मनु की मर्यादाएं और समाज, भाग-चार

  • 2016-11-05 12:30:28.0
  • अमन आर्य

मनु की मर्यादाएं और समाज, भाग-चार

अपनी बात की पुष्टि में मनु (9/28) में एक अन्य मर्यादा स्थापित करते हैं कि स्त्रियां घर के सुखों की आधार होती हैं। यह नारी जाति का विशेष गुण है कि वह परिवार के सभी सदस्यों के बीच उचित सामंजस्य स्थापित किये रखती है। सारे परिवार को एकता के सूत्र में बांधे रखती है। यहां तक कि अपने पिता और ससुर के घर के मध्य भी वही प्रेम का सेतु बन जाती है, यद्यपि आजकल पढ़ी-लिखी लड़कियां अपने पिता और ससुर के घर में अशांति उत्पन्न कराने का कारण बनती जा रही हैं, परंतु यह समस्या 'इंडिया' की है, 'भारत' में तो आज भी बेटी दो कुलों की लाज (मर्यादा) की रक्षा कर रही है और अपने आपको मनुवादी सिद्घ कर रही है। ऐसी नारियों के लिए मनु की यह भी व्यवस्था है कि स्त्रियां घर की स्वामिनी (9/11) व (5/150) होती हैं। उन्हें गृह स्वामिनी बनाने का सम्मान देना उन्हें एक संस्था की प्राचार्या बना देने के समान है। परिवार एक संस्था है, जिसमें आने वाले बच्चों की पहली शिक्षिका मां (नारी) ही होती है। मां के दिये संस्कार जीवन भर बच्चे के काम आते हैं। इसलिए मां या नारी एक संस्था को संभालती है-यह उसका बहुत बड़ा काम है, क्योंकि इस संस्था से वह राष्ट्र निर्माण करती है, देश को अच्छे नागरिक देती है। मनु ने इस वैज्ञानिक सत्य को समझकर ही नारी को गृहस्वामिनी माना है। आज दुख का विषय है कि नारी इस संस्था की गरिमा नही समझ रही है, इसलिए परिवार टूट रहे हैं, बुढ़ापा वृद्घाश्रमों में पड़ा सड़ रहा है और यौवन मस्ती में लुटता जा रहा है। बचपन की सुध किसी को नही है। परिणाम सामने हैं कि समाज में सर्वत्र निराशा, हताशा का परिवेश है। यद्यपि भारत के गांव देहात में परंपरा से नारी अपने दायित्व का निर्वाह कर रही है। यही कारण है कि गांव देहात में शहरों की अपेक्षा अधिक शांति है। यह सब कुछ मनुवाद के कारण ही संभव है। मनुवाद को उखाड़ फेंकने की सौगंध उठाने वाले लोग तनिक सोचें कि यदि उन्होंने मनुवाद को उखाडऩे में सफलता प्राप्त की तो यह देश मर जाएगा, मानवता मर जाएगी।


स्त्री सशक्तिकरण के उद्घोषक मनु
आज नारी सशक्तिकरण की बातें की जाती हैं। पर नारी सशक्तिकरण है क्या और उसकी दिशा क्या है? इसको कोई स्पष्ट नहीं कर पा रहा। निश्चित रूप से नारी सशक्तिकरण का अर्थ नारी को जो मन में आये सो करने की छूट देना नहीं है-यह बात जितनी नारी पर लागू होती है उतनी ही पुरूषों पर भी लागू होती है।
यदि ऐसी छूट दी गयी तो परिणाम अराजकता के आएंगे। हम ऐसे परिणाम देख भी रहे हैं, नारी सशक्तिकरण के नाम पर नारी को खुली छूट देने वालों ने देख लिया है कि न्यायालयों में दहेज के कितने मामले झूठे आने लगे हैं? कितनी ही सांसों को या ननदों को एक नारी ने ही झूठा फंसाकर उनकी जेल करा दी है और ननदों का जीवन नष्ट कर दिया है। यह कैसा नारी सशक्तिकरण है जहां एक नारी ही नारी को नष्ट कर रही है?
वास्तव में नारी सशक्तिकरण का अभिप्राय है नारी को किसी के द्वारा दमनपूर्वक रखने की छूट न देना। उसके सम्मान और उसकी निजता की रक्षा करना। इसके लिए मनु कहते हैं-
न कश्चिद् योषित: शक्त:प्रसहय परिरक्षितुम्। (9/10)

अर्थात स्त्री को कोई भी पुरूष (या स्त्री स्त्री को) दमन करके नही रख सकता। मनु की यह मर्यादा नारी के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है। साथ ही उसे किसी प्रकार के अमर्यादित और अपरिमित अधिकार भी नहीं देती जिनसे वह स्वयं किसी पर अत्याचार करने लगे। वर्तमान कानून मनु की इस एक पंक्ति की मर्यादा के सामने कितना बौना है-इसके अर्थ को समझकर स्वयं ही स्पष्ट हो जाएगा।
जहां तक नारी को पहले पिता के संरक्षण में फिर पति के संरक्षण में और वृद्घावस्था में पुत्र के संरक्षण में देने की बात है तो इसका अर्थ भी नारी की स्वतंत्रता का हनन न होकर पुरूष समाज उसके सम्मान की रक्षार्थ कहीं पिता के रूप में, कहीं पति के रूप में तो कहीं पुत्र के रूप में एक सुरक्षा प्रहरी के रूप में खड़ा है। पिता, पति और पुत्र से अधिक नारी का कोई सुरक्षा प्रहरी विश्वसनीय नहीं हो सकता। मनुवादी व्यवस्था की विशेषता देखिए कि उसने नारी को अलग-अलग अवस्थाओं में तीन सुरक्षा प्रहरी दिये और वे भी ऐसे कि जिनकी नीयत पर कभी संदेह नहीं किया जा सकता। इनसे अलग अधिक विश्वसनीय चौथा मित्र या सुरक्षा प्रहरी आप ला ही नहीं सकते लाए, तो कहीं ना कहीं 'दामिनी' अपना सम्मान भेडिय़ों से लुटा बैठेगी।
मनु का कहना है-
अरक्षिता गृहे रूद्रा पुरूषैराप्त कारिभि:।
आत्मनमात्मना पास्तु रक्षेयुस्ता: सुरक्षिता:
(9/12)
कहने का अभिप्राय है कि नारी अपने सम्मान की अपने आप सुरक्षा करती है। इसका अभिप्राय है कि जब वह स्वयं मर्यादित रहेगी, संतुलित रहेगी, अपनी लज्जा का स्वयं ध्यान रखेगी, वर्जित स्थानों पर स्वयं अकेले या अजनबी व्यक्ति के साथ नहीं जाएगी।
क्रमश:

अमन आर्य ( 358 )

उगता भारत Contributors help bring you the latest news around you.