अमित शाह के लिए नई चुनौती

  • 2016-01-26 02:00:00.0
  • राकेश कुमार आर्य

अमित शाह ने अपनी प्रतिभा का लोहा एक बार फिर मनवाने में सफलता प्राप्त की है। श्री शाह को पहली बार पार्टी का विधिवत राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अभी तक वह पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राजनाथ सिंह के कार्यकाल के शेष 18 माह के काल को पूर्ण कर रहे थे। परंतु इसी अवधि में उन्होंने भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाने में कीर्तिमान स्थापित किया। भाजपा के सदस्यों की संख्या उन्होंने लगभग ढाई करोड़ से बढ़ाकर ग्यारह करोड़ से अधिक करने में सफलता प्राप्त की। उनके व्यक्तित्व की विशेषता है कि वह प्रवास के दौरान महंगे होटलों के स्थान पर सरकारी अतिथि ग्रहों में रूकने को प्राथमिकता देते हैं, जिससे समय, धन और ऊर्जा का अपव्यय नही होता और इसके लिए वह अपने अन्य पदाधिकारियों को भी प्रेरित करते हैं। श्री शाह की कार्यशैली की यह भी विशेषता है कि वह केवल पार्टी चलाने तक ही अपने आपको सीमित रखते हैं, वह सरकार के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करना अनुचित समझते हैं। इससे प्रधानमंत्री को सरकार चलाने में और पार्टी अध्यक्ष को पार्टी चलाने में सुविधा रहती है। इस संतुलन को लोकतंत्र में बहुत ही आवश्यक माना जाता है, और पिछले अठारह महीने के श्री शाह के कार्यकाल को इसलिए भी सफल माना जा सकता है कि इसमें उन्होंने पार्टी और सरकार के बीच बहुत ही सुंदर समन्वय स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है।

देश के सामने आतंकवाद एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में  उपस्थित है। इस चुनौती से निपटने की भारत की सभी राजनैतिक पार्टियों की अलग-अलग सोच और अलग-अलग नीतियां हैं। आतंकवाद के कारणों पर चिंतन करते हुए अधिकतर  पार्टियां इसे कुछ बेरोजगार युवकों की रोजगार से जुड़ी समस्या के रूप में देखने का बेढंगा नाटक करते हैं, और इसे किसी संप्रदाय से या साम्प्रदायिक मान्यताओं, या साम्प्रदायिक सोच के साथ जोडऩे से बचते हैं।
amit sah bhagva
जबकि सारा विश्व इस समय इस्लामिक आतंकवाद से ग्रस्त है और इतना ही नही इस्लामिक देशों में इस्लामिक उग्रवादी संगठन इस्लाम को मानने वाले लोगों पर भी अत्याचार कर रहे हैं, पाकिस्तान के पेशावर में हुई हाल की आतंकी घटना इसका ज्वलंत उदाहरण है। भाजपा के अमित शाह  ने अपने कार्यकाल में कई बार यह अनुभूति कराई है कि वह सच को सच कहने का साहस रखते हैं। यह थोड़ी बात नही थी कि बिहार में विधानसभा चुनावों के समय चुनाव प्रचार में उन्होंने यह स्पष्ट कहा था कि यदि बिहार के लोगों ने भाजपा को हराया तो पाकिस्तान में आतिशबाजी होगी। ऐसी बात किसी और राजनीतिक पार्टी के द्वारा नही कही जा सकती, अन्य राजनैतिक दल तुष्टीकरण के खेल में लगे रहते हैं। हम आशा करते हैं कि  श्री शाह अपने अगले कार्यकाल में भाजपा पर लगने वाले तुष्टिकरण के आरोपों को मिटाने का हरसंभव प्रयास करेंगे और राममंदिर निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाएंगे। लोग उनसे अपेक्षा करते हैं कि धारा 370 को हटाने और कश्मीर से पलायन कर विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास कराने और उन्हें कश्मीर लौटाने में वह अपनी ठोस पहल करेंगे। देश का बहुसंख्यक वर्ग कश्मीरी पंडितों के साथ अपनी सहानुभूति रखता है और देश की आजादी को तब तक अधूरी मानता है जब तक  उनमें से एक व्यक्ति की भी आंखों में आंसू हैं। हमने आजादी आंसू पोंछने के लिए प्राप्त की थी, पर यह आजादी देश के एक प्रांत में लोगों को आज तक खून के आंसू रूला रही है, आशा है कि भाजपा के नये अध्यक्ष इन आंसुओं की ओर अवश्य देखेंगे, और उनका हाथ इस बार इन आंसुओं को पोंछने के लिए आवश्य उठेगा।

देश में समान नागरिक संहिता की अत्यंत आवश्यकता है। समान नागरिक संहिता का अभिप्राय है कि देश की शासक वर्ग चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से संबद्घ क्यों न हो, किसी वर्ग विशेष पर अत्याचार करने या उनके अधिकारों का शोषण करने या उन्हें मानव अधिकारों से वंचित करने की सोच भी नही सकता। देश की आजादी से पूर्व शासक अंग्रेज थे, पर वह संख्या में कम होकर भी देश के बहुसंख्यक मूल निवासियों पर अत्याचार करते थे, उससे पहले मुस्लिम शासक वर्ग था। जो  संख्या में कम होकर भी बहुसंख्यक वर्ग पर अत्याचार करता था। हमारे देश के संविधान निर्माताओं ने इस सोच पर अंकुश लगाने के लिए देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता महसूस की। आज इस पर गंभीरता से चिंतन करने और देश में इसे सही अर्थों और संदर्भों में लागू कराने की आवश्यकता है। यदि अमित शाह ऐसा करा पाएंगे तो वह न केवल भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र और नीतियों को लागू कराने में सफल होंगे, अपितु वह अपनी नीतियों के आदर्श पुरूष श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वीर सावरकर सहित महर्षि दयानंद, स्वामी विवेकानंद और दीनदयाल उपाध्याय जैसी विभूतियों के आदर्शों पर पुष्पांजलि अर्पित करने के पात्र भी हो जाएंगे। अभी तक देखा गया है कि लोगों ने इन महान विभूतियों के आदर्शों पर पुष्पांजलि तो अर्पित की हैं, परंतु उन आदर्शों को पूर्ण करने का जब समय आया तो वह पलायनवादी सिद्घ हुए हैं। ऐसी स्थिति-परिस्थिति को देखकर देश के लोगों का विश्वास ऐसे पलायनवादी राजनीतिक दलों और राजनीतिज्ञों से उठ गया है ।

भाजपा में आने वाले तीन वर्ष अब अमित शाह के होंगे, इस दौरान उन्हें कई प्रदेशों में विधानसभा चुनावों को देखना होगा, और वहां पार्टी को सत्ता में लाने के लिए भी प्रयास करना होगा। साथ ही यह भी सत्य है कि यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो 2019 का आम चुनाव भी भाजपा श्री अमित शाह के नेतृत्व में लड़ेगी, क्योंकि 2019 चुनावी वर्ष होने के कारण उस समय अध्यक्ष का चुनाव किया जाना संभव नही होगा। हमारी श्री शाह के प्रति शुभकामना है कि वह 2019 में भी पार्टी के लिए सत्ता का मार्ग प्रशस्त करें, और देश की अपेक्षाओं पर खरे उतरते हुए देश के लोगों को उचित बेहतर नेतृत्व देने में सफल हों।

राकेश कुमार आर्य ( 1582 )

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