्ट्र निर्माण और विदेश नीति

  • 2016-11-30 06:30:47.0
  • राकेश कुमार आर्य

कर ग्रहण, राष्ट्र निर्माण और विदेश नीति

गतांक से आगे........
मंत्रणा का स्थान गुप्त रहे
राजा को अपने विश्वस्त मंत्री के साथ राज्य के कल्याणकारी कार्यों, कार्यक्रमों व नीतियों पर चर्चा हेतु एकांत और गुप्त स्थान का चयन करना चाहिए। राजा के लिए मनु कहते हैं कि उसे ऐसे स्थान पर गुप्त मंत्रणा करनी चाहिए जहां एक शलाका भी न हो (अध्याय 7 श्लोक 147) शलाका का अभिप्राय ऐसे स्थान से है जहां तिनके समान छोटे से छोटे प्राणी की या गुप्त मंत्रणा भेदक वस्तु की उपस्थिति की भी संभावना ना हो।

ऐसे गुप्त स्थान की आवश्यकता राजा के लिए इसलिए आवश्यक है कि उसकी नीतियों या कार्य योजना की जानकारी किसी भी स्थिति में बाहर के लोगों को नहीं होनी चाहिए। राजा के निर्णय जितने ही अधिक गोपनीय होंगे उनका महत्व उतना ही अधिक होगा। दूसरे, एकांत स्थान में रहकर विचारों की एकाग्रता बनती है और अधिक संभावना रहती है कि ऐसी स्थिति परिस्थिति में व्यक्ति अधिक गंभीरता की विवेकपूर्ण स्थिति में कोई सटीक निर्णय ले सकता है।
महर्षि मनु ही मंत्रणा की गोपनीयता का महत्व बताते हुए स्पष्ट करते हैं :-
यस्य मंत्रम् न जानन्ति समागम्य पृथग्जना:।
स कृत्स्नां पृथिवी भुक्ते कोशहीनोअपि पार्थिव:। ।। 148।। (115)
अर्थात ''जिस राजा के गूढ़ विचार अन्य जन मिलकर नहीं जान सकते अर्थात जिसका विचार गंभीर, शुद्घ परोपकारार्थ सदा गुप्त रहे, वह धनहीन भी राजा सब पृथिवी का राज्य करने में समर्थ होता है।'' (स.प्र. 158)
राजा के निर्णयों की गोपनीयता इसलिए भी आवश्यक है कि उसके निर्णयों की गोपनीयता को जानने व समझने के लिए उसके शत्रु सदा प्रयासरत रहते हैं, उन्हें जैसे ही राजा की गोपनीयता का पता चलता है वैसे ही वे उसके विनाश की योजना बना सकते हैं।

एक आरोप का निवारण
मनु महाराज पर एक आरोप है कि वह नारी शिक्षा के विरोधी थे। यद्यपि हम इस बिन्दु पर पूर्व में प्रकाश डाल चुके हैं, परंतु यहां पुन: एक श्लोक दृष्टव्य है। वह कहते हैं :-
परस्परम् विरूद्वानां तेषां च समुपार्जनम्।
कन्यानाम् सम्प्रदानम् च कुमाराणा च रक्षणम्।। (स.प्र. 152)
''राजा को योग्य है कि सब कन्या और लडक़ों को उक्त समय से उक्त समय तक ब्रह्मचर्य में रखके विद्वान कराना। जो कोई इस आज्ञा को न माने तो उसके माता-पिता को दण्ड देना, अर्थात राजा की आज्ञा से आठ वर्ष के पश्चात लडक़ा वा लडक़ी किसी के घर में न रहने पावे। किंतु आचार्य कुल में रहते हैं, जब तक समावर्तन का समय न आवे तब तक विवाह न होने पावे।'' (स.प्र. 76)
इस श्लोक में चारों वर्णों के कुमार कुमारियों अर्थात लडक़े-लड़कियों की शिक्षा की घोषणा महर्षि मनु ने की है। यदि वह शूद्रों की शिक्षा के विरोधी होते तो यहां इस श्लोक में ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं वैश्य के लडक़े, लड़कियों की शिक्षा की व्यवस्था की बात कहते। साथ ही नारी को शिक्षा से वंचित रखने के पक्षधर होने की स्थिति में केवल लडक़ों की शिक्षा की बात करते।

राकेश कुमार आर्य ( 1582 )

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