आतंकियों के विरूद्घ बने कठोर नीति

  • 2016-01-25 01:30:55.0
  • राकेश कुमार आर्य

गणतंत्र दिवस पर देश को दहलाने की योजना बनाकर भारत में घुसे कुछ आतंकियों को पिछले दिनों पकड़ा गया है, जिससे अब तक के सबसे बड़े आतंकवादी हमले के अलर्ट पर अलर्ट आ रहे हैं। पिछले सप्ताह मिस्र में पिरामिड के करीब हुए जबरदस्त धमाके से मिस्र हिलकर रह गया था। इसके पश्चात खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस की ट्यूनीशिया और मोरक्को में हमले करने की धमकी आई। उसके बाद पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर मुड़ गया। भारत में आतंक की एक बड़ी साजिश को बेनकाब करने के लिए 7 राज्यों में धड़ाधड़ छापे पडऩे लगे। उधर हिमाचल के कांगड़ा में एक सीसीटीवी में कैद हुए तीन चेहरों की तलाश भी तेजी से की जाने लगी। इस बीच, पुंछ में ‘कुकर बम’ मिलने लगे। एक के बाद एक दहशत की ऐसी खबरें आईं जिनसे हिंदुस्तानी दंग होने लगे। इन गिरफ्तारियों में कई आतंकी षडय़ंत्रों का भंडाफोड़ हुआ। इन लोगों को 23 जनवरी को देश में 23 स्थानों पर ही बम धमाके करने थे। दूसरे अलर्ट के मुताबिक गणतंत्र दिवस पर भी आतंकवादियों द्वारा आतंकी हमला किये जाने की योजना का हमारे सुरक्षाबलों और गुप्तचर संस्थाओं को पता चला।

हिमाचल के कांगड़ा में एक सीसीटीवी में कैद हुए आतंकियों को लेकर हमारी खुफिया एजेंसियों को डर है कि ये लोग शायद भारत के खिलाफ सबसे बड़े आतंकवादी हमले के किरदार हों। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से इन तीनों आतंकवादियों ने एक टैक्सी पठानकोट के लिए बुक की। ये वही पठानकोट है जहां एयर बेस पर बड़ा आतंकवादी हमला हो चुका है। तीनों निकले और गायब हो गए। बाद में टैक्सी ड्राइवर की लाश बरामद हुई।
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कांगड़ा के एएसपी पंकज शर्मा का कहना है कि ये कि गिरफ्तार हुए तीन लोग वही हैं, जिन्होंने टैक्सी किराए पर की थी। पठानकोट के लिए जो टैक्सी की थी वो 1600 रुपये में तय हुई थी। कुछ चीजें खंगालने के लिए हमने कुछ लोगों को पठानकोट भेजा है। हम लोग केवल क्राइम सीन को लेकर जांच कर रहे हैं। कार की खोज जारी है।

आतंक की ऐसी घटनाओं को देखकर और इतने खतरनाक षडय़ंत्रों की जानकारी होने पर हम लोग इसे बड़े सहज रूप में ले लेते हैं। हम यह नही सोचते कि 1947 से लेकर आज तक इस प्रकार के आतंकियों को रोकने के लिए जम्मू कश्मीर की सीमा पर हम आज तक कितने बड़ी धनराशि व्यय कर चुके हैं और अपने कितने सैनिकों का बलिदान दे चुके हैं? इस सोच के पीछे केवल देश तोडऩे वालों की एक धारणा है कि इस देश का संप्रदाय के नाम पर फिर एक विभाजन किया जाए। यह बड़े दुख की बात है कि आतंकवादियों के या आतंकवादियों को शरण देने वाले लोगों के इस एजेंडा को जानकर भी कुछ लोग देश में उपेक्षित करते हैं।

जो लोग एक संप्रदाय के युवाओं को इस देश के पुन: विभाजन के सपने दिखाकर उनके यौवन का दोहन करते हुए उनके हाथों में एके 47 पकड़ा देते हैं, या उन्हें आत्मघाती दस्ते का एक अंग बनाकर भारत पर हमला करने के लिए भेज देते हैं, उन लोगों को और उनके संरक्षकों को हम पहचानने का प्रयास नही करते, इसका कारण केवल यही होता है कि इससे कुछ लोगों को बुरा लगेगा। जबकि बात बुरा लगने की नही है, बात तो देश की रक्षा की है और देश को फिर से किसी साम्प्रदायिक आधार पर विभाजन की विभीषिका से बचाने की है। उससे बचाने के लिए हमारे सभी राजनीतिक दल एकमत होकर एक राष्ट्रीय नीति बनाने पर सहमत नही होते। जब सब लोग और राजनीतिक दल अपनी देशभक्ति को असंदिग्ध बताते हैं, तो उसे असंदिग्ध प्रमाणित करने के लिए आतंकियों के विरूद्घ एक ठोस रणनीति पर काम करने के लिए तैयार क्यों नही होते?

खुफिया एजेंसियों ने बताया है कि कुछ आतंकी कांगड़ा से निकले और जंगल की आग की तरह पूरे देश में फैल गये। जम्मू कश्मीर के पुंछ में सुरक्षा बलों ने 18 किलो विस्फोटक जब्त किया। सवाल उठा आखिर ये विस्फोटक कहां के लिए लाया गया था। क्या भारत पर हमले की साजिश के तार यहां से भी जुड़ रहे हैं? सुरक्षा बल उस वक्त हैरान रह गए जब उन्हें सरहद से लगे सरोतिन इलाके की तलाशी में 4 प्रेशर कुकर बम मिले। जी हां, प्रेशर कुकर में आईईडी लगा कर रखी गई थीं। इतना ही नहीं एक सिलेंडर बम भी मिला। गैस के सिलेंडर में आईईडी लगा कर रखी गई थी। साफ था यहां आतंकवादी कुकर बम और सिलेंडर बम को लेकर किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर जाते, वहां चुपके से इन्हें रख दिया जाता और उसके बाद ब्लास्ट में तबाही और खूनखराबा मचता।

ये खतरा कितना बड़ा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एनआईए ने एक साथ चार राज्यों में बड़े पैमाने पर छापे मारे और 17 संदिग्ध लोगों को उठा लिया। ये छापे कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और राजस्थान में पड़े।

बताया जा रहा है कि ये सारे छापे कुछ वक्त पहले मुंबई में पकड़े गए संदिग्ध आतंकवादी मुदब्बिर मुश्ताक शेख की निशानदेही पर पड़े हैं। शेख ने जनूद-उल-खलीफा-ए-हिंद नाम का एक संगठन बनाया था। ये वही मुश्ताक शेख है जिसके बारे में कहा जा रहा था कि वह आईएसआईएस में हिंदुस्तानियों की भर्ती का मिशन देख रहा था, वह सोशल मीडिया पर खासा सक्रिय था। कहा ये भी जा रहा है कि ये इंसान ही लोन वुल्फ में बदल सकता था, लोन वुल्फ यानि अकेला भेडिय़ा, आतंक की दुनिया का ऐसा शब्द है जो काफी खतरनाक माना जाता है, ये वह इंसान होता है जिसका कोई आका नहीं होता, कोई हैंडलर नहीं होता, जिसके दिमाग में जुनून और नफरत भर दी जाती है और उसे छूट दे दी जाती है कि जहां भी चाहे जिसपर भी चाहे हमले कर दे।

एनआई के मुताबिक पकड़े गए सभी संदिग्ध आतंकवादी 25 से 30 साल की उम्र के हैं, इनमें एक केमिकल इंजीनियर भी है। कर्नाटक, तेलंगाना और राजस्थान में पकड़े गए सभी लोग मुदब्बिर मुश्ताक शेख के संपर्क में थे। हाल ही में शेख को इंटरनेट पर 6 लाख रुपए का फंड दिया गया था। बताया गया है कि 6 लाख रुपयों में ये ब्रिगेड हथियार खरीदना चाहती थी। आशंका है कि इनके निशाने पर 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस था।

गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि ये एक संवैधानिक दिवस है तो जिस प्रकार से व्यवस्था होनी चाहिए उसी तरह की सुरक्षा के लिए सारे इंतजाम कर रहे हैं। अच्छी बात है कि इतने समय के बाद इतने आतंकियों को पकड़ा जा रहा है और आईएसआईएस को भी एक निर्धारित तरीके से क्रेकडाउन किया जा रहा है, परंतु फिर भी जो गिरफ्तारियां हुई हैं उनसे एक बात तो स्पष्ट होती जाती है कि देश के लिए संकट टला नही है, और हम संकट की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय एकता की और आतंकियों के विरूद्घ कठोर नीति बनाने की आवश्यकता है।

राकेश कुमार आर्य ( 1580 )

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